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नाटी इमली में भरत मिलाप देख लाखों श्रद्धालुओं की छलक उठीं आंखें

ऐतिहासिक नाटी इमली मैदान में त्रेता युग का नजारा.चारों भइयन की जय,राजा राम चंद्र की जय से गूंजा बनारस.

वाराणसी । परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए। स्यामल गात रोम भए ठाढ़े । नव राजीव नयन जल बाढ़े। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री रामचरित मानस की ये पंक्तियां गुरुवार को ऐतिहासिक नाटी इमली रामलीला मैदान में जीवंत दिखीं। मैदान पर चित्रकूट रामलीला समिति की ओर से आयोजित भरत मिलाप में प्रभु श्रीराम समेत चारों भाइयों के मिलन के अद्भुत पल लगा मानों समय भी ठिठक गया हो, लोगों की निगाहें रामलीला मंच पर ही टिक गईं । गोधूलि बेला और बारिश के बीच चौदह वर्ष बाद चारों भाइयों को गले मिलते देख लाखों लीलाप्रेमियों की आंखों के कोर गीले हो गए।

विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप देखने के लिए लोग दोपहर बाद से ही मैदान में पहुंचने लगे। यह क्रम लीला के समापन तक बारिश के बावजूद बना रहा। इसके पूर्व रामलीला में अपराह्न 3.45 बजे पुष्पक विमान पर सवार होकर प्रभु राम, लक्ष्मण व सीता अपने सेना प्रमुखों जामवंत, अंगद, लंकापति महाराज विभीषण के साथ धूपचंडी चित्रकूट स्थित रामलीला मैदान से भरत मिलाप स्थल नाटी इमली के लिए प्रस्थान किए। ठीक शाम चार बजे पुष्पक विमान लीला स्थल पर पहुंचा। उधर, पवनपुत्र हनुमान से भगवान राम, लक्ष्मण व माता सीता के वापस आने की सूचना पर भरत व शत्रुघ्न अयोध्या भवन से बड़ा गणेश, चित्रकूट सीमा ;नाटी इमली मैदान की ओर नवापुरा डीएवी कालेज ईश्वरगंगी होते हुए प्रस्थान किए।

इस बीच लोहटिया से ही हाथी पर सवार होकर पूर्व काशी नरेश के वंशज महाराज अनंत नारायण सिंह व तीन अन्य हाथियों पर उनके पुत्र समेत परिवार के अन्य सदस्य नाटी इमली की ओर चले। रास्ते में हर-.हर महादेव का उद्घोष व हाथ जोड़कर लोग अपने राजा का गर्मजोशी से अभिनन्दन करते रहे। लीला स्थल पर पहुंचे महाराज ने सबसे पहले भगवान श्रीराम के पुष्पक विमान समेत पूरे मैदान की परिक्रमा की। रथ पर बैठे लीला के व्यवस्थापक मुकुंद उपाध्याय को स्वर्ण मुद्रा प्रदान की। इसके पश्चात पीएसी के जवानों ने उन्हें सलामी दी। महाराज की उपस्थिति में शाम 4.30 बजे अयोध्या से पहुंचे भरत व शत्रुघ्न मंच पर से बड़े भाई श्रीराम व सीता को देख साष्टांग दंडवत कर उनका अश्रुपूरित स्वागत करते हैं।

ठीक 4.40 बजे पुष्पक विमान पर विराजमान भगवान राम व लक्ष्मण वहां से दौड़ते हुए मंच पर पहुंचे । मंच पर मर्यादा पुरुषोत्तम ने बारी-बारी से भरत और शत्रुघ्न को गले से लगाया और भातृ विरह की वेदना चारों भाइयों की आंखों से आंसुओं के रूप में बह निकली। कहने को बहुत कुछ था लेकिन जुबां ने शब्दों का साथ छोड़ दिया। उधर जैसे ही चारों भाइयों का मिलन हुआ, हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से धरती.आकाश गूंज उठे । चारों तरफ से पुष्प वर्षा होने लगी। लीला स्थल पर मौजूद लाखों श्रद्धालु बोलो राजा रामचंद्र की जय,चारों भइयन की जय, हर-हर महादेव का उदघोष करने लगे। गले मिलने के बाद चारों भाइयों ने चारों दिशाओं में घूमकर भक्तों को दर्शन दिया। इसके पश्चात चारों भाइयों को पुष्पक विमान पर ले जाया गया। जहां भरत व शत्रुघ्न ने माता सीता को प्रणाम किया।

यहां से चारों भाई पुष्पक विमान पर सवार होकर अयोध्या के लिए प्रस्थान कर गये। आगे-आगे गजराज पर सवार महाराज बनारस की शाही सवारी व पीछे-पीछे परंपरानुसार लाल पगड़ी बांधे सैकड़ों यादव बंधु पुष्पक विमान को कंधे पर उठाकर बड़ा गणेश स्थित अयोध्या भवन पहुंचे। इस दौरान पूरे रास्ते छतों पर सड़क के किनारे खड़े श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर रथ पर विराजमान चारों भाइयों का दर्शन किया। नाटी इमली से ईश्वरगंगी, डीएवी काॅलेज, नवापुरा, लोहटिया होते हुए पुष्पक विमान अयोध्या भवन पहुंचा। यहां पर लीला व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने पंच स्वरूपों की आरती उतारी। इसी के साथ विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप लीला का विश्राम हो गया।

नाटी इमली रामलीला मैदान हुआ राममय

बाबा विश्वनाथ की नगरी गुरुवार को महादेव के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की भक्ति में आकंठ डूबी रही। लोगों में राम की भक्ति का रंग इस कदर चढ़ा कि नाटी इमली का हर कोना राममय हो गया। बारिश के बावजूद रामलीला स्थल पर छतों, बारजों से पुष्पवर्षा होती रही। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की अयोध्या वापसी पर लीला स्थल से डमरूनाद से अलग आनंद प्रस्फुटित हो रहा था। इस दौरान आसपास के भवनों के छतों, बारजों से लेकर हर कोने तक भीड़ डटी रही। तिल रखने की जगह नहीं थी।

प्रभु राम के आगमन पथ के दोनों तरफ कतारबद्ध भीड़ खड़ी रही। भगवान राम, भइया लक्ष्मण, जनक नन्दनी सीता को नाटी इमली के मैदान में देख चहुंदिशि हर-हर महादेव का जयघोष गूंज उठा। काशी के नाटी इमली भरत मिलाप में स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम अवतरित होते हैं, ऐसा लोगों में विश्वास है। अनूठी निर्मल भाव निहित इस पांच मिनट की अलौकिक लीला को निहारने के लिए भारत ही नहीं, विदेशों तक से श्रद्धालु आते हैं।

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