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त्रेता युग का साक्षी रह चुका बागपत का मंशा देवी मंदिर

उत्तर प्रदेश में बागपत के खेकड़ा क्षेत्र में बड़ागांव स्थित मां मंशा देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था व अटूट श्रद्धा का केंद्र है। यह मंदिर अपने आप में त्रेता युग की स्मृति संजोए हुए हैं।यहां वर्ष में दो बार नवरात्रि के दिनों में मेला भी लगता है। मंदिर में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और हरियाणा समेत कई प्रदेशों से भी श्रद्धालु लोग आते हैं और मां के आगे अपनी झोली फैलाते हैं। कहते हैं कि मां उनकी मनोकामना पूरी करती है।

प्राचीन मां मंशा देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष राजपाल त्यागी बताते है कि यह मंदिर त्रेता युग का गवाह रह चुका है। यहां विराजमान मां मंशा देवी की मूर्ति लंकाधिपति रावण हिमालय से लेकर आया था, मां के चमत्‍कार को रावण ने जाना तो उसने उसको लंका ले जाने के लिए घोर तप किया। मां ने रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसके साथ चलने के लिए हां कर दी। लेकिन कहा था, अगर तुमने रास्ते में मुझे कहीं रखा तो मैं वहीं स्‍थापित हो जाऊंगी। रावण मां को लेकर लंका के लिए चल पड़ा। रास्‍ते में वह मां का तेज और भार सहन नहीं कर पाया और बड़ागांव में मूर्ति को पृथ्वी पर रख दिया। तब से मां बड़ागांव के मंदिर में विराजमान हैं।

कहते हैं रावण मां को यहां छोड़कर लंका लौट गया। तब से इस गांव का नाम रावण उर्फ बड़ागांव पड़ गया। हालांकि, उस मूर्ति के खंडित होने के बाद उसके स्थान पर अब करीब 250 साल पुरानी मूर्ति रखी हुई है। इतना ही नहीं भगवान विष्णु की खड़ी प्रतिमा भी इसी मंदिर में देखने को मिलती है।मंदिर समिति के अध्यक्ष राजपाल सिंह त्यागी, प्रवीण कुमार त्यागी आदि ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर का जीर्णोद्धार बड़ागांव निवासी लक्ष्मणदास जैन सेठ ने कराया था।

बताया जाता है किसी जुर्म में सेठ को अंग्रेजों ने तोप से उड़ाने की तैयारी की थी, मगर देवी का कोई बाल रूप उनके सामने आ जाता था। तीन बार प्रयास के बाद भी सेठ तोप से बच गए थे। उसी समय उनकी सजा माफ कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने यहां भव्य मंदिर बनवाया था। मंदिर में दशावतार के रूप में भगवान विष्णु, मंशा देवी, राम दरबार, शिव परिवार, हनुमान, भैरव, राधा-कृष्ण की मूर्तियां भी स्थापित हैं।नवरात्र के दिनों में यहां विशाल मेला लगता है।

कस्बा खेकड़ा से मात्र पांच किमी दूर बड़ागांव के प्रवेश मार्ग पर ही स्थित मंदिर को देखकर हर किसी का मन भक्तिमय हो जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहां आकर सच्चे मन से मन्नत मांगता है। देवी मां उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं।(वार्ता)

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