
श्रीनगर : जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को हुर्रियत आतंकी फंडिंग मामले में कथित आतंकी फंडिंग करने वाले जहूर अहमद शाह वटाली की 17 संपत्तियों को जब्त किया। यह जानकारी एजेंसी के एक प्रवक्ता ने सोमवार को दी।उन्होंने कहा कि पटियाला हाउस स्थित एनआईए की विशेष अदालत के आदेशानुसार, एनआईए ने यूए (पी) अधिनियम की धारा 33 (1) के अंतर्गत कुपवाड़ा के हंदवाड़ा इलाके में वटाली की 17 संपत्तियों को कुर्क किया।
एनआईए ने कहा कि यह मामला जम्मू कश्मीर में प्रतिबंधित आईएसआई समर्थित संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट और जैश-ए-मोहम्मद द्वारा की गई आतंकवादी एवं अलगाववादी गतिविधियों से संबंधित है।उन्होंने कहा कि ये संगठन नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमला करके घाटी में आतंक फैला रहे हैं और हिंसा को अंजाम दे रहे हैं।एनआईए ने कहा कि ये प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन केंद्र शासित प्रदेश में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने और उनका समर्थन करने के लिए 1993 में गठित ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) से सहायता प्राप्त कर रहे थे।
एनआईए के अनुसार, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासीन मलिक वर्तमान में इसी मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।एनआईए ने 30 मई, 2017 को स्वत: संज्ञान लेते हुए यासीन मलिक के अलावा जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद, हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन सहित 17 अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।एनआईए ने कहा कि उनकी जांच से पता चला है कि वटाली आतंकवादियों के लिए हवाला का एक माध्यम था, जो हाफिज सईद से पैसा लेता था जो कि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के ‘सूचीबद्ध वैश्विक आतंकवादियों’ की सूची में शामिल है।
वटाली ने दिखाया था कि उसकी कंपनी मेसर्स ‘ट्राइसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड’ की स्वामित्व वाली 20 कनाल भूखंड को उसने इस मामले में सह-आरोपी नवल किशोर कपूर को बेचा था।हालांकि, जांच में पता चला कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में न तो वटाली और न ही उनकी उपरोक्त कंपनी के पास इस भूखंड का स्वामित्व रहा है।(वार्ता)



