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उज्जैनः भगवान महाकाल के साथ श्रद्धालुओं ने जमकर खेली होली

खूब उड़ा रंग-गुलाल, जयकारों से गूंजा मंदिर

उज्जैन । कोरोना से संबंधित प्रतिबंध समाप्त होने से करीब दो साल बाद इस बार श्रद्धालुओं ने उज्जैन में भगवान महाकाल के मंदिर में जमकर होली खेली। शुक्रवार तड़के चार बजे भस्मारती में भगवान को अबीर-गुलाल लगाकर पंडे-पुजारियों ने होली खेलने की शुरुआत की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के साथ जमकर होली खेली। महाकाल के आंगन में जमकर रंग-गुलाल उड़ा और पूरा मंदिर जयकारों से गूंज उठा।

उल्लेखनीय है कि देशभर में होली के त्योहार की शुरुआत उज्जैन में भगवान महाकाल के मंदिर से होती है। यहां सबसे पहले गुरुवार को महाकालेश्वर मंदिर में होली मनाई गई। शाम को यहां महाकाल के आंगन में होलिका दहन किया गया। इसके बाद सभी जगह होलिका दहन शुरू हो गया। भक्तों ने गुरुवार को रात में बाबा महाकाल के साथ होली खेली। यहां संध्या कालीन आरती में पंडे-पुजारियों ने महाकाल के साथ गुलाल और फूलों से होली खेली। आरती के दौरान पूरा परिसर गुलाल और रंगों से पट गया। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए हजारों की तादाद में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

इसके बाद शुक्रवार को अलसुबह भस्मारती में पुजारियों द्वारा बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर रंग पर्व मनाने की शुरुआत की गई। शुक्रवार तड़के से ही यहां अलग ही रंग बिखरने लगे थे। सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में पंडे-पुजारियों ने दही-दूध-शहद-जल से स्नान, पंचामृत कर भगवान महाकाल का अभिषेक किया। इसके बाद भगवान महाकाल का अलग-अलग अबीर से श्रृंगार किया। बाबा महाकाल के साथ होली खेलने के लिए अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल को अबीर-गुलाल अर्पित कर होली खेली। बीते दो वर्षों से कोरोना संक्रमण के चलते भगवान और भक्तों के बीच दूरी बनी हुई थी। इस दूरी को आज के होली उत्सव ने मिटा दिया। सुबह से शाम तक हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर गुलाल अर्पित किया।

गौरतलब है कि कि भगवान महाकाल के साथ होली खेलने के लिए भक्तों ने दो दिन पहले ही भस्म आरती की अनुमति ले ली थी। सभी ने भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल को कई तरह का भोग लगाया। गुरुवार देर रात से भक्तों की भीड़ मंदिर में उमड़ने लगी थी। लोग प्रसाद के साथ-साथ कई तरह के रंग भी लाए थे। लोगों के मन में बस ये आस थी कि किसी तरह बाबा महाकाल के दर्शन हों और वे उनके साथ होली खेलकर उनका आशीर्वाद लें।(हि.स.)

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