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दुनिया में तनाव बढ़ा तो RBI ने खरीदा सोना, विदेशी निवेशकों ने बाजार से खींचे हाथ

  • रिजर्व बैंक ने खरीदा 180 किलोग्राम सोना

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक ने तीन अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 180 किलोग्राम सोना खरीदा, जिसका बाजार में वर्तमान मूल्य लगभग 261 करोड़ रुपये है।केंद्रीय बैंक के मई 2026 के बुलेटिन में बताया गया है कि उसके पास 24 अप्रैल को 880.52 टन सोना था, जो एक महीने पहले जारी रिपोर्ट के 880.34 टन से 180 किग्रा अधिक है। यह बढ़ोतरी तीन अप्रैल को समाप्त सप्ताह में दर्ज की गयी थी।देश में इस समय सोना 1.45 लाख रुपये प्रति दस ग्राम या 1.45 करोड़ रुपये प्रति किलोग्राम के करीब है। इस प्रकार रिजर्व बैंक द्वारा खरीदे गये 180 किलोग्राम सोने की कीमत तकरीबन 261 करोड़ रुपये होती है।

देश के विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति के बाद स्वर्ण भंडार दूसरा सबसे बड़ा घटक है।मौजूदा समय में दुनिया भर में जारी व्यापार और भू-राजनैतिक अनिश्चितताओं के बीच रिजर्व बैंक एक साल में 940 किलोग्राम सोना खरीद चुका है। पिछले साल दो मई को केंद्रीय बैंक के पास 879.58 टन सोना था।उल्लेखनीय है कि कई देशों के केंद्रीय बैंक पिछले कुछ समय से सोने की खरीद कर रहे हैं। इससे सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु की कीमतों में उछाल आया है।रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल अप्रैल की शुरुआत में सोने के दाम में तेजी रही। बाद में हालांकि डॉलर में निवेशकों की रुचि बढ़ने से सोने में थोड़ी नरमी देखी गयी थी।

एफपीआई ने मई में अब तक भारतीय पूंजी बाजार से निकाले 25,472 करोड़ रुपये

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मई में अब तक भारतीय पूंजी बाजार से 25,472 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है।शुद्ध निकासी एफपीआई द्वारा बाजार में लगायी गयी पूंजी और बाजार से निकाली गयी पूंजी का अंतर है।

एफपीआई का इक्विटी में निवेश मई में 30,374 करोड़ रुपये कम हो गया। म्यूचुअल फंड में भी उनके निवेश में कमी आयी है जबकि डेट और हाइब्रिड उपकरणों में उन्होंने पैसे लगाये हैं। म्यूचुअल फंड में एफपीआई का निवेश शुद्ध रूप से 702 करोड़ डॉलर घट गया। वहीं, डेट में उनका निवेश 4,563 करोड़ रुपये बढ़ा है। हाइब्रिड में उन्होंने 1,036 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है।यह लगातार तीसरा महीना है जब एफपीआई बिकवाल बने हुए हैं। इससे पहले अप्रैल में उन्होंने 70,786 करोड़ रुपये और मार्च में रिकॉर्ड 1,26,991 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी।

फरवरी में उन्होंने बाजार में निवेश बढ़ाया था जबकि जनवरी में भी वे बिकवाल रहे थे।इस साल अब तक एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार से शुद्ध रूप से 2,14,473 करोड़ रुपये निकाले हैं। इक्विटी में उनका बिकवाल बने रहना इसका सबसे बड़ा कारण है। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक एफपीआई इक्विटी से 2,22,343 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी कर चुके हैं।जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेडे के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है कि एफपीआई इस साल अबतक 2,22,343 करोड़ रुपये इक्विटी से निकाल चुके हैं जो साल 2025 में पूरे साल की 1,66,283 करोड़ रुपये की निकासी से भी अधिक है।

देश में निवेश पर कम रिटर्न मिलने और दूसरे देशों में ज्यादा रिटर्न की संभावना के कारण वे निकासी कर रहे हैं। साथ ही अमेरिका में बॉन्ड पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है।इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट और आने वाले समय में इसके और टूटने के डर से भी वे भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। खास बात यह है कि एफपीआई जहां बड़ी कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, वहीं वे छोटी और मझौली कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं।(वार्ता)

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