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सीएम योगी ने खुद भरी ऑनलाइन जनगणना, फिर शिक्षकों और छात्रों को लेकर कही बड़ी बात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान डिजिटल जनगणना 2027 के प्रथम चरण में ऑनलाइन स्वगणना कर नागरिकों से 21 मई तक सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल जनगणना प्रदेश के समग्र विकास का आधार बनेगी। वहीं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने ऊर्जा संरक्षण, अनुशासन, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वच्छ परिसर संस्कृति और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए संस्थाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया।

गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान शनिवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित अपने आवास पर प्रदेश में जारी डिजिटल जनगणना के प्रथम चरण के अंतर्गत स्वगणना (सेल्फ एनुमेरेशन) का डिजिटल/ऑनलाइन प्रपत्र भरा। इस अवसर पर उन्होंने 21 मई तक चलने वाली डिजिटल स्वगणना की प्रक्रिया में सभी नागरिकों से हिस्सेदारी की अपील की।

मुख्यमंत्री ने स्वगणना पोर्टल पर जाकर अपनी सभी जानकारियों के कॉलम को पूर्ण किया। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस प्रक्रिया में सहभागिता दर्ज कराने की अपील करते हुए कहा कि यह देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘हमारी जनगणना-हमारा विकास’ की भावना के साथ सटीक आंकड़े जुटाकर प्रदेश के विकास और कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना है।उल्लेखनीय है कि 7 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से डिजिटल जनगणना के पहले चरण ‘स्वगणना’ का शुभारंभ किया था।

सीएम योगी ने कहा कि जनगणना सिर्फ जनसंख्या की गणना भर नहीं है बल्कि समग्र, समावेशी और सुनियोजित विकास का सशक्त आधार भी है। जनगणना 2027 यह सुनिश्चित करने का भी माध्यम है कि विकास की धारा में समाज का अंतिम व्यक्ति भी समान रूप से सहभागी बन सके। उन्होंने कहा कि रियल टाइम डेटा के लिए डिजिटल तकनीक के उपयोग से जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और त्वरित बनाया गया है।

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक की सीएम एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने

मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपीएसपी) की सभी संस्थाओं का आह्वान किया है कि वे पश्चिम एशिया संघर्ष सहित वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के प्रति समाज में अलख जगाएं। सभी संस्थाओं के शिक्षक और कर्मचारी वर्तमान समय में अति आवश्यक ईंधन संरक्षण और विदेशी मुद्रा व्यय कम करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का अनुसरण करें। यह समयानुकूल राष्ट्रीय दायित्व है। ऊर्जा संरक्षण को लेकर विद्यार्थियों के जरिये उनके परिवारों और समूचे समाज को जागरूक करने का व्यापक अभियान शुरू करें। सबके मन में राष्ट्र प्रथम का भाव होगा तो हर चुनौती का आसानी से सामना किया जा सकेगा। सीएम ने सरकार के कर्मयोगी पोर्टल की तरह एक प्लेटफार्म बनाकर एमपीएसपी की संस्थाओं के शिक्षकों और कर्मचारियों के अपडेट प्रशिक्षण का खाका तैयार करने के भी निर्देश दिए।

सीएम योगी शनिवार को गोरखनाथ मंदिर के सभाकक्ष में एमपीएसपी की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ संस्थाओं की गतिविधियों और भावी कार्ययोजना की समीक्षा कर रहे थे। समीक्षा बैठक में सभी संस्थाओं के प्रमुखों ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिये वार्षिक प्रतिवेदन और आगामी कार्ययोजना की जानकारी साझा की। इस अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर ने एमपीएसपी की सभी संस्थाओं के प्रमुखों का आह्वान किया कि वे अपने दायित्व वाली संस्थाओं को समाज और राष्ट्रहित में युगानुकूल परिवर्तन का वाहक बनाएं।

सीएम योगी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा किया जाना अत्यंत आवश्यक है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से देश के समक्ष भी ईंधन और विदेशी मुद्रा से जुड़ी चुनौती है। इस चुनौती का सामना करने में शिक्षण संस्थाओं को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। संस्थाओं के सभी कार्मिक ईंधन बचाने के उपायों को अपनाएं। विद्यार्थियों को भी पेट्रोलियम पदार्थों के कम उपयोग, विद्युत ऊर्जा की बचत के लिए प्रेरित करें। विद्यार्थी जब जागरूक होगा तो उसका असर परिवारों और घरों पर भी पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के शिक्षकों और कमर्चारियों को खुद को समय के अनुरूप अपडेट करते रहना होगा। इसके लिए सरकार के कर्मयोगी पोर्टल की तरह एक प्लेटफॉर्म बनाया जा सकता है, जहां सभी कार्मिकों को वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप तैयार किया जा सके। वर्तमान और समय से आगे चलने वाली प्रौद्योगिकी को व्यवहार में अपनाने से कार्य आसान हो जाता है।

