नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत की तरक्की के लिए महिलाओं का सम्मान एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और उन्होंने ‘नारी शक्ति’ का समर्थन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।देश के 76वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि बोलने में और आचरण में ‘‘हम ऐसा कुछ न करें जो महिलाओं का सम्मान कम करता हो।’’प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘हमारे आचरण में विकृति आ गयी है और हम कभी-कभी महिलाओं का अपमान करते हैं। क्या हम अपने व्यवहार और मूल्यों में इससे छुटकारा पाने का संकल्प ले सकते हैं।’’(भाषा)
लोकतंत्र, विविधता भारत की सबसे बड़ी शक्ति: मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अनेक बलिदानियों, सत्याग्रहियों , स्वतंत्रता सेनानियों और त्यागियों को याद करते हुए सोमवार को कहा कि 75 वर्ष की इस यात्रा में देश सफलता और असफलताओं के उतार-चढ़ाव के बावजूद निरंतर आगे बढ़ता रहा है, क्योंकि भारत लोकतंत्र की जननी है और विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।उन्होंने कहा, “ भारत को यह शक्ति विरासत में मिली है और हमें उस पर गर्व होना चाहिए। ”श्री मोदी ने 76 वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि आजादी के बाद देश ने सफलता और असफलता के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन अपनी विविधता तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था के बलबूते देश निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “ हमने क्या नहीं देखा। हमने खाद्य संकट का सामना किया, लड़ाइयां लड़ी, आतंकवाद की चुनौती झेली, निर्दोष नागरिकों की मौत हुई , छद्म युद्ध को झेला और प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया। ”उन्होंने कहा कि इस सबके बावजूद देश आगे बढ़ता गया, क्योंकि लोकतंत्र और विविधता हमारा मजबूत स्तंभ है, जिसने देश को प्रगति के मार्ग से अविचलित नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “ भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।भारत लोकतंत्र की जननी और यही उसका सबसे बड़ा सामर्थ्य है। हमें अपने ऊपर गर्व होना चाहिए, हम जैसे हैं, अपने संकल्प और सामर्थ्य से चलेंगे, हमें अपने देश की भाषा पर गर्व होना चाहिए भाषाओं पर गर्व होना चाहिए। ”
प्रधानमंत्री ने कहा, “ यह शक्ति हमें विरासत में मिली है और हमें इस पर गर्व होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने देश को विकसित बनाने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि हमें गुलामी के अहसास को समाप्त कर अपनी विरासत पर गर्व करना चाहिए। ”उन्होंने कहा, “ हॉलिस्टिक हेल्थ पर दुनिया में चर्चा होती है, तो लोग भारत के योग आयुर्वेद और जीवन पद्धति को याद करते हैं, हम वह लोग हैं ,जो प्रकृति के साथ जीवन जीना चाहते हैं, ग्लोबल वार्निंग के समाधान का रास्ता हमारी विरासत में मिलता है। मोटे अनाज हमारे ध्यान हमारी विरासत रहे हैं, आज दुनिया में वर्ल्ड मिल्क डे मनाया जा रहा है, हमारे पारिवारिक संस्कार विश्व में सामाजिक और व्यक्तिगत चुनाव का समाधान प्रस्तुत करने वाले हैं। ”
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद पूरे विश्व का भारत की तरफ देखने का नजरिया बदल चुका है। विश्व, भारत की तरफ गर्व और अपेक्षा से देख रहा है। समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर, दुनिया खोजने लगी है। उन्होंने कहा, “ आज विश्व पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की समस्याओं के समाधान का रास्ता हमारे पास है। इसके लिए हमारे पास वो विरासत है, जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी है। ”(वार्ता)
परिवारवाद पर मोदी का कड़ा प्रहार, देशवासियों से सहयोग मांगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति में परिवारवाद पर कड़ा हमला करते हुए आज कहा कि इससे देश की तरक्की बाधित होती है और प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलने से कुंठा होती है।श्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि परिवारवाद राजनीति में परिवार से बाहर के लोगों की लिए सारे अवसर खत्म करता है इसलिए परिवारवाद को राजनीति से खत्म करने की लड़ाई में उन्हें सबके सहयोग की जरूरत है और इस लड़ाई में जहां भी देश का कोई नागरिक खड़ा होगा वह उसका साथ देंगे।उन्होंने कहा कि परिवारवाद की मानसिकता को खतरनाक बताया और कहा कि परिवारवाद की राजनीति में परिवार को किसी से कोई लेना देना नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि वह लाल किले से कहना चाहते हैं कि देश तथा हिंदुस्तान के शुद्धिकरण के लिए देश को परिवारवाद की राजनीति से मुक्त दिलाने की सख्त ज़रूरत है।परिवारवाद की राजनीति से देश की मुक्ति को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि यह राजनीति प्रतिभाशाली लोगों के मन में कुंठा पैदा करती है। उन्होंने कहा ‘हर किसी का मन करता है, उसमें लिए योग्यता थी, अगर कोई उसका चाचा, ताऊ होता तो उसकी योग्यता उसके काम आती।’उन्होंने देश के नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के सपनों को साकार करने के लिए परिवारवाद के खिलाफ लड़ाई को ज़रूरी बताया और कहा कि यदि कोई यह लड़ाई लड़ता है और परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ खड़ा होता है तो वह उनकी इस लड़ाई में उनके साथ खड़े होंगे। भाई भतीजावाद और परिवारवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से जो कुंठा पैदा होती है उससे लोगों को बचाने के लिए परिवारवाद के खिलाफ सबको लड़ना है।(वार्ता)
76वें स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे की धारियों वाली पगड़ी में दिखे प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को 76वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में तिरंगे की धारियों वाली सफेद पगड़ी पहने हुए दिखाई दिए। केसरिया, सफेद और हरे रंग की धारियों वाली इस पगड़ी को पहन कर प्रधानमंत्री सुबह पहले राजघाट गए, जहां देशवासियों की ओर से महात्मा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित किया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह लाल किले की प्राचीर से देश के नाम नौवां संबोधन था। प्रधानमंत्री हर बार अपना संबोधन पगड़ी पहन कर देते हैं। हर बार की तरह इस बार उन्होंने नए रंग रूप की पगड़ी पहन ध्वजारोहण किया। इस दौरान प्रधानमंत्री परंपरागत कुर्ता और चूड़ीदार पाजामा पहने हुए दिखे। इसके अलावा नीले रंग की जैकेट और काला जूता पहने थे।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले राजघाट में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर लाल किले पहुंचे। ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने ध्वजारोहण किया। इसके बाद राष्ट्र को संबोधित किया।प्रधानमंत्री मोदी हर बार स्वतंत्रता दिवस पर खास पहनावे में दिखाई देते हैं। लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन के बाद उपस्थित बच्चों के बीच गए।पिछले स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने लाल पैटर्न वाली केसरी पगड़ी पहनी थी। इसके साथ उन्होंने कुर्ता के साथ ब्लू जैकेट और स्टोल भी धारण कर रखा था। 2020 में प्रधानमंत्री ने भगवा और गुलाबी रंग की पगड़ी पहनी थी।(हि.स.)।



