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गणतंत्र दिवस 2026: राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संदेश, विकसित भारत और नारी शक्ति पर विशेष जोर

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देश की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की विकास-योजना का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने संविधान की शक्ति, राष्ट्रीय एकता, नारी शक्ति, युवा शक्ति, किसानों, गरीब कल्याण योजनाओं और आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, आर्थिक प्रगति, स्टार्टअप संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और लोकतंत्र की मजबूती को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने सभी नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ योगदान देने का आह्वान किया।

नई दिल्ली। देश और विदेश में रह रहे समस्त भारतवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भारत के गौरवशाली अतीत, सशक्त वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि देश की दशा और दिशा का आत्ममंथन करने का अवसर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ और 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपने संविधान को पूरी तरह लागू कर एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में विश्व-पटल पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्शों पर आधारित है और यही भारत के गणतंत्र की आत्मा है।

संविधान और राष्ट्रीय एकता की भूमिका

राष्ट्रपति ने संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े गणराज्य के रूप में भारत की मजबूती का आधार यही संविधान है। उन्होंने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से देश का एकीकरण संभव हुआ। उनकी 150वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना को और मजबूत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत की सांस्कृतिक एकता हमारी प्राचीन परंपराओं की देन है, जिसे सहेजना और मजबूत करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

वंदे मातरम् और नेताजी को श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गीत राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, श्री ऑरोबिंदो और सुब्रमण्य भारती के योगदान को याद किया।

उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (23 जनवरी) को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘जय हिन्द’ का नारा आज भी देश के स्वाभिमान और पराक्रम का उद्घोष है।

सैनिकों, किसानों, कर्मवीरों और नागरिकों को सलाम

राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों, पुलिस, अर्धसैनिक बलों, किसानों, डॉक्टरों, नर्सों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, सफाई कर्मियों, श्रमिकों, उद्यमियों और समाजसेवियों की सराहना करते हुए कहा कि सभी वर्ग मिलकर भारत के गणतंत्र को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की भी विशेष सराहना की, जो विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस और लोकतंत्र

25 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मतदान लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को याद करते हुए कहा कि मताधिकार राजनीतिक जागरूकता का माध्यम है। उन्होंने महिलाओं की बढ़ती मतदान भागीदारी को गणतंत्र की बड़ी ताकत बताया।

नारी शक्ति: विकसित भारत की आधारशिला

राष्ट्रपति ने महिलाओं के सशक्तिकरण को विकसित भारत की प्रमुख धुरी बताया। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री जनधन योजना, स्वयं सहायता समूहों, महिला खिलाड़ियों और महिला नेतृत्व की सराहना की।

उन्होंने बताया कि पंचायतों में लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व है और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को नई ऊंचाई मिलेगी।खेल जगत में भारतीय बेटियों की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने महिला क्रिकेट विश्व कप, ब्लाइंड महिला टी-20 विश्व कप और शतरंज विश्व कप फाइनल में भारतीय बेटियों की सफलता को देश के लिए गर्व का विषय बताया।

जनजातीय समाज, किसान और गरीब कल्याण

राष्ट्रपति ने जनजातीय गौरव दिवस, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातीय कल्याण योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने सिकल सेल एनीमिया मिशन, एकलव्य विद्यालयों और पीएम-जनमन जैसी योजनाओं को जनजातीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि, सिंचाई, बीमा, आधुनिक कृषि पद्धतियों और जैविक खेती पर सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया। गरीब कल्याण पर बोलते हुए उन्होंने पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना, पक्के मकानों के निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

युवा शक्ति और स्टार्टअप इंडिया

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। ‘MY भारत’ जैसी पहल से युवाओं को नेतृत्व और कौशल विकास के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने स्टार्टअप संस्कृति को भारत की आर्थिक प्रगति की नई पहचान बताया।

आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने GST, श्रम सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और आत्मनिर्भर भारत अभियान को आर्थिक मजबूती का आधार बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑपरेशन सिंदूर

राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं ने देश की सुरक्षा को और मजबूत किया है। उन्होंने सियाचिन, वायुसेना, नौसेना और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म्स की क्षमताओं की सराहना की।

पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति

राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए ‘LiFE’ (Lifestyle for Environment) की भावना को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन भारत की परंपरा है। उन्होंने वैश्विक शांति का संदेश देते हुए कहा कि भारत विश्व मंच पर शांति और सद्भाव का अग्रदूत बना हुआ है।

राष्ट्र प्रथम की भावना का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए देशवासियों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस देशभक्ति, कर्तव्य और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करने का अवसर है। राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों के सुख, शांति, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए एक बार फिर गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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