हर संस्था का हो सुस्पष्ट ध्येय
सीएम योगी ने कहा कि जीवन की तरह कोई संस्था भी औपचारिकता मात्र नहीं है। हर संस्था का एक सुस्पष्ट ध्येय होना चाहिए। हर संस्थाध्यक्ष का दायित्व है कि अपनी टीम के साथ पूरे मनोयोग से और लीक से हटकर कार्य करें। लकीर का फकीर बनने की बजाय हर संस्था सामूहिक प्रयास से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन, समय पालन और नवाचार करते हुए खुद की एक बुलंद पहचान बनाए।

एमपीएसपी की नींव में ही राष्ट्रीयता की भावना
समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने एमपीएसपी की हर संस्था के लिए उत्कृष्ट परिसर संस्कृति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद सिर्फ स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या अस्पताल खोलने वाली संस्था नहीं है। इसका ध्येय शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सेवाओं के माध्यम से समाज तथा राष्ट्र के सामाजिक विकास में योगदान देना है। इस परिषद की नींव ही राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करने के लिए, राष्ट्रहित में सुयोग्य नागरिक तैयार करने के लिए रखी गई। परिस्थितियां अनुकूल रही हों या प्रतिकूल, परिषद इस समग्र लक्ष्य से कभी भी विचलित नहीं हुई।

भारतीय ज्ञान परंपरा का विस्तार करें संस्थाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी संस्थाएं भारतीय ज्ञान परंपरा का सतत विस्तार करें। ऐसा करने पर हम वर्तमान और भावी पीढ़ी को भारत की ज्ञान प्रणाली और इसकी विरासत से जोड़ सकेंगे। परिषद की संस्थाओं ने इस मामले में अनुकरणीय प्रयास किया है। परिसर में अनुशासन की भावना के साथ स्वच्छता, हरियाली व सद्भाव का नियमित पर्यवेक्षण करना सभी संस्थाध्यक्षों की जिम्मेदारी है।

अनुशासन पहले खुद पर लागू करें संस्थाध्यक्ष
सीएम योगी ने कहा कि संस्था में समय का पालन और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए संस्थाध्यक्ष पहले इसे खुद पर लागू करें। ऐसा होने पर दूसरे लोगों पर यह स्वतः स्फूर्त लागू होने लगता है। सभी प्रभारियों को प्रतिदिन संपूर्ण परिसर का भ्रमण जरूर करना चाहिए।

उत्साह से दायित्व स्वीकार करें शिक्षक
सीएम योगी ने कहा कि शिक्षकों को विद्यालय से संबंधित जो भी प्रभार मिले, उत्साहपूर्वक स्वीकार कर मिसाल पेश करना चाहिए। उन्होंने संस्थापकों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रखने का मंत्र देते हुए कहा कि यह भाव आपकी संस्था और आपको आगे बढ़ाने में मददगार होगा। विद्यालय में सकारात्मक व स्वच्छ माहौल होना आवश्यक है। किसी भी छात्र के अभिभावक विद्यालय में आएं तो परिसर की स्वच्छता, सुंदरता, अनुशासन और सकारात्मक माहौल देखकर प्रभावित होकर जाएं।

प्रार्थना सभा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण
सीएम योगी ने सभी शिक्षण संस्थाओं में प्रार्थना सभा, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे सकारात्मक, आध्यात्मिक और प्रभावपूर्ण वातावरण का निर्माण होता है। विद्यालय के पुस्तकालय में भरपूर, अच्छी, रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें होनी चाहिए। शिक्षकों-कर्मचारियों की क्षमता संवर्धन हेतु प्रशिक्षण तथा छात्रों की करियर काउंसिलिंग पर भी नियमित ध्यान दिया जाना चाहिए।

उत्कृष्टता को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परिषद की संस्थाओं ने हमेशा अपने-अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए समाज और राष्ट्रहित में अपनी उपयोगिता प्रमाणित की है। इस उत्कृष्टता को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ निरंतर आगे बढ़ाते रहना होगा। उन्होंने परिषद की संस्थाओं की गतिविधियों की सराहना की और भावी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

भव्य शताब्दी वर्ष मनाने की करें तैयारी
बैठक में मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को भव्य तथा ऐतिहासिक बनाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना 1932 में पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण को लेकर की गई थी। यह परिषद अपने संस्थापक युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज तथा विस्तारक राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के मूल्यों, आदर्शों को संजोते हुए निरंतर प्रगतिमान है। शताब्दी वर्ष तक हमें परिषद की संस्थाओं को एक प्रतिमान के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए सभी संस्थाओं के प्रमुख को एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करके अभी से जुट जाना होगा।

समीक्षा बैठक में ये रहे मौजूद
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संयुक्त मंत्री एवं गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत योगी मिथिलेशनाथ, परिषद के उपाध्यक्ष राजेश मोहन सरकार, वरिष्ठ सदस्य रामजन्म सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह, प्रमथनाथ मिश्र, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह, कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुमार चतुर्वेदी सहित सभी संस्थाओं के प्रमुख इस बैठक में उपस्थित रहे।

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