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मथुरा : होली के गुलाल-अबीर बनाने में दिन रात कारीगर जुटे

सब जग होरी ब्रज में होरा की तैयारियों में जुटा प्रशासन एवं कारोबारी

मथुरा । सब जग होरी ब्रज में होरा की कहावत यूं ही नहीं है। ब्रज में होली का अद्भुत आनंद है। यहां जितने दिन की होली होती है, उतने ही होली के रूप व रंग देखने को मिलते हैं। दो साल से कोरोना संक्रमण को लेकर यह मस्ती थोड़ी कम दिखाई दी थी, लेकिन इस बार होली को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। वहीं गुलाल बनाने वाले कारीगर दिन रात एक कर गुलाल बनाने में जुटे हैं। कहीं अबीर गुलाल तैयार हो रहा है तो कहीं होली के रंगारंग कार्यक्रमों की तैयारी में कलाकार जुटे हुए हैं। मौसम भी अब गुलाबी दिखाई देने लगा है।

ब्रज के प्रमुख मंदिरों में बसंत पंचमी से 40 दिवसीय होली की शुरुआत हो गयी है। होली पर होने वाले कारोबार से जुड़े लोग पूरी तरह से तैयारियों में जुट गए हैं। मौसम भी सुहाना हो गया है। दिल्ली आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित कुछ फैक्ट्रियों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में गुलाल बनाने वाले कारीगरों ने काम शुरु कर दिया है। दो साल से कोरोना के कारण रंग ,गुलाल के कारोबार पर खासा असर पड़ा। लेकिन इस वर्ष गुलाल का कारोबार करने वालों को उम्मीद है कि माल ज्यादा बिकेगा। कोरोना काल में दो वर्ष से होली का त्यौहार फीका जाने के कारण मायूस कारोबारियों और कलाकारों को इस बार होली को लेकर खासी उम्मीदें हैं। कोरोना की तीसरी लहर के समाप्ति की ओर जाने के बाद इस बार ब्रज भूमि में होली का पर्व पूरे उल्लास से मनाये जाने की उम्मीद है।

ब्रज के होरा में होती है 250 टन गुलाल की खपत, मथुरा के फैक्ट्रियों में कारीगर गुलाल अबीर बनाने में जुटे
दो साल से कोरोना के चलते कारोबार पड़ा धीमा, इस बार उम्मीद से बढ़कर होगा कारोबार

एक अनुमान के मुताबिक होली के दौरान बृज में करीब 250 टन गुलाल की बिक्री होती है। दो वर्ष से कोरोना के चलते होली का त्योहार न तो पूरी उमंग के साथ मनाया जा रहा था और न ही सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे थे। इसके चलते गुलाल की डिमांड घटकर गयी थी। लेकिन इस बार कारोबारियों को उम्मीद है कि यहां पूर्व की भांति गुलाल की बिक्री होगी।

महंगाई के मार से गुलाल भी नहीं रहा वंचित

गुलाल बनाने वाले शैलेन्द्र ने बताया कि कोरोना काल की वजह से दो वर्ष से होली पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गुलाल की डिमांड घट गई थी। लेकिन इस बार उम्मीद है। शैलेन्द्र ने बताया कि उनके यहां सात रंग का गुलाल तैयार हो रहा है। करीब 12 कारीगर गुलाल तैयार करने में लगे हैं।अरारोट की कीमत में आठ रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोत्तरी होने की वजह से इस बार गुलाल 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि गतवर्ष 55 रुपये प्रति किलो के हिसाब से गुलाल की बिक्री होती थी।

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