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कमाल का है कमलम ,फल के साथ अपनी खूबियों के नाते दवा भी

सीएम योगी का निर्देश:खेती को प्रोत्साहित करने के लिए स्ट्राबेरी की तरह करें महोत्सव , ड्रैगन फ्रूट की खूबियों के साथ इसकी जैविक खेती के उन्नत तरीके भी बताएं .

ये कमलम (ड्रैगन फ्रू ट) भी कमाल का है। ये फल के साथ दवा भी है। एंटीऑक्सीडेंट, बसा रहित, फाइबर से भरपूर ड्रैगन फ्रूट में कैल्शियम, मैग्नेशियम और आयरन के अलावा प्रचुर मात्रा में विटामिन सी एवं ए भी पाया जाता है। अपनी इन्ही खूबियों के नाते इसे सुपर फ्रूट भी कहा जाता है। मर्जी आपकी आप इसे सीधा खाइए या सलाद,जैम,जेली या जूस के रूप में। हर रूप में ये आपकी सेहत को सलामत रखेगा। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा। सुगर के नियंत्रण और रोकथाम में भी इसे प्रभावी पाया गया है। बाकी विटामिन्स और खनिजों के भी अपने लाभ हैं।

इन खूबियों के अपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मुरीद हैं। मुख्यमंत्री की मंशा है कि खेतीबाड़ी से संबधित ऐसे उपयोगी फलों की खूबियों को लोग जानें। इनकी मांग निकले। किसान इनकी खेती करें। उनको अपने उत्पाद का वाजिब दाम मिले इसके लिए वह उनका स्थानीय स्तर पर महोत्सव भी करवाना चाहते हैं। झांसी में स्ट्राबेरी महोत्सव हो चुका है। गोरखपुर में सुनहरी सकरकन्द महोत्सव होना है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ड्रैगन महोत्सव आयोजित करने का भी निर्देश दे चुके हैं। आने वाले दिनों में कुशीनगर में केला, प्रतापगढ़ में आंवला, प्रयागराज में अमरूद महोत्सव का आयोजन भी सरकार कर सकती है। ये सभी उत्पाद संबधित जिलों के एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) हैं।

ड्रैगन फ्रूट,सुनहरी सकरकन्द ओर स्ट्राबेरी की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में भी कर चुके हैं।

ड्रैगन फ्रूट को पिताया फल के नाम से भी जानते हैं, इसे ज्यादातर मेक्सिको और सेंट्रल एशिया में खाया जाता है। इसका टेस्ट काफी हद तक तरबूज जैसा होता है। देखने में यह नागफ़नी जैसा दिखता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले सुलतानपुर जि‍ले के लम्भुआ ग्राम कोयरा खुर्द के गया प्रसाद सिंह उर्फ मुरारी सिंह ने कुछ महीने पहले मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से शिष्‍टाचार भेंट की थी। प्रधानमंत्री की मन की बात में भी इसकी चर्चा की थी।

इसके बाद सुर्खियों में आए ड्रैगन फ्रूट की खेती बाराबंकी, कुशीनगर के भी कुछ प्रगतिशील किसान करने लगे हैं। गया प्रसाद सिंह के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट की आर्गेनिक तरीके से प्रदेश में बड़े स्‍तर पर खेती की जा सकती है। इससे किसानों की आय में 8 गुना तक बढ़ सकती है। वह खुद भी ऑर्गेनिक तरीके से इसकी खेती करते हैं। झांसी के हरदीप चावला,गुरुलीन चावला भी जैविक तरीके से ही स्ट्राबेरी की खेती करते हैं। मुख्यमंत्री की मंशा है भविष्य में आयोजित होने वाले महोत्सवों में संबधित उत्पादों के जैविक खेती पर ही जोर दिया जाए।

कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती

सब्जी वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक इसकी खेती अधिकतम 40 डिग्री और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर की जा सकती है। किंतु 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। ड्रैगन की खेती वाली भूमि पर उचित जल निकासी जरूरी है। प्रजाति के आधार पर ड्रैगन फ्रूट लाल- गुलाबी ओर पीले रंग का हो सकता है। इसकी लताओं का रोपड़ होता है। रोपड़ के समय लाइन से लाइन 4 मीटर और पौध से पौध की दूरी क्रमशः चार और तीन मीटर की रखी जाती है।

उचित बढ़वार ओर फलत के लीए रोपड़ के पूर्व दगड्ढा तैयार कर 10 किलो साड़ी गोबर की खाद एवं 50 ग्राम एन.पी.के. ( नाइट्रोजन, फास्फोरस ओर पोटाश ) प्रति गड्ढा में मिलाकर रोपाई करते हैं।ड्रैगन फ्रूट की रोपाई जून-जुलाई एवं सिंचाई का साधन होने पर फरवरी-मार्च में भी कर सकते हैं। इसका पौधा 20 से 25 साल तक फलत देता है इसकी खेती हेतु 7 से 8 फीट ऊंचे सीमेंट के खंभे गाड़ कर तार से मचान बनाया जाता है। रोपाई के दो साल बाद फल आता है। फूल बनने के दौरान सिंचाई नहीं करते। फूल से फल बनने के दौरान उचित नमी बनाए रखना जरूरी है । ड्रैगन फ्रूट के पौधों में 4 से 5 साल बाद मुख्य शाखा के साथ सिर्फ दूसरी और तीसरी पीढ़ी की शाखाओं को छोड़कर छटाई करने से 5 साल के पौधे से 100 से 150 कुंटल ड्रैगन फ्रूट प्रति हेक्टेयर पैदावार ली जा सकती है ।

चार साल तक ले सकते हैं साथ में दूसरी फसल

रोपाई करने के बाद 4 साल तक बीच की जगह में गोभी वर्गीय सब्जियों, सब्जी मटर, बैंगन, टमाटर आदि सब्जियों की खेती करके अतिरिक्त कमाई की जा सकती है।

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