
स्टार्ट इन यूपी स्टार्टअप के अंतर्गत एक माह के भीतर 106 नए स्टार्टअप को मिली मान्यता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है। ‘स्टार्ट इन यूपी’ पहल के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 3000 के पार पहुंच गई है। अनुकूल नीतियों, आसान प्रक्रियाओं और डिजिटल गवर्नेंस के चलते अब प्रदेश का युवा नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है। छोटे शहरों से उभरते स्टार्टअप्स स्थानीय रोजगार और आर्थिक मजबूती को नई दिशा दे रहे हैं।
- स्टार्टअप इंडिया के तहत भी यूपी में मिल रही मजबूती, कुल 19,042 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप
लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम का परिदृश्य लगातार व्यापक होता जा रहा है। अनुकूल वातावरण की वजह से प्रदेश में स्टार्टअप्स के मामले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। प्रदेश सरकार की स्टार्ट इन यूपी पहल के अंतर्गत रिकॉग्नाइज्ड (मान्यता प्राप्त) स्टार्टअप्स की संख्या अब 3000 के पार पहुंच चुकी है। योगी सरकार की स्पष्ट मान्यता है कि प्रदेश का युवा नौकरी ढूँढ़ने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बने और यह साकार होने लगा है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में स्टार्ट इन यूपी रिकॉग्नाइज्ड स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 3011 हो गई है, जबकि दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 2905 था। दिसंबर के बाद मात्र कुछ ही समय में 106 नए स्टार्टअप्स को मान्यता मिली है, जो प्रदेश में बढ़ते उद्यमी विश्वास को दर्शाता है। प्रदेश स्तर के साथ-साथ केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया योजना के अंतर्गत भी उत्तर प्रदेश की स्थिति लगातार सुदृढ़ होती जा रही है। दिसंबर, 2025 में उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 18,568 थी जो वर्तमान में बढ़कर 19,042 हो गई है। इस दौरान 474 नए स्टार्टअप्स को स्टार्ट अप इंडिया के अंतर्गत मान्यता प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा प्रमाणित करता है कि उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर भी स्टार्टअप गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
योगी सरकार के कार्यकाल में स्टार्टअप्स को लेकर स्पष्ट और दूरदर्शी नीति अपनाई गई है। स्टार्ट इन यूपी नीति के माध्यम से सरकार ने फंडिंग, सपोर्ट, मेंटरशिप इनक्यूबेशन और तकनीकी सहयोग जैसी सुविधाओं को प्रदान करने का काम किया है। इसके साथ ही आवेदन और मान्यता की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे कि अधिक से अधिक युवा उद्यमिता की ओर आकर्षित हों। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए और उन्हें अपने विचारों को व्यावसायिक रूप देने के लिए अनुकूल वातावरण मिले।
आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर और डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार का असर भी स्टार्टअप सेक्टर पर स्पष्ट दिखाई आ रहा है। अब स्टार्टअप्स केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गए हैं, छोटे शहरों और जिलों से भी नए उद्यम सामने आ रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल रहा है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
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