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संसद का शीतकालीन सत्र एक से 19 दिसम्बर तक चलेगा

संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह सत्र लोकतंत्र को मजबूत करेगा और जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा। सत्र में कई अहम विधेयकों पर चर्चा होगी।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार के प्रस्ताव को दी मंजूरी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रचनात्मक सत्र की जताई उम्मीद

नई दिल्ली : संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से प्रारंभ होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस संबंध में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आज सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। श्री रिजिजू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह सत्र रचनात्मक, सार्थक और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप होगा।

उन्होंने लिखा, “मुझे विश्वास है कि यह सत्र हमारे लोकतंत्र को और मज़बूत करेगा तथा जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा।” सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, आर्थिक सुधार, प्रशासनिक सुधार और कुछ सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़े बिलों पर चर्चा हो सकती है। साथ ही, विपक्ष सरकार से महंगाई, बेरोज़गारी, किसान मुद्दे, और सीमा सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों पर जवाब मांगेगा।

गौरतलब है कि पिछले मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के तीखे विरोध और हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही कई दिनों तक बाधित रही थी। विपक्ष ने उस समय बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा की मांग उठाई थी, जिससे दोनों सदनों का अधिकांश समय बेकार चला गया था। शीतकालीन सत्र आमतौर पर वर्ष के अंतिम महीने में आयोजित किया जाता है और यह सरकार के लिए वर्ष के शेष विधायी कार्यों को निपटाने का अवसर होता है। इस बार सत्र के दौरान देश के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर बहस होने की संभावना है।

संसदीय सूत्रों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में लगभग 15 कार्य दिवस होंगे। सरकार चाहती है कि विपक्ष भी सहयोगी रुख अपनाए ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके। सत्र की पूर्वसंध्या पर सर्वदलीय बैठक आयोजित किए जाने की भी संभावना है, जिसमें सरकार और विपक्षी दलों के बीच एजेंडा और विधेयकों पर प्रारंभिक सहमति बनाई जाएगी। इस प्रकार, एक दिसंबर से प्रारंभ होने जा रहा संसद का यह शीतकालीन सत्र देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक अहम अध्याय साबित हो सकता है, जहाँ सत्ता और विपक्ष दोनों से रचनात्मक संवाद की अपेक्षा की जा रही है।(वार्ता)

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