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लॉकडाउन के कारण बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा

केंद्रीय विद्युत् मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को 90,000 करोड़ रुपये के पैकेज देने के बारे में पत्र लिखा , वित्त पोषण दो चरणों में किया जाएगा, प्रत्येक किश्त 45,000 करोड़ रु की होगी

नई दिल्ली । केंद्रीय विद्युत् मंत्रालय ने वित्तीय संकट झेल रही डिस्कॉम कंपनियों की सहायता के लिए 90,000 करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज देने के सम्बन्ध में सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखा है। इस संबंध में 14.05.2020 को सूचना भेजी गयी है । केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  आरके सिंह ने कहा, “बिजली क्षेत्र के लिए यह पैकेज, इन कठिन समय में बिजली उत्पादन कंपनियों / बिजली वितरण कंपनियों द्वारा आपूर्ति की गई बिजली के वितरण को बनाए रखने के लिए डिस्कॉम के बोझ को काफी कम करेगा।” भारत सरकार ने आत्मनिर्भर अभियान के तहत 13.5.2020 को पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आर ई सी )  के माध्यम से 90,000 करोड़ रुपये की तरलता (नकदी देने ) उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था। इसके तहत, आरईसी और पीएफसी डिस्कॉम कंपनियों को 10 वर्ष तक के लिए  विशेष दीर्घकालिक ऋणों देंगे।

राज्यों / संघ शासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि आरईसी और पीएफसी, डिस्कॉम कंपनियों के लिए तुरंत ऋण देने पर विचार  करेंगे, जो “उदय” के तहत निर्धारित कार्यशील पूंजी सीमाओं के भीतर आगे उधार लेने के लिए है। इसके अलावा, यदि डिस्कॉम कंपनियों के पास “उदय”  की कार्यशील पूँजी सीमा के अंतर्गत विकल्प नहीं है, लेकिन बिजली बकाया के रूप में राज्य सरकार से प्राप्तियाँ हैं और सब्सिडी नहीं दी गयी है तो ऐसी स्थिति में भी राज्य सरकार से प्राप्तियों की सीमा तक ये कम्पनियाँ इन ऋणों के लिए पात्र होगी। चूंकि ये ऋण दीर्घकालिक हैं और डिस्कॉम कंपनियों की कार्यशील पूंजी के तहत नहीं हैं तो राज्य सरकार की पुनर्भुगतान सुरक्षा के साथ, डिस्कॉम कंपनियों के लिए “उदय” की कार्यशील पूंजी सीमा लागू नहीं होगी। इसके अलावा, संबंधित राज्य डिस्कॉम कंपनियों के लिए भारत सरकार को सीमा में छूट के लिए अनुरोध कर सकते हैं, जिनके पास राज्य सरकार से मिलने वाली प्राप्तियाँ नहीं हैं और “उदय” के तहत कार्यशील पूंजी सीमाओं का भी विकल्प नहीं है।

पत्र में कहा गया है कि कोविड  -19 महामारी और लॉकडाउन के कारण बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप बिजली क्षेत्र की सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला में तरलता संकट की स्थिति पैदा हो गयी है। इस स्थिति में बिजली क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला में तरलता के प्रवाह से नकदी की समस्या को समाप्त करने में मदद मिलेगी। यह धनराशि  डिस्कॉम को उन अधिकांश धनराशि  को चुकाने में मदद करेगी, जो उनपर बिजली उत्पादन (गेन्कोस) और वितरण कंपनियों (ट्रांसकोस) का बकाया है। यह विद्युत क्षेत्र में नकदी प्रवाह के चक्र को फिर से शुरू करने में मदद करेगा।

डिस्कॉम कंपनियों को राज्य सरकारों द्वारा गारंटी के आधार पर ऋण प्रदान किये जायेंगे, जिनका उपयोग बिजली उत्पादन (गेन्कोस) और वितरण कंपनियों (ट्रांसकोस) , आईपीपी और आर ई जनरेटर की देनदारियों के भुगतान करने के लिए किया जाएगा। वित्त पोषण की कुल धनराशि  90,000 करोड़ रु है। वित्त पोषण दो किश्तों में किया जाएगा। प्रत्येक किश्त 45, 000 करोड़ रु की होगी।

डिस्कॉम को वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए, 15.5.2020 को जारी किए गए एक अन्य पत्र के अनुसार, बिजली मंत्रालय ने लॉकडाउन अवधि के लिए केंद्रीय बिजली उत्पादन कंपनियों की नियत शुल्क को स्थगित करने का फैसला किया है और इसका भुगतान बाद के महीनों में ब्याज मुक्त तीन बराबर किश्तों में करना होगा। लॉकडाउन अवधि के दौरान, मांग में महत्वपूर्ण गिरावट आई है क्योंकि औद्योगिक और वाणिज्यिक इकाइयां बंद थीं। पावर खरीद समझौतों के अनुसार, डिस्कॉम सभी अनुबंधित मात्रा के लिए बिजली उत्पादन कंपनियों को एक नियत शुल्क का भुगतान करते हैं, भले ही बिजली ली नहीं गयी हो। इससे डिस्कॉम पर बोझ पड़ा क्योंकि उन्हें उस बिजली के लिए भी भुगतान करना पड़ रहा है जिसका लॉकडाउन अवधि के दौरान उपयोग नहीं किया गया था।

डिस्कॉम कंपनियों को लॉकडाउन अवधि के लिए पीजीसीआईएल को देय अंतर-राज्य-वितरण शुल्क (आईएसएस) सहित बिजली आपूर्ति (नियत लागत) पर 20-25 प्रतिशत की छूट देने का सुझाव दिया गया है। डिस्कॉम को इन लागत बचत का लाभ उपभोक्ताओं को देने के लिए कहा गया है जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आएगी।

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