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कुष्ठ रोग को मात देने वाली साधना अब इसके खिलाफ चला रहीं अभियान

औरैया । जब पता चला कि मुझे कुष्ठ रोग है तो लगा कि अब जिंदगी खत्म हो गई लेकिन पति ने मनोबल बढ़ाया और पूरा साथ दिया। फिर सही समय पर नियमित इलाज और मार्गदर्शन के साथ जिंदगी ने फिर करवट ली। यह कहना है कुष्ठ रोग को मात देने वाली साधना का। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के ग्राम पुरवा राहत की निवासिनी साधना यहां के लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक कर रहीं हैं। उन्होंने कुष्ठ रोग को मात देकर अब इसके खिलाफ अभियान छेड़ दिया है।

गृहिणी साधना (46 वर्ष) ने बताया कि कुछ वर्षों पहले मेरे पति राधेश्याम के शरीर में लाल चकत्ते पड़ गए थे। उन्होंने मामूली खुजली समझ कर उसे नज़रअंदाज किया। फिर स्वास्थ्य विभाग के कुष्ठ अभियान में स्क्रीनिंग के दौरान कुष्ठ रोग का पता चला। यह सुनते ही मेरे पति के होश उड़ गए। स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञों की राय और नियमित इलाज से एक ही साल में उन्होंने कुष्ठ को मात दे दी। अब वह स्वस्थ हैं। इसी बीच एक दिन मुझमें भी कुष्ठ के लक्षण दिखे।

मन में नकारात्मक विचार आने लगे। फिर पति ने मेरा मनोबल बढ़ाया और इलाज के लिए प्रेरित किया। फिर मैंने भी कुष्ठ को मात दे दी। तभी मैंने सोचा की जैसे इस रोग का पता चलने के बाद मेरा मनोबल टूटा था वैसे ही और लोगों का भी टूटता होगा। यही सोचकर अब मैं घर के काम निपटा कर ग्रामीणों को चौपाल और खुली बैठक में इस रोग के लक्षण एवं इलाज के लिए प्रेरित कर रहीं हूं।

साधना ने बताया कि वह सभी को समझाती हैं कि कुष्ठ लाइलाज बीमारी नहीं हैं। समय पर सही उपचार से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। इसको छिपाएं नहीं बल्कि डट कर सामने करें। साधना ने बताया कि जो भी ऐसे व्यक्ति उन्हें मिलते हैं जिनमें कुष्ठ जैसे लक्षण प्रतीत होते हैं तो मैं उन्हें कुष्ठ विभाग लेकर जाती हूं ताकि सही पहचान हो सके और पूर्ण मुफ्त इलाज भी।

जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ शिशिर पुरी बताते हैं कि अन्य रोगों की तरह कुष्ठ रोग भी एक प्रकार के सूक्ष्म जीवाणु से होता है। इसके रोगी की त्वचा पर हल्के पीले, लाल अथवा तांबे के रंग के धब्बे हो जाते हैं। इसके साथ ही उस स्थान पर सुन्नपन होना, बाल का न होना, हाथ-पैर में झनझनाहट आदि कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं।

जिला कुष्ठ सलाहकार डॉ. विशाल अग्निहोत्री ने बताया कि साधना अपने गांव के साथ-साथ आसपास के गांवों में भी कुष्ठ अभियान में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग कर रही हैं। साधना अब तक पांच कुष्ठ रोगियों का इलाज करा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पोसी बेसलरी श्रेणी में ऐसे रोगी आते हैं जिनके शरीर में 1 से 5 तक पैच (धब्बे) होते हैं। इसी तरह मल्टी बिसलरी श्रेणी में आने वाले रोगियों में 5 से ऊपर पैच या एक से ज्यादा नर्व इंवाल्ब हो। मल्टी बेसलरी में तंत्रिका तंत्र डैमेज हो जाता है। ऐसे मरीजों को मल्टी ड्रग थेरेपी दी जाती है।(हि.स.)

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