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यूरिया सब्सिडी इस वर्ष दो लाख करोड़ रुपए से अधिक हो सकती हैः मोदी

अहमदाबाद : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को उर्वरकों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल के आघात से बचाने के लिए चालू वित्त वर्ष 2021-22 में दो लाख करोड़ रुपए से अधिक की सब्सिडी देनी पड़ सकती है।उन्होंने गुजरात के गांधीनगर में विश्व के पहले नैनो (तरल) उर्वरक कारखाने का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार इस समय प्रति बोरी यूरिया पर 3,200 रुपए और डाय अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) उर्वरक पर 2,530 रुपए की सब्सिडी दे रही है। कार्यक्रम को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में देशभर में इफको के केंद्र पर लाखों लोगों ने ऑनलाइन भाग लिया।

श्री मोदी ने कहा,“ भारत विदेशों से जो यूरिया मंगाता है इसमें यूरिया का 50 किलोग्राम का एक बैग 3,500 रुपये का पड़ता है, लेकिन देश में, किसान को वही यूरिया का बैग सिर्फ 300 रुपये का दिया जाता है। यानी यूरिया के एक बैग पर हमारी सरकार 3,200 रुपये का भार वहन करती है।”उन्होंने कहा कि इसी तरह डीएपी पर पिछले 12 महीने में सरकरी सहायता करीब पांच गुना बढ़ाकर 2530 रुपए तक पहुंच गयी है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,“ किसानों के प्रति संवेदनशील हमारी सरकार ने निर्णय किया कि हम सारी मुसीबत सह लेंगे लेकिन किसानों पर इसका असर नहीं पड़ने देंगे।”उन्होंने कहा, “देश के किसान को दिक्कत न हो इसके लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल 1.60 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी फर्टिलाइजर के क्षेत्र में दी है। किसानों को मिलने वाली ये राहत इस साल दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने वाली है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो साल कोरोना संक्रमण के कारण वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमत बढ़ गयी थी और उसके बाद युद्ध (रूस-यूक्रेन) आ धमका और कीमतें उससे भी कई गुना बढ़ गयीं और उपलब्धता घट गयी।

श्री मोदी ने कहा,“ किसानों के प्रति संवेदनशील हमारी सरकार ने निर्णय किया कि हम सारी मुसीबत सह लेंगे लेकिन किसानों पर इसका असर नहीं पड़ने देंगे। ”उन्होंने कहा, “आज आत्मनिर्भर कृषि के लिए देश पहले नैनो यूरिया लिक्विड प्लांट का उद्घाटन करते हुए मैं विशेष आनंद की अनुभूति करता हूं। अब यूरिया की एक बोरी की जितनी ताकत है, वह एक बोतल में समाहित है। नैनो यूरिया की करीब आधा लीटर बोतल, किसान की एक बोरी यूरिया की जरूरत को पूरा करेगी।”उन्होंने कहा कि अब एक किसान यूरिया की आधी लीटर की बोतल अपनी जेब में रखकर बाजार से घर आ सकता है और इससे किसानों के परिवहन खर्च बचेगा। उन्होंने कहा कि कलोल में तरल यूरिया का पहला कारखाना खुला है। सहकारी उर्वरक कंपनी इफको द्वारा स्थापित इस कारखाने की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 500 मिलीलीटर की 1.5 लाख बोतल नैनो यूरिया बनाने की है।श्री मोदी ने कहा कि देश में ऐसे कुल और आठ नैनो यूरिया कारखाने स्थापित करने की योजना है।

