
देवरिया । मईल थाना क्षेत्र में मंगलवार को हुए मार्ग दुर्घटना में घायल उपनिरीक्षक की मौत हो गई। मुख्य आरक्षी की हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया है।गाजीपुर जिले के थाना यूसूफपुर मोहम्मदाबाद बलू वाटपा कटउत अर्फ हरिरपुर के वाले रमा शंकर सिंह यादव (45) पुत्र नरसिंह जो बरहज थाना के गौरा चौकी में उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे।
मंगलवार को वह मुख्य आरक्षी अजय कुमार सिंह (50) के साथ बाइक से कही जा रहे थे। जो अभी राम-जानकी मार्ग पर तेलिया कला के पास पहुंचे ही थे कि सड़क हादसे में दोनों घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उप निरीक्षक रामाशंकर को मृत घोषित कर दिया। मुख्य आरक्षी की हालत नाजुक होने पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
घटना की जानकारी पर पुलिस के अधिकारी और प्रशासनिक अफसर अस्पताल पहुंचे। घटना की सूचना परिवार के लोगों को दी। घटना की सूचना पर पत्नी कविता और बच्चे हिमांशु और बिट्टू का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मंदिर का निमार्ण कराया था गांव में
दरोगा रामा शंकर सिंह यादव अपने गांव में एक वर्ष पहले हनुमान जी के साथ अन्य देवी देवताओं का भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। जहां बीते दिन अपने भाई को सजावट के लिए 25 रुपये खाते में भेजकर दिवाली में मंदिर को सजवाए थे।
पीएसी में पुलिस की नौकरी के बाद दरोगा की नौकरी पाई
दरोगा रामा शंकर सिंह यादव जो पीएसी (1997) में कॉन्स्टेबल के पद पर चयन हुआ था। उसके बाद से अर्थ प्रयास के बाद से 1996 में यूपी पुलिस में दरोगा की नौकरी पाई थी। मां बकरी पाल कर पढ़ाई का खर्च उठाती थी, पिता खेत में हाड़-तोड़ मेहनत करते थे। दरोगा रामा शंकर के पिता नरसिंह जो एक किसान थे। उनके तीन पुत्र राम जी जो इस वक्त रिटायर जनरल मैनेजर के पद से हुए हैं। दूसरे नम्बर पर दरोगा रामा शंकर सिंह यादव और तीसरे नम्बर पर किसान रामभजन जो अपने पिता के पद चिन्हो पर चलने लगे।
एक वक्त ऐसा था कि आर्थिक स्थिति खराब होने पर मां हाड़-तोड़ मेहनत करती थी और पिता खेतों में मेहनत करने के बाद परिवार का किसी तरह पेट भरता था। वहीं अच्छे रुपये न होने पर मां मनवासी देवी जो किसी तरह रुपये इक्ट्ठा कर एक बकरी खरीद कर पालन करने लगी। समय पर रुपये की जरूत पड़ने पर बकरी को बेच देती थी। उस रुपये से सयम के साथ तीनों बच्चे आगे जाने लगे। दो बेटे अच्छे पद पर निकल गए। वहीं समय के आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी। अपने तीनों बच्चों को शादी भी धूमधाम से किया।
दो वर्ष पहले मां 80 वर्ष की आयु में बीमारी के कारण अपने परिवार को छोड़ कर दुनिया से अलविदा हो गई। वहीं पिता गांव में रहते हैं।दरोगा रामा शंकर बरहज थाने में गौरा चैकी के इचार्ज के पद पर तैनात थे। जो दिवाली में छूटी न मिलने पर अपने गांव आज पहुंचने की बात अपने भाई रामभजन से मोबाइल पर कहीं थी। यह बात कह कर राम भजन फूट फूट कर रोने लगा।(हि.स.)



