
नई दिल्ली । भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप्स इकोसिस्टम कहलाता है। नए इनोवेशन और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से पिछले कुछ साल में काफी प्रयास किए गए हैं। पेटेंट और कॉपीराइट पंजीकरण के सरलीकरण से नए उद्यमियों को काफी लाभ मिल रहा है। खास तौर पर स्टार्टअप्स, एमएसएमई, महिला उद्यमियों के लिए शुल्क 80 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। इसकी वजह से पिछले 5 साल में भारत में पेटेंट और ट्रेडमार्क पंजीकरणों में चार गुना बढ़ोतरी हुई है और वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक 81 से बढ़कर 48 हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता मामले और वस्त्र मंत्री पीयूष गोयल ने पेटेंट, डिजाइन, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के परीक्षण व उन्हें प्रदान करने में हुए सुधारों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि भारत को एक नवाचार हब के रूप में विकसित करने में अभी लंबा सफर तय करना होगा।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री ने आर्थिक राजधानी मुंबई में पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने पेटेंट, डिजाइन, ट्रेडमार्क, जीआई (जिओग्राफिकल इंडिकेशन) प्रणालियों के इको-सिस्टम को बढ़ावा देने, देश में नवाचार, शोध एवं विकास को प्रोत्साहन देने और भारत की विरासत से जुड़ी नई खोज और ज्ञान को वैश्विक मंच पर लाने की प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्रीय मंत्री ने देश में स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को सहायता व समर्थन देने के क्रम में विभाग द्वारा शुल्क में कमी का भी उल्लेख किया। स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों के लिए फाइलिंग शुल्क 80 प्रतिशत तक घट गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। शुरू से अंत तक हर आवेदन को अब ऑनलाइन प्रोसेस किया जा रहा है, सुनवाई फोन पर हो रही हैं, लोग अब पेटेंट कार्यालय के चक्कर नहीं काटना चाहते हैं।



