
लखनऊ । शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर को मनाई जाएगी। आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस तिथि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे समीप आ जाता है और उसकी किरणों में अमृत का वास होता हैं। पौराणिक मान्यता है कि इस तिथि में व्रज में भगवान श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। इसलिए इसे कौमुदी महोत्सव य रासोत्सव भी कहते हैं।
शरद पूर्णिमा पर मान्यता है कि इस तिथि में चंद्रमा की चांदनी में अमृतवास का वास होता है इसलिए उसकी किरणों में अमृत्व और आरोग्य की प्राप्ति सुलभ होती है। इस तिथि में कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण को खीर का भोग लगाया जाता है। रात को चंद्रमा की चांदनी में खीर को रखा जाता है। दूसरे दिन सुबह उसको प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। इस तिथि में चांदनी रात में सुई में धागा पिरोने की भी परम्परा है। गुजराती परिवारों में इस तिथि में चांदनी रात में डांडिया नृत्य करने की परम्परा है।( हि.स़.)



