
बिजली गिरने से चिंताहरण गणेश मंदिर का शिखर ध्वस्त, टला बड़ा हादसा
पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग से जुड़े प्राचीन चिंताहरण गणेश मंदिर का शिखर बिजली गिरने के बाद तेज बारिश के दौरान ध्वस्त हो गया। बताया जा रहा है कि 9 सितंबर की भोर में बारिश के दौरान मंदिर के शिखर पर बिजली गिरी थी। इसके बाद शिखर पर मोटी दरार दिखाई दी। दोपहर में तेज बारिश के दौरान अचानक पूरा शिखर भरभराकर नीचे आ गिरा। गनीमत रही कि स्थानीय लोग पहले से सतर्क थे, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार चिंताहरण गणेश मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है तथा इसका उल्लेख काशी खंड में मिलता है।
वाराणसी। काशी के पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग से जुड़े आदिकेशव घाट स्थित प्राचीन चिंताहरण गणेश मंदिर का शिखर बुधवार को बिजली गिरने के बाद तेज बारिश के दौरान अचानक ध्वस्त हो गया। घटना के समय मंदिर और आसपास के क्षेत्र में बारिश हो रही थी। गनीमत रही कि स्थानीय लोगों की सतर्कता के कारण इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, 9 सितंबर की भोर में बारिश के दौरान मंदिर के शिखर पर बिजली गिरी थी। इसके बाद सुबह शिखर पर मोटी दरार दिखाई दी। लोगों ने इसकी जानकारी क्षेत्रीय सफाई चौकी को देने की तैयारी शुरू ही की थी कि दोपहर में तेज बारिश के दौरान शिखर का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा।
शिखर में दरार दिखाई देने के बाद आसपास के लोग पहले से ही सतर्क थे। इसी वजह से हादसे के समय मंदिर के आसपास लोगों की आवाजाही सीमित रही और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, प्राचीन मंदिर के शिखर के ध्वस्त होने से स्थानीय लोगों में चिंता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि काशी खंड में वर्णित चिंताहरण गणेश मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है तथा इसे प्राचीन मंदिरों में माना जाता है। आदिकेशव घाट क्षेत्र में धार्मिक यात्राओं, आयोजनों और पंचक्रोशी परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में मंदिर के क्षतिग्रस्त हिस्से की सुरक्षा और जल्द मरम्मत को लेकर लोगों ने चिंता जताई है।
घटना की जानकारी विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी को भी दी गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, फिलहाल मंदिर के शिखर के पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ है। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था तथा प्राचीन स्वरूप को ध्यान में रखते हुए पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
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