भारत-यूके साझेदारी का नया दौर: मुंबई में मोदी-स्टारमर की ऐतिहासिक मुलाकात से व्यापार, रक्षा और नवाचार को नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 को संबोधित करते हुए भारत की डिजिटल क्रांति और समावेशी नवाचार की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का विशेष स्वागत करते हुए कहा कि मुंबई ऊर्जा, उद्यम और अनंत संभावनाओं का शहर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण किया है, जिससे डिजिटल सुविधा अब समानता और सशक्तिकरण का माध्यम बन गई है। उन्होंने बताया कि यूपीआई, जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) और इंडिया स्टैक जैसे प्लेटफॉर्म ने भारत को वैश्विक फिनटेक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचाया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर एमपी 8 से 9 अक्टूबर 2025 तक भारत की राजकीय यात्रा पर आए। यह प्रधानमंत्री स्टारमर की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी। उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया, जिसमें ब्रिटेन के बिजनेस और ट्रेड राज्य सचिव तथा बोर्ड ऑफ ट्रेड के अध्यक्ष पीटर काइल एमपी, स्कॉटलैंड के राज्य सचिव डगलस अलेक्जेंडर एमपी, निवेश मंत्री जेसन स्टॉकवुड के साथ लगभग 125 सीईओ, उद्यमी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और संस्कृति से जुड़े अग्रणी व्यक्ति शामिल थे।
यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की 23-24 जुलाई 2025 की ब्रिटेन यात्रा के बाद हुई है, जिसके दौरान दोनों देशों ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय भारत और ब्रिटेन ने विजन 2035 और रक्षा उद्योग रोडमैप को भी अपनाया था।
मुंबई पहुंचने पर प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का भव्य स्वागत किया गया। यात्रा के दूसरे दिन दोनों प्रधानमंत्रियों ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में संयुक्त रूप से मुख्य भाषण दिया और बाद में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वैश्विक शांति, स्थिरता तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ व्यापार, रक्षा, नवाचार, शिक्षा, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर गहन चर्चा हुई। दोनों देशों ने भारत-यूके सीईओ फोरम की बैठक का स्वागत किया और सीईटीए के शीघ्र संपुष्टि की आशा जताई। इस समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में नया अध्याय माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन स्वाभाविक साझेदार हैं और लोकतंत्र, स्वतंत्रता तथा कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सीईटीए केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि साझा प्रगति और समृद्धि का रोडमैप है। उन्होंने चार नए आयाम सुझाए – कॉमर्स एंड इकॉनमी, एजुकेशन एंड पीपल-टू-पीपल टाइज, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन और एस्पिरेशन – ताकि यह समझौता व्यापक आधार पर लाभ पहुंचा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 56 अरब डॉलर है और इसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत की नीति स्थिरता, पूर्वानुमेय विनियमन और बड़ी घरेलू मांग इसे निवेश के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य बनाते हैं। प्रधानमंत्री स्टारमर ने भी कहा कि ब्रिटेन भारत के साथ अपने व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों ने तकनीकी सुरक्षा पहल (टीएसआई) के तहत हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने भारत-यूके कनेक्टिविटी और इनोवेशन सेंटर की स्थापना का स्वागत किया, जो 6जी, गैर-स्थलीय नेटवर्क और दूरसंचार सुरक्षा के लिए एआई नेटिव नेटवर्क विकसित करेगा। इस परियोजना में 24 मिलियन पाउंड का संयुक्त वित्त पोषण किया जाएगा।
भारत-यूके संयुक्त एआई सेंटर स्वास्थ्य, फिनटेक, जलवायु और इंजीनियरिंग जीव विज्ञान में भरोसेमंद एआई तकनीकों को आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लिए यूके-इंडिया क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी के दूसरे चरण की घोषणा की। इस योजना का उपग्रह परिसर आईआईटी-आईएसएम धनबाद में स्थापित किया जाएगा।
जीवविज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके तहत सेंटर फॉर प्रोसेस इनोवेशन (यूके) और भारत की बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (बीआरआईसी), हेनरी रॉयस इंस्टीट्यूट और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसी संस्थाएं मिलकर बायोमैन्युफैक्चरिंग, 3डी बायोप्रिंटिंग और जीनोमिक्स में संयुक्त अनुसंधान करेंगी।
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को और बढ़ाएंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटिश नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के पोर्ट कॉल और भारतीय नौसेना के साथ ‘कोंकण’ अभ्यास का स्वागत किया। दोनों पक्ष हिंद-प्रशांत महासागर पहल के तहत क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना पर सहमत हुए।
