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शाह ने सोमनाथ मंदिर में दर्शन कर मोबाइल एप लांच किया

गीर सोमनाथ : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात में सोमनाथ मंदिर में दर्शन किए और ट्रस्ट द्वारा संशोधित एक आधुनिक मोबाइल एप भी लांच किया।श्री शाह ने आज यहां सोमनाथ महादेव के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर जलाभिषेक किया। उनकी पत्नी और पोत्री भी उनके साथ दर्शन और पूजा में शामिल हुईं। उन्होंने भक्तिभाव से सोमनाथ महादेव की ध्वजा पूजा, सोमेश्वर पूजा की और ट्रस्ट द्वारा हाल ही में शुरू की गयी पाघ पूजा की। पूजा के समापन के बाद उन्होंने पूजित पगड़ी (पाघ) को सोमनाथ महादेव के श्रृंगार के लिए अर्पित किया।

इसके बाद पगड़ी से सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर सोमनाथ ट्रस्ट के ट्रस्टी जे. डी. परमार और सचिव योगेंद्रभाई देसाई ने उनका स्वागत किया।श्री शाह ट्रस्ट द्वारा संशोधित एक आधुनिक मोबाइल ऐप को भी आज लांच किया। यह ऐप सोमनाथ आने वाले भक्तों के लिए वन स्टॉप समाधान होगा और सोमनाथ यात्रा ऐप के माध्यम से दर्शन, कमरे की बुकिंग, दर्शनीय स्थलों की जानकारी, ऑनलाइन प्रसाद या वस्त्र प्रसाद ऑर्डर सहित कई कार्य एक स्पर्श से किए जा सकते हैं।

शाह गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रविवार को यहां गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।श्री शाह ने इस अवसर पर गांधीनगर में अपने संबोधन में कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों से कहा उन्हें अपने अंदर के छात्र को कभी भी मरने नहीं देना है और ये सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थी जीवन के आधार पर स्वयं के विकास के माध्यम से देश के विकास में बड़ा योगदान दें। गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने काफी कम समय में बहुत ऊंचे मानांक सिद्ध किए हैं और एक बहुत अच्छा पुस्तकालय स्थापित करके छात्रों के लिए पढ़ाई को सुगम बनाने के प्रयास किए हैं।

उन्होंने कहा कि आज उपाधि लेकर जा रहा ये बैच अमृत महोत्सव बैच के रूप में जाना जाएगा क्योंकि ये वर्ष आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है और सभी छात्र-छात्राओं के लिए ये गर्व का पल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज़ादी के अमृत महोत्सव को मनाने के तीन उद्देश्य जनता के सामने रखे हैं। पहला, देश के युवाओं को आज़ादी के संघर्ष और आज़ादी से पहले के इतिहास से अवगत कराना। दूसरा 75 वर्षों की उपलब्धियों के बारे में गौरवान्वित महसूस करना और तीसरा 75 से 100 साल की यात्रा को संकल्प यात्रा बनाकर भारत को दुनिया में हर क्षेत्र में सर्वप्रथम बनाने का संकल्प लेना।उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने 75 से 100 साल के कालखंड को अमृत काल और इसे संकल्प से सिद्धि का कालखंड कहा है। जब 130 करोड़ लोग एक कदम आगे बढ़ते हैं तो देश 130 करोड़ कदम आगे बढ़ता है। दुनिया में हर क्षेत्र में महान और सर्वप्रथम भारत की रचना की ज़िम्मेदारी देश के युवाओं की है। एक महान भारत की रचना के सुफल प्राप्त करने और उसे बनाने की ज़िम्मेदारी छात्रों की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति-2020 एकमात्र ऐसी शिक्षा नीति है जिस पर किसी तरह का कोई विवाद या इसका विरोध नहीं हुआ और सबने इसे स्वीकारा है। इस शिक्षा नीति में भारत के युवाओं को विश्व के युवाओं के सामने मंच पर खड़ा करने की ताकत है क्योंकि इसे व्यापक विचार विमर्श के बाद बनाया गया है। इस नीति ने संकुचित सोच के दायरे से हमारी शिक्षा को बाहर लाने का काम किया है। शिक्षा का उद्देश्य डिग्री, अच्छी नौकरी या व्यक्तिगत जीवन में सुख-सुविधाएं प्राप्त करना नहीं,बल्कि संपूर्ण मानव बनना है। इस दिशा में हमेशा पुरूषार्थ करना चाहिए और ये शिक्षा नीति आपको इसकापूरा मौका देती है। यह नीति भारतीय मूल्यों पर आधारित लेकिन इसमें अत्याधुनिक शिक्षा के सभी तत्व समाहित हैं। इस नीति का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को गढ़ना है जो राष्ट्र गौरव के साथ-साथ विश्व कल्याण की भावना से भी ओत-प्रोत हों साथ ही इस नीति में ग्लोबल सिटीज़न बनाने की सारी क्षमताएं भी मौजूद हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा पर विशेष बल दिया गया है क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपनी भाषा में ही अच्छा सोच सकता है, बेहतर क्षमता के साथ रिसर्च कर सकता है और उसकी विश्लेषण करने और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नई शिक्षा नीति में भाषा के महत्व को बरकरार रखने के लिए प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा में अनिवार्य करने का प्रावधान किया है। हमारी सभी भाषाएं लचीली हैं इसीलिए हमें अपने शब्दकोष को बढ़ा कर इसे विस्तृतकरना चाहिए। नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा में लचीलापन लाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं साथ साथ ई-लर्निंग पर भी ज़ोर दिया गया है।श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के युवाओं के लिए अपार अवसर उपलब्ध कराए हैं।

