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सावन का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व: मोदी

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सावन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि इनसे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक समृद्धि आती है।श्री मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात की 103 वीं कड़ी में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि इस समय ‘सावन’ का पवित्र महीना चल रहा है। सदाशिव महादेव की साधना-आराधना के साथ ही ‘सावन’ हरियाली और खुशियों से जुड़ा होता है। इसीलिए, ‘सावन’ का आध्यात्मिक के साथ ही सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्व रहा है।

उन्होंने कहा, “हमारी इस आस्था और इन परम्पराओं का एक पक्ष और भी है। हमारे ये पर्व और परम्पराएँ हमें गतिशील बनाते हैं। सावन में शिव आराधना के लिए कितने ही भक्त काँवड़ यात्रा पर निकलते हैं। ‘सावन’ की वजह से इन दिनों 12 ज्योतिर्लिंगों में भी खूब श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। बनारस पहुँचने वाले लोगों की संख्या भी रिकॉर्ड तोड़ रही है। अब काशी में हर साल 10 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटक पहुँच रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अयोध्या, मथुरा, उज्जैन जैसे तीर्थों पर आने वाले श्रद्दालुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इससे लाखों गरीबों को रोजगार मिल रहा है, उनका जीवन-यापन हो रहा है। ये सब, हमारे सांस्कृतिक जन-जागरण का परिणाम है। इसके दर्शन के लिए पूरी दुनिया से लोग तीर्थों में आ रहे हैं।

श्री मोदी ने अमरनाथ यात्रा पर आए दो अमेरिकी व्यक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यही भारत की खासियत है, कि सबको अपनाता है, सबको कुछ न कुछ देता है। उन्होंने फ्रांस मूल की एक महिला का जिक्र किया जो योग अभ्यास करते हैं और 100 वर्ष से भी अधिक की आयु की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें अपनी परंपराओं और विरासत को पूरी ईमानदारी के साथ विश्व के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उज्जैन में देशभर के 18 चित्रकार, पुराणों पर आधारित आकर्षक चित्रकथाएँ बना रहे हैं। ये चित्र, बूंदी शैली, नाथद्वारा शैली, पहाड़ी शैली और अपभ्रंश शैली जैसी कई विशिष्ट शैलियों में बनेंगे। इन्हें उज्जैन के त्रिवेणी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने राजकोट केप्रभात सिंग मोडभाई बरहाट जी अभी उल्लेख किया, उन्होंने छत्रपति वीर शिवाजी महाराज के जीवन के एक प्रसंग पर आधारित चित्र बनाए हैं। प्रभात भाई ने दर्शाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज राज्याभिषेक के बाद अपनी कुलदेवी ‘तुलजा माता’ के दर्शन करने जा रहे थे, तो उस समय क्या माहौल था। उन्होंने कहा कि इस तरीके से हम अपनी परंपराओं और विरासत को अगली पीढ़ी तक ले जा सकते हैं।श्री मोदी ने तमिलनाडु में वाडावल्ली के सुरेश राघवन की चित्रकारी का भी उल्लेख किया। वह जीव जंतुओं पर आधारित चित्र बनाते हैं।(वार्ता)

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