वाराणसी। कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत डीएवी कॉलेज में सुबह के वक्त क्रिकेट कोच को गोली मारने में शामिल पांच अभियुक्तों को कोतवाली पुलिस, क्राइम व सर्विलांस की टीम ने शिवपुर बाईपास जौनपुर मार्ग से दबोचा। गोली मारने की असल वजह अवैध संबन्ध को लेकर प्रतिशोध रहा और कोच की हत्या की योजना बीते एक साल से बना रहा था।
अभियुक्तों की पहचान रामजी दूबे, प्रभात दास, मो. नदीम, मो. नसीम और मनीष सिंह के तौर पर हुई। आगे की कार्रवाई में सभी को जेल भेजा गया। वहीं मनीष को पुलिस रिमांड पर लेगी ताकि असलहा तस्करी की जड़ को खंगाला जा सके। इस मामले में एक दिन पहले एक अन्य अभियुक्त पक्की बाजार निवासी मिर्जा अफजल को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। गिरफ्तार करने वाली टीम को 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की गयी।
मामले का पर्दाफाश एडिशनल सीपी अपराध एंव मुख्यालय संतोष कुमार सिंह और डीसीपी काशी जोन आरएस गौतम ने किया। पुलिस पूछताछ में अभियुक्त रामजी दूबे ने बताया कि उसके पिता डीएवी कॉलेज में चपरासी थे। डीएवी में किक्रेट कोच रामलाल यादव का उसकी मां पर गलत निगाह रखता था और ज्यादती करता था। कई बार उसके सामने ही संबन्ध बनाया। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता था क्योंकि रामलाल यादव दबंग प्रवृत्ति का है और मेरा परिवार डरता था। लेकिन ये बात मेरे जेहन में घर कर गयी कि इस काम का बदला लेना है। इसके लिए 20 साल तक का इंतजार किया। करीब एक साल पहले से रामलाल की हत्या की योजना पर काम कर रहा था।
इस दौरान मेरी मुलाकात नदीम, प्रभात दास, नसीम और अफजल से हुई। चूंकि हमसभी एक साथ नशा करते थे। मैने अपनी मां से जुड़ी सारी बात चारों को बतायी और कुछ पैसे का लालच देकर वारदात में शामिल होने को कहा, सभी तैयार हो गये। पूछताछ में सामने आया कि मनीष सिंह का गैंगवार में मारा गया हिस्टीशीटर अभिषेक सिंह प्रिंस से संबन्ध रहा। मनीष असलहा तस्कर है और ये बिहार से असलहा लाकर वाराणसी समेत अन्य जगहों पर सप्लाई देता है। इसके पास से नौ कारतूस बरामद किया गया, पुलिस रिमांड पर लेकर इससे पूछताछ करेगी। हत्या की योजना एक मई को बनी। इसके पहले असलहा की जरूरत थी ऐसे में मनीष सिंह से संपर्क साधा, मनीष रामजी दूबे के पुराने मामले का वकील था और उस पर मुकदमें दर्ज हैं। उसके इसरार पर उसने असलहा मुहैया कर दिया।
इसके बदले कु छ पैसे लिया। योजना के तहत 30 की रात प्रभात और नसीम को किराये के मकान में रुकवाया, सुबह दोनों को पिस्टल देकर अफजल और नदीम के साथ एक आॅटो में बैठाया। इसके बाद डीएवी पहुंचे और यहां प्रभात और नसीम ने तीन गोली मारी, जिसमें एक गोली रामलाल को लगी। गोली मारने के बाद उसी आॅटो से सभी भागे। अफजल की गिरफ्तारी के बाद, हमसभी को गिरफ्तारी का डर सताने लगा। ऐसे में एकजुट होकर शहर से बाहर निकलने के लिए शिवपुर बाइपास तक पहुंचे ही थे कि पुलिस ने दबोच लिया।



