पदयात्रा में बिना रुके, बिना थके महिलाओं ने दिखाया सपा, कांग्रेस को आईना
लखनऊ में नारी शक्ति वंदन विधेयक गिरने के विरोध में हजारों महिलाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जन आक्रोश पदयात्रा निकाली। मुख्यमंत्री आवास से विधानसभा तक निकली इस पदयात्रा में महिलाओं ने सपा और कांग्रेस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। महिला नेताओं ने विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया। तेज धूप के बावजूद भारी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया और आगामी चुनावों को लेकर चेतावनी भी दी।
लखनऊ : नारी शक्ति वंदन विधेयक को गिराने पर राजधानी लखनऊ में महिलाओं की विशाल आक्रोश पदयात्रा आयोजित हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हजारों महिलाएं मुख्यमंत्री आवास (5 कालीदास मार्ग) से विधानसभा तक पैदल चलकर गईं और सपा-कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष के खिलाफ रोष व्यक्त किया। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार की कई महिला मंत्रियों समेत अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। उन्होंने इंडी गठबंधन को महिला विरोधी बताया। मुख्यमंत्री आवास पर हजारों महिलाएं जन आक्रोश महिला पदयात्रा में शामिल हुईं। इस दौरान उन्हें महिला नेताओं ने संबोधित किया और सपा-कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता को आगामी चुनावों में याद रखने के लिए कहा।
शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि सपा और कांग्रेस की सोच मेढक जैसी है। ये सब अगर कूदेंगे तो नाले में ही गिरेंगे। विपक्ष की मानसिकता को महिलाएं पहचान लें। विधेयक गिराए जाने से देशभर में महिलाएं आक्रोश में हैं, ये आक्रोश पंचायत, विधानसभा और लोकसभा तक दिखना चाहिए। महिलाओं को अपनी लड़ाई जारी रखनी होगी। 2027 और 2029 में फिर भाजपा की सरकारें बनानी होगी।
महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि विधेयक को गिराने के वक्त संसद में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, सपा सांसद डिम्पल यादव भी बैठी थीं। विपक्ष की महिला सांसदों ने टेबल थपथपा कर खुशी जाहिर की थी, जबकि उन्हें दुखी होना चाहिए था। उन्होंने महिलाओं से अपने अपमान का बदला लेने को कहा। पूर्व भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी महिला सशक्तीकरण के लिए विधेयक लाए थे। हालांकि विपक्ष ने महिला विरोधी मानसिकता के चलते इसे रोकने का काम किया। महिलाएं एकजुट होकर विपक्ष को अपनी ताकत का एहसास कराएं।
इस पदयात्रा के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री ओम प्रकाश राजभर, आशीष पटेल, एके शर्मा, अनिल कुमार, रजनी तिवारी, प्रतिभा शुक्ला, विजय लक्ष्मी गौतम, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद गीता शाक्य, विधायक जय देवी, अदिति सिंह, आशा मौर्य, महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, चारू चौधरी, राज्य महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष कमलावती सिंह भी मौजूद थीं।
पदयात्रा में बिना रुके, बिना थके महिलाओं ने दिखाया सपा, कांग्रेस को आईना
नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लोकसभा में गिराने के खिलाफ राजधानी लखनऊ में महिलाओं का भारी आक्रोश देखने को मिला। मंगलवार सुबह 7 बजे से ही हजारों महिलाओं का 5 कालिदास मार्ग (मुख्यमंत्री आवास) पर पहुंचना शुरू हो गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, सूरज की तपिश बढ़ती गई, लेकिन महिलाओं में धधकता आक्रोश कम नहीं हुआ। हाथों में सपा-कांग्रेस के खिलाफ पोस्टर लिए वे सीएम योगी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार दिखीं।
मुख्यमंत्री आवास पहुंची महिलाएं विपक्ष को करारा जवाब देने के लिए कई तरह के पोस्टर-बैनर लिए थीं। इन पोस्टरों पर कांग्रेस व सपा पर महिला विरोधी होने और महिला आरक्षण पर विश्वासघात से संबंधित संदेश लिखे हुए थे। पदयात्रा शुरू होने से पहले ही सीएम आवास के बाहर हजारों महिलाओं का हुजूम एकत्र हो चुका था। इस दौरान मंच से तमाम नेता व मंत्रीगण महिलाओं की इस शक्ति को नमन करते रहे।
