Health

कुष्ठ और टीबी रोगियों के सहयोग में आगे आएं समाजसेवी-सीएमओ

40 कुष्ठ रोगियों और 18 टीबी रोगियों के बीच कंबल वितरित
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित हुआ कंबल वितरण कार्यक्रम

कुशीनगर : गांधी जयंती के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवतहा पर सोमवार को कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित कर कुष्ठ और टीबी रोगियों के बीच कंबल वितरित किया गया। साथ ही देश के प्रति महात्मा गांधी के कार्यों और समर्पण को याद किया गया।कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ.सुरेश पटारिया ने कहा कि कुष्ठ और टीबी रोगियों के सहयोग और सेवा में समाजसेवियों को आगे आना चाहिए। महात्मा गांधी ने कुष्ठ रोगियों के सेवा में उल्लेखनीय कार्य किया था। कार्यक्रम में 40 कुष्ठ और 18 टीबी रोगियों के बीच कंबल, फल, मिष्ठान्न एवं दवाइयां वितरित की गयी। उक्त कंबल एवं सामग्री एनएमएस रमेश त्रिपाठी के व्यक्तिगत सहयोग से वितरित किया गया ।

जिला कुष्ठ अधिकारी डाॅ.आरडी कुशवाहा ने बताया कि कुष्ठ एक संक्रामक रोग है जो माइक्रोबैक्टिरियम लेप्रो नामक जीवाणु से फैलता है । अगर समय से कुष्ठ रोग का पता चल जाए तो व्यक्ति दीर्घकालिक दिव्यांगता से बच सकता है । यह रोग कुष्ठ संक्रमित व्यक्ति से फैलता है । निःशुल्क इलाज सरकारी अस्पताल पर किया जाता है ।जिला कुष्ठ परामर्शदाता डॉ विनोद कुमार मिश्र ने कुष्ठ रोग के प्रति गाँधी जी के योगदान और कुष्ठ रोगियों के प्रति उनके स्नेह को बताते हुए कुष्ठ रोग के कुछ सामान्य लक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि गहरे रंग की त्वचा के व्यक्ति में हल्के रंग के धब्बे और हल्के रंग के व्यक्ति की त्वचा में गहरे अथवा लाल रंग के धब्बे, त्वचा के दाग धब्बों में संवेदनशीलता (सुन्नपन), हाथ या पैरों में अस्थिरता या झुनझुनी, हाथपैरों या पलकों में कमजोरी, चेहरे, कान में सूजन या घाव तथा हाथ या पैरों में दर्द रहित घाव बनता है।

कुष्ठ रोग में संवेदनहीनता और मांसपेशियों की कमजोरी के फलस्वरूप तंत्रिका क्षति के कारण शारीरिक दिव्यांगता और विकृति का कारण बनता है। इसके फलस्वरूप त्वचा सूख जाती है और अतिरिक्त संवेदी विकृतियों के साथ कठोर त्वचा, छाले एवं अल्सर बनने का कारण बनती है। हाथों-पैरों को आग, सख्त, नुकीली और खुरदरी चीजों के संपर्क में आने से बचाएं। इनसे बचाव के लिए विशेष तरह के जूते-चप्पल आते हैं उन्हें पहने हाथों-पैरों को हमेशा साफ़ तथा मुलायम रखें। आँखों में इसका प्रभाव आने पर पलके लकवाग्रस्त हो सकती है जिससे आँख पूरी तरह बंद नही हो पाती। ऐसी अवस्था मे आंखों में चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए आँखों का विशेष ध्यान रखे। दिन में चश्मा लगा कर रखे तथा रात्रि में सोते समय आंखों को स्वच्छ कपड़ों से ढकें।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डाॅ.हेमंत वर्मा ने टीबी रोग के बारे में विस्तार से बताया और लोगों से अपील की है कि दो सप्ताह से ज्यादा की खांसी होने पर चिकित्सालय आकार चिकित्सक को अवश्य दिखाए ये टीबी रोग का लक्षण हो सकता है। समय से जांच कराकर इलाज शुरू कराएं। कार्यक्रम का संचालन रमेश प्रसाद त्रिपाठी और आशुतोष मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर डिप्टी सीएमओ डाॅ. आरके गुप्ता, डाॅ.दिलीप गुप्ता, डाॅ. प्रिंस गुप्ता, डाॅ.आर एन द्विवेदी, डाॅ. संजय यादव, डाॅ. पंकज पंडित, डाॅ. विनय यादव,आशुतोष मिश्र, राकेश सोनकर (एसटीएस ), रामध्यान सिंह, अरविंद त्रिपाठी, विजय सिंह प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

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