
वाराणसी। विशेष न्यायाधीश ( एससीएसटी) रश्मि नंदा की कोर्ट ने 26 साल पुराने बेदहा चकिया के ग्राम प्रधान छांगुर राम को बालू ठेका के विवाद में हत्या करने के मामले में आरोपी बलवंत सिंह को साक्ष्य के आरोपी में बरी कर दिया। जबकि एक आरोपी चिरकुट सिंह की पहले ही मौत हो गई गई है। अन्य आरोपितों को पत्रावली अलग लंबित है। अदालत में आरोपी की ओर से अधिवक्ता अजय गेठे ने पैरवी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार टोरी शाहबगंज वादी छब्बू राम ने तीन नवंबर 1997 को चकिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उसका भाई छांगुर राम बेदहा गांव के प्रधान थे। उनका बालू का ठेका भी था। उक्त ठेका को गांव के ही बलवन्त सिंह और उनके परिवार के लोग हटाकर लेना चाहते थे। गांव के पुलिया पर गए छांगुर राम को बलवंत सिंह और चिरकुट सिंह आदि ने इस मुद्दे पर बात करने के लिए धरौली जीप में बैठाकर साथ ले गए। इकसे बाद सूचना मिली कि गांधीनगर गांव के जंगल में पेड़ पर छांगुर की लाश लटकी मिली। आरोप लगाया आरोपी गण ने छांगुर की हत्या कर उसे पेड़ पर लटका दिया। पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों के सुनने के बाद आरोपी को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।



