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सैकड़ों साल पुराने विश्व प्रसिद्ध हस्त शिल्प गोरखपुर के टेराकोटा को कानूनी रूप से नई पहचान मिली

गोरखपुर टैराकोटा क्राफ्ट का जी आई पंजीकरण हुआ , देश की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार हुआ

गोरखपुर । सैकड़ों साल पुराने विश्व प्रसिद्ध हस्त शिल्प गोरखपुर के टेराकोटा को कानूनी रूप से नई पहचान मिली, जी आई ( भौगोलिक संकेतक) पंजीकरण की लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए यह क्राफ्ट यह दर्जा हासिल किया । पद्म श्री सम्मान से सम्मानित और जी आई विशेषज्ञ डॉ रजनी कांत ने बताया कि जी आई करने कि पूरी प्रक्रिया को लगभग 2 वर्ष पूर्व सितंबर 2018 में नाबार्ड के सहयोग से और ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के दिशा निर्देश में जिला उद्योग केंद्र के जागरूकता के साथ ही संस्था लक्ष्मी टेराकोटा मूर्ति कला केंद्र , औरंगाबाद, गुलरिया, गोरखपुर के आवेदन के साथ सुरु हुआ, जिसमे पूरा कानूनी दस्तावेज पदमश्री डॉ रजनी कांत के दिशा निर्देश में तैयार हुआ, जिसे चेन्नई स्थित जी आई रजिस्ट्री में दाखिल किया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरते हुए अंततः इस विश्व प्रसिद्ध शिल्प को जी आई पंजीकरण संख्या 619 के साथ क्लास 21 के अन्तर्गत पंजीकृत कर लिया गया।

डॉ रजनी कांत ने बताया कि  मुख्यमंत्री जी के गृह जनपद का यह प्रथम जी आई पंजीकृत उत्पाद हुआ और ओ डी ओ पी में भी चिन्हित है, अभी कुछ माह पूर्व, नाबार्ड यूपी के द्वारा गोरखपुर में माननीय मुख्यमंत्री जी की उपस्थिति में विशाल प्रदर्शनी और क्रेडिट कैंप का आयोजन किया गया था जिसमे टेराकोटा क्राफ्ट के साथ ही पूर्वांचल के सभी जी आई पंजीकृत उत्पादो को भी स्टॉल मिला रहा और प्रचारित किया गया। इस क्राफ्ट के लिए पूरे गोरखपुर जनपद को ही पंजीकृत किया गया है और सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात यह है कि जी आई पंजीकृत उत्पाद किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं बल्कि इससे जुड़े सभी उत्पादको, निर्यातकों, का अधिकार होता है। अब आने वाले समय में इससे जुड़े शिल्पियों, ट्रेड से जुड़े लोगो को जी आई अधिकृत यूजर बनाने की प्रक्रिया सुरु होगी। जिसमे जिला उद्योग केंद्र और नाबार्ड का सहयोग लिया जाएगा ।

गोरखपुर के इस क्राफ्ट के साथ ही अब पूर्वांचल के कुल 13 उत्पादों को जी आई का दर्जा हासिल हो गए, जिसमे कालानमक चावल, बनारसी साड़ी, मेटल क्राफ्ट, गुलाबी मीनाकारी, स्टोन शिल्प, चुनार बलुआ पत्थर, ग्लास बीड्स, भदोही कालीन, मिर्ज़ापुर दरी, गाजीपुर वाल हैंगिंग, निज़ामाबाद आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और इलाहाबाद का अमरूद शामिल है। इसको लेकर अब उत्तर प्रदेश में कुल 26 जी आई उत्पाद हो गए, जिसमे 14 ओ डी ओ पी उत्पाद भी है । 10अन्य जनपदों के 10 ओ डी ओ पी उत्पादों की जी आई पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

जनपद के किसी भी क्षेत्र में बनने वाले टेराकोटा को ही गोरखपुर टेराकोटा के नाम से बेचा जा सकता है, अब इस जनपद के बाहर बनाने वाले को गोरखपुर टेराकोटा नाम नहीं दिया जा सकता है, वह गैरकानूनी होगा, इस कारण अब यहां के शिल्पियों को काफी काम मिलेगा और सरकार से जी आई क्राफ्ट के प्रमोशन लिए विशेष सहयोग, योजनाएं भी मिलेंगी क्योंकि अब यह देश की बौद्धिक संपदा हो गया है.

 

 

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