दोनों देशों ने लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल प्रणाली की प्रारंभिक आपूर्ति बढ़ाने के लिए एक सरकारी समझौते की घोषणा की। साथ ही, भारतीय नौसेना के प्लेटफॉर्म के लिए समुद्री इलेक्ट्रिक प्रोपल्सन प्रणालियों के विकास में सहयोग हेतु एक अंतर-सरकारी समझौते पर भी सहमति बनी।
दोनों नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के वित्तपोषण, सीमा पार गतिविधियों तथा आतंकवादियों की भर्ती को रोकने के लिए संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की।
जलवायु और ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘भारत-यूके जलवायु वित्त पहल’ का स्वागत किया। इस पहल का उद्देश्य हरित विकास को बढ़ावा देना और जलवायु प्रौद्योगिकी तथा एआई क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना है। दोनों देशों ने ‘क्लाइमेट टेक स्टार्टअप फंड’ और ‘ऑफशोर विंड टास्कफोर्स’ की स्थापना की घोषणा की, जिससे स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बल मिलेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में यह यात्रा ऐतिहासिक रही। दोनों नेताओं ने भारत में ब्रिटेन की नौ विश्वविद्यालयों द्वारा परिसर खोलने की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय ने गुरुग्राम में अपने पहले बैच का स्वागत किया है, जबकि लिवरपूल, यॉर्क, एबरडीन, ब्रिस्टल, बेलफास्ट और कोवेंट्री विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, लैंकेस्टर विश्वविद्यालय को बेंगलुरु में और सर्रे विश्वविद्यालय को गिफ्ट सिटी में शाखा खोलने की मंजूरी मिली है।
दोनों देशों ने शिक्षा, संस्कृति और युवाओं के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ब्रिटेन में बसे भारतीय प्रवासी दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग की एक जीवंत कड़ी हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में भी दोनों नेताओं की विचारधारा में समानता दिखी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। ब्रिटेन ने भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा के प्रति अपने दीर्घकालिक समर्थन को दोहराया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने यूक्रेन में न्यायसंगत और स्थायी शांति तथा गाजा में युद्धविराम और मानवीय सहायता सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन किया।
प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत-यूके संबंधों के एक नए युग की शुरुआत है। प्रधानमंत्री मोदी ने समापन भाषण में कहा कि भारत का टैलेंट और ब्रिटेन की विशेषज्ञता मिलकर विश्व के लिए नए मानक स्थापित कर सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी विश्वास, प्रतिभा और प्रौद्योगिकी पर आधारित है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक प्रगति की दिशा तय करेगी।
- ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: “भारत ने प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण कर समानता और सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज महाराष्ट्र के मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए मुंबई को ऊर्जा, उद्यम और अनंत संभावनाओं का शहर बताया। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का विशेष रूप से स्वागत किया और कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति को भारत-यूके साझेदारी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया।
प्रधानमंत्री ने स्मरण किया कि जब पांच वर्ष पहले इस फेस्टिवल की शुरुआत हुई थी, तब दुनिया एक वैश्विक महामारी से जूझ रही थी। उन्होंने कहा कि आज यह आयोजन वित्तीय नवाचार और वैश्विक सहयोग का प्रमुख मंच बन चुका है। इस वर्ष ब्रिटेन एक साझेदार देश के रूप में शामिल हुआ है, जो दोनों लोकतंत्रों की साझेदारी को और गहराई प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री ने आयोजन स्थल की ऊर्जा और वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए श्री कृष गोपालकृष्णन, आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण किया है। उन्होंने कहा कि “भारत लोकतंत्र की जननी है, और यहां लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं, बल्कि शासन का एक सशक्त आधार बन चुका है।” उन्होंने बताया कि पहले भारत भी तकनीकी विभाजन का शिकार था, लेकिन अब वह दुनिया के सबसे समावेशी डिजिटल समाजों में से एक बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी अब भारत में सुशासन का मॉडल बन गई है। सरकार जनहित में डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करती है और निजी क्षेत्र उस पर नवाचार के अवसरों को आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि समानता का भी उपकरण है।