उन्होंने कहा, “सात-आठ साल पहले तक हमारे यहां ज्यादातर यूरिया खेत में जाने के बजाए, कालाबाजारी का शिकार हो जाता था और किसान अपनी जरूरत के लिए लाठियां खाने को मजबूर हो जाता था। हमारे यहां बड़ी कारखानें भी नई तकनीक के अभाव में बंद हो गई। ”श्री मोदी ने कहा कि 2014 में केंद्र में उनकी सरकार बनने के बाद देश में यूरिया की शत-प्रतिशत नीम कोटिंग का काम किया गया। इससे देश के किसानों को पर्याप्त यूरिया मिलना सुनिश्चित हुआ। उन्होंने कहा, “साथ ही हमने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना में पांच बंद पड़े खाद कारखानों को फिर चालू करने का काम शुरू किया।”प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के कारखानों को फिर से चालू कर दिया गया है, बाकी तीन जल्द शुरू हो जाएंगे।उन्होंने कहा कि पहले की सरकार में समस्याओं का सिर्फ तात्कालिक समाधान ही तलाशा गया। आगे वो समस्या न आए, इसके सीमित प्रयास ही किए गए। बीते आठ वर्षों में हमने तात्कालिक उपाय भी किए हैं और समस्याओं के स्थायी समाधान भी खोजे हैं।

श्री मोदी ने इस अवसर पर आयातित महंगी यूरिया पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाशने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दूसरे नैनो उर्वरकों पर भी काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि किसानों को यूरिया के अलावा अन्य उर्वरक भी इस रूप में प्राप्त हो सकेंगे।गांधीनगर में सहकारिता पर आयोजित कार्यक्रम के मंच से इफको के कलोल परिसर में स्थापित नैनो यूरिया संयंत्र के उद्घाटन करने के बाद श्री मोदी ने कार्यक्रम से जुड़े लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत उर्वरकों के मामलों में आयात पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। देश को अपनी जरूरत की एक चौथाई यूरिया आयात करनी पड़ती है। पोटाश और फासफेट पर हम शत-प्रतिशत आयात पर निर्भर हैं।श्री मोदी ने साथ में यह सवाल भी किया कि क्या विदेश से आऩे वाले महंगे उर्वरकों पर भारतीय किसानों की निर्भरता को दूर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “ क्या महंगे उर्वरकों का कोई समाधान नहीं होना चाहिए? ”प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सवाल आज नहीं पिछली सरकार के सामने भी था, लेकिन हमने इस सवाल को गंभीरता से लिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार इस समय जो देश प्राकृतिक खेती के तरीके अपनाने पर जोर दे रहे हैं, वही समाधान का एक हिस्सा हो सकता है।प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के अपनी सरकार के मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि सहकारिता भी आत्मनिर्भता का एक सशक्त मॉडल है।श्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता में भारत की अनेक मुश्किलों का हल है। आत्मनिर्भरता का एक बेहतरीन मॉडल, सहकार है। ये हमने गुजरात में बहुत सफलता के साथ अनुभव किया है और आप सभी साथी इस सफलता के सेनानी हैं।उन्होंने कहा,“डेयरी क्षेत्र के सहकारिता मॉडल का उदाहरण हमारे सामने है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, जिसमें गुजरात की बहुत बड़ी हिस्सेदारी है। बीते सालों में डेयरी सेक्टर तेजी से बढ़ भी रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान भी कर रहा है।”श्री मोदी ने कहा, “ सहकार की भावना को आजादी के अमृतकाल की भावना से जोड़ने के लिए हम निरंतर आगे बढ़ रहेहैं।

इसी उद्देश्य के साथ केंद्र में सहकारिता के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया। कोशिश यही है कि देश में सहकारिता आधारित आर्थिक मॉडल को प्रोत्साहित किया जाए। ”प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां जिसको भी छोटा समझकर कम आंका गया, उसको अमृतकाल में बड़ी ताकत बनाने पर हम काम कर रहे हैं। छोटे किसानों को आज हर प्रकार से सशक्त किया जा रहा है। इसी प्रकार लघु उद्योगों, सूक्ष्‍म एवं मझौले इकाइयों को भारत की आत्मनिर्भर सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनाया जा रहा है।(वार्ता)

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