2016 में देश में 724 स्टार्ट-अप थे। जो 2022 में बढ़कर 70 हज़ार से अधिक हो गए हैं। इसके साथ-साथ 107 स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न क्लब में हैं, जबकि 2016 में सिर्फ 4 थे। देश में कुल स्टार्ट-अप में से 45 प्रतिशत महिलाएं और बालिकाएं चला रही हैं और 45 प्रतिशत स्टार्ट-अप टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं। श्री मोदी ने कई क्षेत्रों की पहचान कर मेक इन इंडिया योजना की शुरूआत की और इसमें कई नए क्षेत्र खोले गए। इसके परिणामस्वरूप भारत का व्यापारिक निर्यात 400 अरब डॉलर को पार कर चुका है और पीएलआई योजना से चार लाख करोड़ रूपए का निवेश आ चुका है। मोदी जी ने युवाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए कई क्षेत्र खोले हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश की आज़ादी की शताब्दी के समय भारत निश्चित रूप से हर क्षेत्र में दुनिया में सर्वप्रथम होगा।

शाह ने जूनागढ़ में किया एपीएमसी किसान भवन का उद्घाटन

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात के जूनागढ़ में ज़िला बैंक मुख्यालय का शिलान्यास और कृषि शिविर में एपएमसी किसान भवन का उद्घाटन किया।श्री शाह ने अपने संबोधन में इस अवसर पर कहा कि कई उतार-चढ़ाव के बाद जूनागढ़ जिला सहकारी बैंक का यह वर्तमान स्वरूप सामने आया है। जो किसान प्राकृतिक खेती में लगे हैं, उन्हें अपनी पैदावार के अच्छे दाम मिलेंगे। देश आज़ाद होने के बाद से लगातार अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग उठती रही और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों की इस मांग को पूरा करते हुए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा,“ सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद श्री मोदी ने सहकारिता को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। प्राकृतिक खेती आने वाले दिनों में धरती माता की सेवा करने का एकमात्र विकल्प बचेगा क्योंकि लगातार डीएपी और यूरिया का उपयोग होने से 25 सालों बाद यह धरती कंक्रीट जैसी हो जाएगी। केंचुए जैसे पॉज़िटिव बैक्टीरिया को डीएपी और यूरिया ख़त्म कर देते हैं और जिनके खेत में पॉजिटिव बैक्टिरिया होते हैं, उनके खेत में कभी जीवाश्म की समस्या नहीं आती, किसी भी प्रकार के इनसेक्ट नहीं आते और किसी भी प्रकार के कीटनाशक के छिड़काव की जरूरत नहीं होती है।”

उन्होंने कहा,“ हमारे पूर्वज खेती जानते थे। लेकिन हम समझे कि यूरिया डालने से फसल बढ़ती है और ऐसा करने से हमारी धरती दूषित हो गई। अब लाखों किसान प्राकृतिक कृषि को अपना रहे हैं और उन्हें इसका फायदा भी मिल रहा है। प्राकृतिक कृषि करने से पैदावार बढ़ती है, वर्षा जल का संचय होता है, पेस्टीसाइड का उपयोग नहीं करना पड़ता और उत्पादन भी बढ़ता है, जिसके दाम भी बाज़ार में अच्छे मिलते हैं।”श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरे देश में प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने का अभियान चलाया है। उनके नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तीन राष्ट्रीय स्तर की बहुराज्यीय कोऑपरेटिव सोसायटी की स्थापना की है। इन तीन सोसायटी में से दो गुजरात के किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। इनमें से एक सोसायटी के तहत प्राकृतिक कृषि करने वाले सभी किसानों के उत्पाद अमूल के पेटेंट के अंतर्गत लिए जाएंगे और उसका मुनाफा सीधा किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा।

श्री शाह ने कहा,“ इस व्यवस्था के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद हम अपनी भूमि को यूरिया और डीएपी के उपयोग से और अपने शरीर को इनके उपयोग से होने वाली कैंसर जैसी बीमारियों से बचा पाएंगे, जलस्तर ऊपर आएगा और पर्यावरण भी बचेगा। ”उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी किसान भाइयों और बहनों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से मुलाकात करें और इसे अपनाएं।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने फसल उत्पाद के निर्यात के लिए भी एक कोऑपरेटिव सोसायटी की व्यवस्था की है और इसके माध्यम से देश के किसी भी किसान के उत्पाद के निर्यात के लिए ये सोसायटी निर्यात भवन की तरह सेवा देगी और इसका लाभ सीधा किसान के बैंक खाते में आ जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने से किसानों की समृद्धि बढ़ेगी और इसके साथ ही ये तय किया गया है कि देश की हर पंचायत में कोऑपरेटिव सेवा सहकारी मंडली बनाई जाएगी। सेवा सहकारी मंडली, डेयरी और मत्स्य उत्पादन मंडली तीनों एक ही प्रकार की सोसायटी के रूप में रजिस्टर्ड हों, इस प्रकार की व्यवस्था की गई है।

श्री शाह ने कहा,“ सहकारिता से ही किसानों को कई प्रकार के लाभ मिल सकते हैं। भारत सरकार की सभी योजनाएं सहकारिता का मज़बूत स्ट्रक्चर होने से आप सभी तक पहुंचनी शुरू हो जाएंगी। मोदी सरकार आने वाले 10 सालों में देश के किसानों की आय को दोगुना नहीं, बल्कि अनेक गुना बढ़ाने के प्रति कटिबद्ध है। कृषि क्षेत्र में भी मोदी जी ने अनेक नई शुरूआत की हैं, जैसे, किसान क्रेडिट कार्ड, एफपीओ, कृषि सिंचाई योजना, एमसपी पर सबसे ज्यादा खरीदी और नये सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से देश के किसान को समृद्ध बनाया है।”

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