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मान्यता है, भगवान कृष्ण ने नरक चतुर्दशी को नरकासुर राक्षस का किया था वध

लखनऊ । धनतेरस के आते ही पांच दिवसीय दीपोत्सव शुरू हो गया है। इसी के साथ दीपावली की खुशियां भी बिखर गई। शहर-गांव सब गुलजार रहेंगे। अब उत्तर प्रदेश में लखनपुरी सहित अन्य शहरों में आने पांच दिनों में दीप झिलमिलाते हुए दिखेंगे। दीपावली पर पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, हनुमान जयंती, तीसरे दिन दीपावली, चौथे दिन अन्नकूट व गोवर्धन पूजा व पांचवे व अंतिम दिन भैया-दूज व चित्रगुप्त पूजा की जाती है।

रविवार को दूसरे दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाएंगी। हालांकि पंचागों के मतभेद होेने के कारण किसी में रविवार को तो किसी में सोमवार को सुबह नरक चतुर्दशी बताई गई। ठाकुर प्रसाद पंचाग में रविवार को व चिंता हरण जंत्री में सोमवार को बताया गया है।कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहते हैं। पौराणिक आख्यान है कि इस तिथि में भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन तेल से मालिश कर सूर्योदय से पूर्व स्नान करना चाहिए। अपने घरों की सफाई भी करते हैं। मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त तर्पण करने की रीति है।

सूर्यास्त के बाद शाम को देवताओं का पूजन करके दीपदान करना चाहिए। मंदिर, गुप्तगृहों, रसाईघर, स्नानघर, देववृक्षों के नीचे, घर की बैठक में, नदियों के किनारे, बगीचे, बावली, गली-कूचे, गौशाला आदि जगहों पर दीपक जलाना चाहिए। यमराज के निमित्त त्रयोदशी से अमावस्या तक दीपदान करना चाहिए।

इस सम्बंध में पौराणिक कथा है कि वामन अवतार में भगवान श्रीहरि ने पूरी पृथ्वी नाप ली। राजा बलि के दान और भक्ति से प्रसन्न होकर वामन भगवान ने उससे वर मांगने को कहा। उस समय बलि ने प्रार्थना की, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी सहित इन दिनों में मेरे राज्य में जो भी यमराज के निमित्त दीपदान करेगा, उसे यमयातना न सहनी पड़े। इन दिनों में दीपावली मनाने वाले के घर लक्ष्मी कभी न छोड़े। भगवान ने ‘एवमस्तु‘। जो मनुष्य इन तीन दिनों में जो दीपोत्सव करेगा, उसे छोड़कर मेरी प्रिया लक्ष्मी कहीं नही जाएंगी।(हि.स.)

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