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महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान: किसी राज्य या दल को नहीं होगा नुकसान

नई दिल्ली में लोकसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे किसी राज्य या राजनीतिक दल को नुकसान नहीं होगा और पुरुषों की सीटें भी कम नहीं होंगी। पीएम ने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखें। उन्होंने चेतावनी दी कि जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

  • लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री-‘नारी शक्ति सब देख रही है, विरोध करने वालों को चुनाव में चुकानी पड़ेगी कीमत’

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोक सभा में कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने से किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा और जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें चुनावों में खामियाजा भुगतना पड़ेगा।श्री मोदी ने आश्वासन दिया कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने से न तो पुरुषों के लिए सीटें कम होंगी और न ही किसी राज्य को सीटों के लिहाज से कोई नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि वह सदन में ‘गारंटी’ देने का तैयार हैं कि किसी दल या राज्य को इससे कोई नुकसान नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि देश की महिलायें सब देख रही हैं और जो दल महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने का विरोध करेंगे, उन्हें चुनावों में इसका नुकसान उठाना ही पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ” मैं जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि दक्षिण, उत्तर, पूरब हो या छोटे-बड़े राज्य हों, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भेदभनहीं करेगी। किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। वह गारंटी देते हैं कि किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। वह इसका वादा करते हैं।”उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि ‘गारंटी’ के लिए तमिल भाषा में कोई शब्द हो तो वह उसे भी यहां बोलने के लिए तैयार हैं।

श्री मोदी ने परिसीमन विधेयक, 2026 संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर सदन में एक साथ हो रही चर्चा के दौरान कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने में पहले ही बहुत देरी हो चुकी है और अब यह क्षण आये हैं, जो राजनीतिक दल तकनीकी और अन्य बहानों से इसका विरोध करेंगे, उनका चुनावों में नुकसान होना तय है।उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने हालांकि इसका सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है लेकिन सदन में विभिन्न कारण पेश करते हुए इसका समर्थन नहीं करते। वे चुनावों में हालांकि इसका खामियाजा भी भुगतते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 2023 में नारी वंदन विधेयक जब सदन में लाया गया तो सभी दलों ने इसका समर्थन किया, जिससे 2024 के आम चुनावों के दौरान यह मुद्दा-विषय ही नहीं बना। श्री मोदी ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने देखा है कि महिलाएं जिन-जिन क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका में रहीं, वहां बेहतर काम हुए।उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने से लाखों महिलायें नेता बन चुकी हैं। उन्हें अब और आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है। जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि एक बार महिलाओं को लोक सभा और विधानसभा में आने तो दीजिए, वे निर्णय करेंगी कि आगे क्या करना है।

उन्होंने कहा कि नारी शक्ति देश का गौरव बढ़ाने वाली है। वह विपक्षी दलों से अपील करते हैं कि इस विषय को राजनीति के तराजू से न तौलिए। उन्होंने कहा, ” नारी शक्ति हमारे निर्णय देखेगी, निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत देखेगी। यदि इसका विरोध करते हैं, तो नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी। यह समय की मांग है, ज्यादा विलंब न करें। “श्री मोदी ने कहा कि जब नीयत साफ हो तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ” हम भ्रम में न रहें, हम अहंकार में न रहें। नारी शक्ति देख रही है। उसका हक है, हमने कई दशक तक उसे रोककर रखा है। इससे प्रायश्चित करके, उससे मुक्ति का यह समय है।

“उन्होंने कहा, ” बहानेबाजी और तकनीकी बातों काे अब छोड़ दें, तीन दशक तक हम इसे नहीं कर पाये, अब तो करें। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए। सर्वसम्मति से इसे पारित करें। नारी शक्ति की राष्ट्र के विकास में सहभागिता सुनिश्चित करें। हम आग्रह करते हैं कि सर्वसम्मति से इस पर आगे बढ़ें। हम इसे राजनीतिक तराजू में न तौलें। इसे पारित करने से अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और किसी का हक नहीं मारा जायेगा।”(वार्ता)

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