प्रधानमंत्री ने बैंकिंग व्यवस्था में आए परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले बैंकिंग एक विशेषाधिकार मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल तकनीक ने इसे सशक्तिकरण का माध्यम बना दिया है। उन्होंने बताया कि भारत में अब डिजिटल भुगतान सामान्य जीवन का हिस्सा बन चुका है और इसका श्रेय जन धन, आधार और मोबाइल—इन तीन स्तंभों को जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि “केवल यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से हर महीने बीस अरब से अधिक लेनदेन हो रहे हैं, जिनका मूल्य पच्चीस लाख करोड़ रुपये से अधिक है।” उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया में होने वाले हर सौ रियल टाइम डिजिटल लेनदेन में से पचास भारत में होते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की डिजिटल यात्रा ने न केवल अपने नागरिकों के जीवन को बदला है, बल्कि विश्व के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यूपीआई, आधार-आधारित भुगतान प्रणाली, भारत बिल भुगतान प्रणाली, डिजिलॉकर, डिजीयात्रा और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) जैसे प्लेटफॉर्म भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि ओएनडीसी यानी ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स ने छोटे दुकानदारों और एमएसएमई को देशभर के बाजारों से जोड़ा है, जबकि ओपन क्रेडिट इनेबलमेंट नेटवर्क (ओसीईएन) ने छोटे उद्यमियों के लिए ऋण तक पहुंच को सरल बनाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “इंडिया स्टैक” केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की कहानी है। उन्होंने इसे विकासशील देशों के लिए आशा की किरण बताया और कहा कि भारत अपने डिजिटल नवाचारों को वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में साझा कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में विकसित मॉड्यूलर ओपन-सोर्स आइडेंटिटी प्लेटफॉर्म (एमओएसआईपी) को अब 25 से अधिक देश अपनी संप्रभु डिजिटल पहचान प्रणाली के रूप में अपना रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तकनीक साझा करने के साथ-साथ अन्य देशों को डिजिटल सशक्तिकरण में सहयोग भी दे रहा है। उन्होंने कहा कि “यह डिजिटल सहायता नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण है।”
प्रधानमंत्री ने भारत के फिनटेक समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि स्वदेशी समाधानों को अब वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के पहले छह महीनों में भारत विश्व के शीर्ष तीन सर्वाधिक वित्तपोषित फिनटेक इकोसिस्टम में शामिल हो गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की शक्ति केवल परिमाण में नहीं, बल्कि उसकी समावेशिता, गतिशीलता और स्थिरता में निहित है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से वित्तीय प्रणाली को और अधिक पारदर्शी व विश्वसनीय बनाने की दिशा में भारत की पहल का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि भारत-एआई मिशन के तहत सरकार उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमता विकसित कर रही है ताकि नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स को सस्ती व सुलभ तकनीकी संसाधन मिल सकें। उन्होंने कहा कि “भारत का एआई दृष्टिकोण न्यायसंगत पहुंच, जन-स्तरीय कौशल निर्माण और उत्तरदायी तैनाती पर आधारित है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य एआई के लाभों को हर जिले और हर भाषा तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत नैतिक एआई के लिए एक वैश्विक ढांचा बनाने की दिशा में अग्रसर है और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में उसका अनुभव विश्व के लिए उपयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए एआई का अर्थ है “सर्वसमावेशी इंटेलिजेंस।”प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि जहां एआई की सुरक्षा पर वार्ता ब्रिटेन में शुरू हुई थी, वहीं उसका प्रभाव भारत में तय होगा। उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष भारत में एआई इंपैक्ट समिट आयोजित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ब्रिटेन ने मिलकर वैश्विक व्यापार में लाभकारी साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की अनुसंधान क्षमता और वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञता जब भारत के परिमाण और प्रतिभा से जुड़ती है, तो नए अवसरों के द्वार खुलते हैं। उन्होंने ब्रिटेन-भारत फिनटेक कॉरिडोर को आगे बढ़ाने, स्टार्टअप्स और संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा लंदन स्टॉक एक्सचेंज और गिफ्ट सिटी के बीच साझेदारी को और सशक्त बनाने की घोषणा की।
प्रधानमंत्री ने सभी वैश्विक साझेदारों, विशेषकर ब्रिटेन के निवेशकों, को भारत के साथ जुड़ने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत के विकास के साथ आगे बढ़ना हर निवेशक के लिए एक अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन इस संदेश के साथ किया कि “हमें एक ऐसा फिनटेक विश्व बनाना होगा, जहां तकनीक, लोग और मानवता- तीनों का संतुलित विकास हो। जहां नवाचार का उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि अच्छाई हो, और वित्त केवल संख्याओं का नहीं, बल्कि मानवता के उत्थान का प्रतीक बने।”
कार्यक्रम में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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