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दादा की स्मृति में युवक ने किया 10वां रक्तदान, मानवता की मिसाल

देवरिया में गौरीबाजार निवासी उत्कर्ष सिंह ने अपने दादा की प्रथम पुण्यतिथि पर जिला ब्लड बैंक में दसवां रक्तदान किया। स्वच्छ भलुअनी स्वस्थ भलुअनी यूथ ब्रिगेड से जुड़े उत्कर्ष ने निरंतर रक्तदान का संकल्प लिया। संस्था के संतोष मद्धेशिया ने इसे प्रेरणादायक बताते हुए अधिक लोगों से रक्तदान की अपील की।

  • देवरिया ब्लड बैंक में उत्कर्ष सिंह ने स्वैच्छिक रक्तदान कर युवाओं को किया प्रेरित

देवरिया। मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मंगलवार को एक युवक ने अपने दादा की स्मृति में स्वैच्छिक रक्तदान कर लोगों को प्रेरित किया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज स्थित जिला ब्लड बैंक में गौरीबाजार निवासी उत्कर्ष सिंह ने अपना दसवां रक्तदान किया।

जानकारी के अनुसार उत्कर्ष सिंह, ‘स्वच्छ भलुअनी स्वस्थ भलुअनी (यूथ ब्रिगेड)’ के सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने संस्था के संस्थापक संतोष मद्धेशिया वैश्य से संपर्क कर अपने दादा जी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर रक्तदान करने की इच्छा जताई। इस दौरान उन्होंने बताया कि एक वर्ष पूर्व उनके दादा के इलाज के दौरान संस्था द्वारा रक्त की व्यवस्था कराई गई थी, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली।

उत्कर्ष ने बताया कि अब तक वह सात बार अपने दादा के लिए और दो बार अन्य रिश्तेदारों के लिए रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि संस्था के कार्यों को देखकर अब उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक संभव होगा, वह जरूरतमंदों के लिए निरंतर रक्तदान करते रहेंगे।

इस अवसर पर 25 बार रक्तदान कर चुके संतोष मद्धेशिया वैश्य ने उत्कर्ष की सराहना करते हुए कहा कि आज के युवाओं में इस तरह की सोच समाज के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग स्वयं रक्त लेने के बाद समाज या संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी नहीं निभाते, लेकिन उत्कर्ष की पहल ऐसे लोगों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

संतोष मद्धेशिया ने बताया कि संस्था की ओर से अब तक कुल 857 यूनिट रक्तदान कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि रक्तदान को ‘महादान’ की संज्ञा दी गई है, क्योंकि यह न केवल जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचाता है, बल्कि उनके परिवारों में खुशियां भी लौटाता है।

उन्होंने सभी स्वस्थ पुरुषों और महिलाओं से अपील की कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें और “नशा नहीं, रक्तदान करें” जैसे अभियानों से जुड़कर समाज सेवा में अपना योगदान दें।

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