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वर्ष 2025 तक 150 बिलियन डॉलर होगी देश की बायोइकोनॉमी

भारत के मध्य में स्थित मध्य प्रदेश की राजधानी झीलों की नगरी भोपाल में चल रहा इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) काफी लोकप्रिय रहा है। इसकी सफलता के पीछे सरकार का महत्वपूर्ण योगदान है। सरकार के तमाम विभाग इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी अपनी भूमिका निभा रहे हैं ।इसी क्रम में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के फरीदाबाद स्थित क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (आरसीबी) की महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रख्यात इम्यूनोलॉजिस्ट एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफेसर सुधांशु व्रती आरसीबी के कार्यकारी निदेशक हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आपको वर्ष 2003 में सर्वोच्च भारतीय विज्ञान पुरस्कार “नेशनल बायोसाइंस अवार्ड फॉर करियर डेवलपमेंट’ से सम्मानित किया गया। प्रोफेसर व्रती ने कार्यक्रम से जुड़े कुछ विशेष पहलुओं पर बातचीत की।

साइंस फेस्टिवल की जरूरत और अवधारणा

आईआईएसएफ-2022 के दौरान प्रोफेसर व्रति से हुई बातचीत में देश में साइंस फेस्टिवल कार्यक्रमों की जरूरत और उसकी मूल अवधारणा पर उन्होने बताया कि पिछ्ले दो दिन से साफ देखा जा सकता है कि विद्यार्थियों और नौजवानों में साइंस फेस्टिवल को लेकर कितना उत्साह है। कितनी बड़ी संख्या में लोग महोत्सव में शामिल हो रहे हैं और विज्ञान से जुड़ रहे है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को घर घर तक पहुंचाना, विज्ञान को आम जनता से रूबरू कराना ही इसकी मूल अवधारणा है, जिससे कि विशेषकर विद्यार्थियों और नौजवानों को रुचि इस क्षेत्र में जागे।

चुनौतियां

आईआईएसएफ जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में होने वाली चुनौतियों पर प्रोफेसर बताते हैं कि आयोजन में 15 कार्यक्रम समानांतर रूप से चल रहे हैं। इतने बड़े कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए बहुत बड़ी टीम की जरूरत होती है। अच्छी बात ये है कि विज्ञान प्रसार और विभा इस कार्यक्रम को आयोजित करने, रूपरेखा बनाने और इसका प्रचार-प्रसार करने में हमारी मदद कर रहे हैं। सबसे मुख्य चुनौती थी , समय का अभाव। अगर ज्यादा समय मिला होता तो हम कार्यक्रमों को और बेहतर तरीके से आयोजित कर पाते। लेकिन, अभी भी सभी कार्यक्रम बहुत अच्छे तरीके से हो रहे हैं। विद्यार्थी और युवा इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

विज्ञान के प्रति रुचि

कार्यक्रम के निर्धारित लक्ष्य को पूर्ति में प्रतिदिन फेस-टू-फेस कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों की ही संख्या तीन हजार तक देखने को मिलती हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि उनमें विज्ञान के प्रति रुचि है। हम उस रुचि को और जागृत करने में सफल हो रहे हैं। हमारा मुख्य लक्ष्य तो साइंस फेस्टिवल के माध्यम से युवाओं और बच्चों में इसके प्रति जागरूकता और रुचि पैदा करना ही रहा है।

अर्थव्यवस्था में बायोटेक्नोलॉजी

देश के विकास के लिए अर्थव्यवस्था को बढ़ाना बहुत जरूरी है। बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर, जिसको अब हम बायोइकनॉमी के नाम से जानते हैं, वो पिछले छह-सात वर्षों से बहुत तेजी से बढ़ा है। अभी बायोइकनॉमी तकरीबन 80 बिलियन डॉलर की है। वर्ष 2025 तक उम्मीद हैं कि यह बढ़कर 150 बिलियन डॉलर हो जाए और प्रोफेसर व्रती के अनुसार 2047 तक आराम से एक हजार बिलियन डॉलर हो जाएगी।

लक्ष्य 2047

यह प्रधानमंत्री जी के लक्ष्य 2047 के लिए एक बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री द्वारा अगले 25 साल, 2047 तक को अमृतकाल घोषित किया है। उनके अनुसार अगले आने वाले 25 वर्षों में हमारे देश में जो काम होना है, वह देश के लिए अमृत के समान सिद्ध होना चाहिए। जिससे कि हम एडवांस इकनॉमी के रूप में उभरे और देश वैश्विक स्तर पर विकसित हो।

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