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महिला आरक्षण विधेयक 2026 लोकसभा में अटका, दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला

  • 298 समर्थन, 230 विरोध; परिसीमन और सीट वृद्धि प्रस्ताव भी फिलहाल ठंडे बस्ते में

नयी दिल्ली : विधायिका में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में जरूरी दो तिहाई बहुमत नहीं मिलने की वजह से शुक्रवार को पारित नहीं हो पाया।इस संशोधन विधेयक पर दो दिन की चर्चा और उस पर गृहमंत्री अमित शाह के जवाब के बाद कराये गये मत विभाजन में विधेयक के समर्थन में 298 और विरोध में 230 मत पड़े। अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार विधेयक को उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई बहुमत का समर्थन नहीं मिला है, इस तरह यह विधेयक पारित नहीं हो पाया है।

विधेयक के पारित नहीं होने के बाद संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के मद्देनजर वह परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश विधियां (संशोधन) विधेयक को आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करवाने का ऐतिहासिक अवसर विपक्ष ने गंवा दिया है। सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रयास जारी रखेगी।सरकार ने 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने के लिए संविधान में 131वां संशोधन विधेयक 2026 के साथ-साथ 2011 की जनसंख्या के आधार पर सीटों के परिसीमन के लिए परिसीमन विधेयक और इनसे संबंधित प्रावधानों को पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर- विधानसभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने का प्रस्ताव किया था।

सरकार ने लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ाने और 2029 के आम चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन 2011 की जनसंख्या के आधार कराने का प्रस्ताव किया था। लोक सभा में वर्तमान सीटों की स्वीकृत संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।चर्चा में विपक्ष ने सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए विधेयक लाने का आराेप लगाया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सभी लोकसभा सीटों का अपने फायदे के लिए परिसीमन करवा रही है। विपक्ष के कई सदस्यों ने कहा कि परिसीमन से उत्तर के राज्यों की सीटें बढ़ेगी और दक्षिण के राज्यों का लोक सभा में प्रतिनिधित्व कम होगा।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण लागू करने के प्रस्ताव पर ‘किंतु- परंतु’ लगा रहा है, लेकिन उसका असली मकसद विधायिका में महिलाओं के आरक्षण का विरोध करना है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अगर चाहता है तो वह ये कानूनी प्रावधान लाने को तैयार हैं कि सभी राज्यों में लोकसभा की सीटें 50 प्रतिशत बढ़ायी जायेंगी।श्री शाह ने कहा कि कांग्रेस ने 2023 में महिला आरक्षण का समर्थन इसलिए किया था, क्योंकि उसे 2024 के आम चुनाव में महिलाओं के विरोध का डर था। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में मातृशक्ति के आक्रोश के आगे विपक्ष को भागने का रास्ता नहीं मिलेगा।

परिसीमन के बहाने महिला आरक्षण का विरोध कर रहा विपक्ष : शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में शुक्रवार को कहा कि विपक्ष परिसीमन के बहाने महिला आरक्षण का विरोध कर रही है।श्री शाह ने संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, और उससे जुड़े दो अन्य विधेयकों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पूरी चर्चा में विपक्षी दलों ने घुमा फिराकर महिला आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह तरीकों का विरोध नहीं महिला आरक्षण का विरोध है। इस तीन विधायक में सरकार का उद्देश्य है महिला सशक्तिकरण करने वाले सुधार को समयबद्ध तरीके से कराकर 2029 के चुनाव में इसका इंप्लीमेंट किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सदन में विरोध करने वाले लोग बता सकते हैं कि 39 लाख लोग जिस संसदीय क्षेत्र में है क्या एक सांसद उनकी समस्याओं का समुचित समाधान कर सकता है। संतुलित समावेशी और व्यावहारिक ढांचा तयार करने की जिम्मेदारी मोदी सरकार को मिली है। संघीय संतुलन बनाना और राज्यों के बीच शक्तियों का संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।गृह मंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण संतुलित संघीय ढांचे के निर्माण के लिए यह विधेयक लाया गया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के इम्प्लीमेंटेशन के लिए विधेयक लाना आवश्यक हो गया। उन्होंने कहा कि 127 सीटें ऐसी है जहाँ बीस लाख मतदाता है कहीं पर चालीस लाख मतदाता है जिससे मतों का मूल्य एकसमान नहीं हो पता है। कांग्रेस पार्टी ने पहले भी देश की जानता को परिसीमन से वंचित रखा था और आज परिसीमन से वंचित रखना चाहती है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग सब समझ रहे हैं कि देश की आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए विधेयक लाया गया है लेकिन वे जानबूझकर इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोते को जगाया जा सकता है लेकिन जो सोने का नाटक करे तो उसे कैसे जगाया जा एकता है। उन्होंने कहा कि हर राज्य की सीटों का पचास प्रतिशत बढ़ा रहे हैं। इससे किसी भी राज्य में लोकसभा की सीटें कम नहीं होगी।गृह मंत्री ने कहा, ” हम जाति जनगणना करायेंगे। मैं सदन को आश्वस्त करता हूँ कि जनगणना में जाति की भी गणना होगी। उन्होंने कहा कि इसमें किसी को संशय करने की आवश्यकता नहीं हैं। विपक्ष हमें उलझना चाहते है उनको जाति जनगणना से कोई लेना देना नहीं है।

“उन्होंने कहा कि विपक्ष भ्रांति फैला रहा कि जाति जनगणना को टालने के लिए विधेयक लाया गया जो पूरी तरह बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों का उतना अधिकार है उतना ही दूसरे इलाके का है। देश को उत्तर दक्षिण में नहीं बाँटना चाहिए। हम उत्तर दक्षिण का भेद नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि भ्रम फैलाने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा बाल सफेद हो जाएगा सत्ता में नहीं आ सकेंगे।उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अब तक एक भी ओबीसी को प्रधानमंत्री नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ओबीसी आयोग बनाया। कांग्रेस सिर्फ ओबीसी की बात करती है लेकिन मोदी सरकार ने वास्तव में ओबीसी के लिए काम किया है।उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कई बार सदन में आया और उसे पारित नहीं किया गया।

कांग्रेस पार्टी की समर्थक पार्टी ने महिला आरक्षण का विरोध किया इसका मतलब सरकार के इशारे पर विरोध किया गया यानी वह महिला आरक्षण लाना नहीं चाहते थे। पहली बार मोदी सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित किया गया। विपक्ष आज यहाँ महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है उसको चुनाव में महिलायें जवाब देगी।उन्होंने कहा कि पहले जिन्होंने महिला आरक्षण को पारित नहीं किया है वही आज भी इसके पारित होने में किंतु परंतु लगाकर रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह साल में महिलाओं का जीवन सुचारू रूप से चलाने के लिए पंद्रह करोड़ घर को नल से जल दिया गया। हमारी सरकार ने जेंडर बजटिंग में पाँच लाख करोड़ का प्रावधान कर रिकॉर्ड बनाया है। हम महिला को आरक्षण देने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।(वार्ता)

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