भ्रामक विज्ञापन पर बड़ी कार्रवाई: वाजीराम एंड रवि IAS कोचिंग पर 7 लाख रुपये का जुर्माना
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 के परिणामों से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के मामले में वाजीराम एंड रवि IAS स्टडी सेंटर पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में पाया गया कि संस्थान ने सफल अभ्यर्थियों द्वारा किए गए वास्तविक पाठ्यक्रमों की जानकारी छिपाकर भ्रामक दावे किए। CCPA ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों को सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है तथा कोचिंग संस्थानों को विज्ञापनों में पूर्ण पारदर्शिता रखनी चाहिए।
नई दिल्ली : केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के मामले में देश के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने पाया कि संस्थान ने सफल अभ्यर्थियों की उपलब्धियों का प्रचार करते समय महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले दावे किए।
सीसीपीए ने यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की है। प्राधिकरण का कहना है कि कोचिंग सेवाओं का चयन करने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों को सही एवं पूर्ण जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है तथा किसी भी संस्थान को भ्रामक विज्ञापन देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे तथा आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की विस्तृत जांच के बाद अंतिम आदेश जारी किया। जांच में पाया गया कि संस्थान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2023 में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और रैंक का व्यापक प्रचार किया, लेकिन यह नहीं बताया कि इन अभ्यर्थियों ने संस्थान के कौन-से पाठ्यक्रमों में भाग लिया था।
वेबसाइट पर किए गए बड़े दावे
यूपीएससी सीएसई 2023 का परिणाम घोषित होने के बाद संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर कई आकर्षक दावे प्रकाशित किए गए। इनमें प्रमुख रूप से कहा गया कि –
* शीर्ष 10 में से 8 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं।
* शीर्ष 50 में 37 अभ्यर्थी वाजीराम एंड रवि से हैं।
* हर वर्ष यूपीएससी के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी संस्थान के छात्र होते हैं।
इन दावों को देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि सफल अभ्यर्थियों ने संस्थान के व्यापक और नियमित कोचिंग कार्यक्रमों का लाभ उठाया था। हालांकि जांच में तस्वीर अलग सामने आई।
जांच में क्या सामने आया?
सीसीपीए की जांच के अनुसार शीर्ष 10 में शामिल बताए गए 8 अभ्यर्थियों में से 7 ने केवल संस्थान के निःशुल्क इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (आईजीपी) में भाग लिया था।
इसी प्रकार शीर्ष 50 में शामिल बताए गए 37 अभ्यर्थियों में से 29 ने भी केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में ही नामांकन कराया था।
प्राधिकरण ने पाया कि इन तथ्यों का विज्ञापनों या वेबसाइट पर कहीं उल्लेख नहीं किया गया था। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में यह धारणा बनी कि सफल अभ्यर्थियों ने संस्थान के पूर्णकालिक कोचिंग कार्यक्रमों से पढ़ाई की थी।
इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम को लेकर उठे सवाल
सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (आईजीपी) उस समय शुरू होता है जब कोई अभ्यर्थी पहले ही यूपीएससी की प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर चुका होता है।
प्राधिकरण के अनुसार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों ही अत्यंत कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं हैं और इन चरणों की सफलता में संस्थान का प्रत्यक्ष शैक्षणिक योगदान नहीं होता। इसके बावजूद संस्थान ने ऐसे अभ्यर्थियों की उपलब्धियों को अपने व्यापक कोचिंग कार्यक्रमों के प्रचार में प्रमुखता से प्रदर्शित किया, जिससे संभावित विद्यार्थियों को भ्रमित होने की संभावना बनी।
वर्षों तक छिपाई गई महत्वपूर्ण जानकारी
जांच में यह भी सामने आया कि संस्थान ने कई वर्षों तक अपने विज्ञापनों में यह नहीं बताया कि सफल अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम से जुड़ी थी।
सीसीपीए के अनुसार —
* वर्ष 2021 में सफल उम्मीदवारों में 86.36 प्रतिशत ने केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में नामांकन कराया था।
* वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 78.31 प्रतिशत रहा।
* वर्ष 2023 में 97.56 प्रतिशत सफल अभ्यर्थी इसी कार्यक्रम से जुड़े थे।
* वर्ष 2024 में यह प्रतिशत 71.69 रहा।
इन आंकड़ों का खुलासा संस्थान ने अपनी वेबसाइट या प्रचार सामग्री में नहीं किया था।
उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन
सीसीपीए ने कहा कि किसी सफल उम्मीदवार ने पूर्णकालिक कक्षा कार्यक्रम, वैकल्पिक विषय कोचिंग, टेस्ट सीरीज या केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में भाग लिया था, यह जानकारी उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऐसी जानकारी को छिपाना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28)(iv) के तहत भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आता है। साथ ही यह अधिनियम की धारा 2(9) के तहत उपभोक्ताओं को प्राप्त “सूचित होने के अधिकार” का भी उल्लंघन है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि कोचिंग संस्थानों को अपने दावों में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी होगी ताकि विद्यार्थी और अभिभावक सही तथ्यों के आधार पर निर्णय ले सकें।
कोचिंग संस्थानों पर लगातार सख्ती
सीसीपीए ने बताया कि छात्रों के हितों की रक्षा और कोचिंग क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब तक 60 से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
यूपीएससी, आईआईटी-जेईई, नीट, आरबीआई तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले विभिन्न कोचिंग संस्थानों पर अब तक कुल 1.46 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।
प्राधिकरण ने दोहराया कि शिक्षा और कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों के लिए शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी तथा उपभोक्ताओं के हितों से समझौता करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। (PIB)



