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स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दरबार में लगातार दूसरे दिन श्रद्धालुओं की लगी कतार

वाराणसी । काशीपुराधिपति की नगरी लगातार दूसरे दिन सोमवार को भी स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के भक्ति में लीन रही। मंदिर में भोर से ही माता रानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। लोग माता रानी के दरबार से अन्न धन का खजाना पाकर आह्लादित दिखे। श्रद्धालु उत्साहपूर्वक देवी अन्नपूर्णा के दरबार से खजाना पाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सुबह में एक लाइन गोदौलिया से आगे दशाश्वमेध तो दूसरी लाइन चौक थाने से आगे पहुंच गई। ढुंढिराज गणेश के रास्ते से श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा था। मां अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन का यह क्रम अन्नकूट यानी 26 अक्टूबर तक जारी रहेगा।

देवी अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि यह देश का इकलौता मंदिर है जो श्रीयंत्र के आकार का है। यह हिंदुस्तान का एक अकेला मंदिर है जहां माता अन्नपूर्णेश्वरी देवी, माता भूमि देवी और माता लक्ष्मी देवी एक साथ स्वर्णमयी स्वरूप में विराजमान हैं। उनके पास ही भोलेनाथ की चांदी की प्रतिमा है। साल में सिर्फ चार दिनों के लिए माता अन्नपूर्णा के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि काशी नगरी के पालन-पोषण के लिए देवाधिदेव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मंदिर के गर्भगृह में मां अन्नपूर्णा की ममतामयी छवियुक्त ठोस स्वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान और रजत शिल्प में ढले भगवान शिव की झोली में अन्नदान की मुद्रा में हैं। दायीं ओर मां लक्ष्मी और बायीं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है।

मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देख सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद बनाने के लिए पुलिस अफसर चौकस दिखे। पूर्वाह में अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय एवं अपराध/कानून व्यवस्था संतोष सिंह, सहायक पुलिस आयुक्त(एसीपी) दशाश्वमेध अवधेश पांडेय ने मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अफसरों ने ड्यूटी में तैनात पुलिस अफसरों और जवानों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिया। उधर,श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित माता अन्नपूर्णा के मंदिर से भी लगातार दूसरे दिन खजाना का वितरण हुआ।

श्रद्धालु दरबार में दर्शन पूजन के लिए पहुंचते रहे। बाबा की मंगला आरती के बाद भोर में माता अन्नपूर्णा की भी विधि विधान से आरती हुई। विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने पहले दिन धनतेरस को मातारानी का पूजन किया। आचार्य राजेश पाठक, पं. अमरनाथ, बाबू महाराज आदि ने मां की आरती की। इसके बाद माता के दर्शन के लिए पट खोल दिया गया। भक्तों को शृंगारित स्वर्ण प्रतिमा के साथ विभिन्न झांकियों के भी दर्शन मिल रहे है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा की देखरेख में श्रद्धालुओं को लावा और सिक्का वितरित किया जा रहा है।(हि.स.)

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