सुबह करीब 9 बजे जैसे ही मंत्रियों ने महिलाओं को संबोधित करना शुरू किया, आक्रोशित बहन-बेटियों ने पोस्टर लहराने शुरू कर दिए। इन पोस्टरों में ‘सपा की पहचान नारी शक्ति का अपमान’, ‘महिला आरक्षण पर घटिया राजनीति सपाइयों की रही है पुरानी नीति’, ‘230 सांसदों का विरोध किसके खिलाफ’, जैसे नारों के जरिए महिलाओं ने विपक्ष के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया।
सीएम योगी को देखते ही बढ़ा उत्साह
करीब 9.40 बजे मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचते ही वहां मौजूद महिलाओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार के पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए। महिलाओं ने सीएम योगी के सामने ही सपा-कांग्रेस का यूपी में भविष्य खत्म करने का वादा किया। उन्होंने अपने नारों के जरिए कहा कि आधी आबादी के आरक्षण का विरोध विपक्ष की राजनीति को खत्म कर देगा। सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लगभग 10 बजे हजारों महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास से जन आक्रोश पदयात्रा शुरू की। तपती धूप में सड़क पर पैदल चल रहे मुख्यमंत्री, उनके मंत्रियों और हजारों महिलाओं को देखकर सारा शहर थम गया। इस दौरान सिविल अस्पताल के सामने से विधानसभा की तरफ जा रहीं महिलाओं के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथ लहराकर पदयात्रा में शामिल सभी महिलाओं का अभिवादन किया।
पूरी यात्रा में पैदल चले सीएम योगी
अपनी सुरक्षा की परवाह किए बगैर मुख्यमंत्री ने पूरी यात्रा पैदल चलकर पूरी की। पूरी तरह अनुशासन इस पदयात्रा के मार्ग पर सुरक्षाकर्मियों या शासन-प्रशासन के अधिकारियों की तैनाती से कहीं ज्यादा महिलाओं की भागीदारी दिखी। पदयात्रा मार्ग के दोनों तरफ मौजूद लोग अपने मुख्यमंत्री को सड़क पर पैदल चलता देखकर उनके समर्थन में नारे लगा रहे थे।विधानसभा भवन के सामने पदयात्रा के समापन पर सीएम योगी ने सभी महिलाओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि विधेयक गिराने वाले विपक्ष के खिलाफ उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं में आक्रोश है। लखनऊ की इस जन आक्रोश पदयात्रा में भाग लेने वाली बहनों का हद्य से अभिनंदन करता हूं।
नारी शक्ति का अपमान अब बर्दाश्त नहीं
हरदोई से पदयात्रा में शामिल होने आईं बबिता ने कहा कि नारी शक्ति का अपमान अब नहीं बर्दाश्त किया जाएगा। हमें आरक्षण के रूप में अपने लिए न्याय चाहिए। इसके लिए योगी सरकार के नेतृत्व में सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ी जाएगी। लखनऊ की कीर्ति ने कहा कि क्या सिर्फ एक-दो पार्टी के परिवार की महिलाओं को ही राजनीति में आने का हक है। आज सबको समान अवसर देने की बारी आ चुकी है। विपक्ष ने विधेयक को गिराकर राजनीति में महिलाओं के लिए रास्ते बंद करने का काम किया है।
बाराबंकी से आईं कांता देवी ने कहा कि महिला आरक्षण की बात सुनकर बहुत खुशी हुई थी। लेकिन, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने इसे रोक दिया। यूपी में पहले ही कांग्रेस का भविष्य खत्म हो चुका है, अब सपा की बारी है। आधी आबादी का हक मारकर कोई भी चुनाव नहीं जीत सकता। उन्नाव की सविता ने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के हक के बारे में सोचती है। दूसरी तरफ विपक्ष सिर्फ वोट लेने के लिए महिला सम्मान की झूठी बातें करता है। समय आ गया है कि उन्हें सबक सिखाया जाए। अयोध्या से आई छात्रा वैशाली ने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी हो गया है। भाजपा इसका समर्थन कर रही है, तो उसको महिला वर्ग का भरपूर साथ मिल रहा है। दूसरी तरफ सपा-कांग्रेस जैसे दलों को विधेयक के विरोध का नुकसान तो उठाना ही पड़ेगा।
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