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बड़ी सफलता : अंतरजनपदीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार

खीरी साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरजनपदीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, आधार-पैन कार्ड, फिंगरप्रिंट रीडर डिवाइस और नकदी बरामद की है। गिरोह ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड जारी कर साइबर ठगी को अंजाम देता था। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है।

खीरी : जिले की साइबर क्राइम थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने अंतरजनपदीय स्तर पर सक्रिय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 15 मई 2026 को थाना साइबर क्राइम एवं खमरिया थाना क्षेत्र में संयुक्त रूप से चलाए गए अभियान के दौरान की गई। पुलिस ने गिरोह के कब्जे से भारी मात्रा में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, बैंकिंग दस्तावेज, फिंगरप्रिंट डिवाइस तथा नकदी बरामद की है।

पुलिस अधीक्षक खीरी के निर्देशन में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस टीम ने खमरिया क्षेत्र के एक मकान पर छापेमारी कर गिरोह का भंडाफोड़ किया। मौके से गिरफ्तार किए गए आरोपी संगठित तरीके से साइबर ठगी के नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।

ऐसे करता था गिरोह काम

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह सीधे तकनीकी हैकिंग के बजाय ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना निशाना बनाता था। आरोपी गांवों में जाकर लोगों को आयुष्मान कार्ड, सरकारी योजनाओं और अन्य लाभ दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे।

गिरोह इन खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और मोबाइल नंबर भी अपने नियंत्रण में रखता था। इसके बाद इन्हीं खातों और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग एप्स, विशेष रूप से “Big Winner App” जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से साइबर ठगी में प्राप्त रकम के लेनदेन के लिए किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक जिन लोगों के नाम पर खाते खोले जाते थे, उन्हें इस पूरे साइबर अपराध नेटवर्क की जानकारी तक नहीं होती थी। असली आरोपी खुद पर्दे के पीछे रहते थे, जबकि जांच एजेंसियों तक सबसे पहले गरीब खाताधारकों और सिम धारकों की जानकारी पहुंचती थी। इस तरह गिरोह ने साइबर अपराध की एक सुनियोजित “फ्रॉड पाइपलाइन” तैयार कर रखी थी।

भारी मात्रा में सामान बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की। इनमें 1494 सिम कार्ड, 27 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 26 एटीएम/डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 277 पैन कार्ड, 112 आयुष्मान कार्ड, 180 बैंक पासबुक, 9 चेकबुक, 4 पैन कार्ड, 11 आधार कार्ड, 12 श्रम कार्ड, 13 ड्राइविंग लाइसेंस, 12 कॉपियां, 1 डायरी और 16 फिंगरप्रिंट रीडर डिवाइस शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने 61 हजार रुपये नकद तथा अपराध में प्रयुक्त एक होंडा अमेज कार भी जब्त की है।

कई जिलों तक फैला था नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री और पूछताछ से स्पष्ट हो रहा है कि यह कोई साधारण ऑनलाइन ठगी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा संगठित साइबर अपराध नेटवर्क था। गिरोह के तार कई जिलों और संभवतः अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

गिरफ्तार करने वाली टीम

इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक हेमंत कुमार राय, निरीक्षक देवेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक आशीष सहखावत, उपनिरीक्षक सुशील पवार, आरक्षी राहुल चौधरी और आरक्षी मयंक वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे एक बड़े सपोर्ट सिस्टम को ध्वस्त करने में सफलता मिली है। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक दस्तावेज, सिम कार्ड या पहचान पत्र बिना सत्यापन के उपलब्ध न कराएं।

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