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करवा चौथ के पूर्व बाजारों में साड़ी, गहनों संग सोलह श्रृंगार के दुकानों पर लगी भीड़, हो रही जमकर खरीददारी

वाराणसी। कोरोना काल के बाद बाजारों में रौनक फिर से लौटने लगी तो व्यापारियों में भी ख़ुशी का माहौल है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार करवाचौथ सुहागन औरतों के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाने का विधान है। इस खास दिन पत्नी अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा संग पति का दर्शन करके व्रत खोलती हैं। इस व्रत में श्रृंगार का भी बहुत महत्त्व है। इस बार 4 नवंबर को करवाचौथ का महत्वपूर्ण त्योहार मनाया जायेगा। सुहागन महिलाओं ने इसकी तैयारी करना शुरू कर दी है। बाजारों में साड़ियों संग गहनों व श्रृंगार के दुकानों पर ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ भी देखी जा रही है। इससे कारोबारियों को दीपावली पूर्व संजीवनी मिल गई है।दिसम्बर में तेज लगन संग सन्निकट दीपावली व धनतेरस पर बाजार को नई गति मिल जायेगी।

करवाचौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 4 नवंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर हो रहा है तथा अगले दिन यानी 5 नवंबर 2020 को सुबह 5 बजकर 14 मिनट पर इसका समापन होगा। इस प्रकार इस बार महिलाओं को करवाचौथ का व्रत 13 घंटे 37 मिनट तक रखना होगा। इस व्रत का प्रारंभ 4 नवंबर को शुबह 6 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 12 मिनट तक होगा। उसके बाद ही चन्द्रमा का दर्शन –पूजन करके ही व्रत को विधि-विधान से समाप्त करना होगा। करवाचौथ के पूजन का शुभ मुहूर्त 4 नवंबर को शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इसी दौरान आपको करवा चौथ की पूजा को विधि-विधान से करना चाहिए।

चंद्रोदय का समय क्या है?

व्रत रखने वाली महिलायें चंदमा को जल चढाने के बाद ही अपने पति के हाथ जल ग्रहण करके ही व्रत का समापन करती हैं। इस लिए इस व्रत में चंद्रमा का महत्त्व बढ़ जाता है। 4 नवंबर 2020 को चंद्रोदय का समय शाम को 08 बजकर 12 मिनट पर है।

करवाचौथ की पूजन विधि

यह व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है और चंद्र दर्शन के साथ ख़त्म होता है। इस व्रत में पूरे शिव परिवार- शिव जी, पार्वती जी, नंदी जी, गणेश जी और कार्तिकेय जी की पूजा की जाती है। पूजा के वक्त पूर्व की और मुख करके बैठें, उसके बाद चंद्रमा का पूजन करें। अब पति को छलनी(चलनी) से देखें. इसके बाद पति के हाथ पानी पीकर व्रत का समापन करें।

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