वाराणसी के शाह मोहम्मद अंसारी को मिला देश का सर्वोच्च हथकरघा सम्मान
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हथकरघा क्षेत्र के विकास के लिए नई तकनीक, ई-कॉमर्स और युवाओं की भागीदारी को आवश्यक बताया। उन्होंने संत कबीर हथकरघा पुरस्कार 2025 से वाराणसी के शाह मोहम्मद अंसारी सहित तीन मास्टर बुनकरों को सम्मानित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुनकरों को देश की सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताते हुए स्वदेशी हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
नयी दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हथकरघा क्षेत्र के स्वस्थ विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का उचित तरीके से उपयोग किये जाने की आवश्यक को रेखांकित करते हुए शुक्रवार को कहा कि युवा उद्यमी, डिज़ाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक रुझानों, ब्रांडों और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर इस क्षेत्र में नए अवसर सृजित कर सकते हैं।
श्रीमती मुर्मु यहां 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रही थी जिसमें वर्ष 2025 के लिए उत्कृष्ट बुनकरों और डिजाइनरों आदि को ये पुरस्कार प्रदान किए गये।राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस समरोह में देश की समृद्ध और विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं का उत्सव मनाने के लिए चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए।
इस बार हथकरघा क्षेत्र में सर्वोच्च संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तीन मास्टर बुनकरों को दिया गया जिनमें ओडिशा के बारगढ़ जिले के राम मेहर (विचितपार खादी साड़ी की बुनाई), असम के कामरूप जिले की हथकरघा बुनकर रूणिमा चेतिया चौधरी ( मूगा सिल्क बुनाई) तथा उत्तर प्रदेश में वाराणसी जिले के चोलापुर के बुनकर शाह मोहम्मद अंसारी (जरबाफ और अवध जामदानी साड़ी) की बुनायी में उत्कृष्टता के लिए दिया गया।समारोह में 19 अन्य बुनकारों और उद्यमियों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हैंडलूम पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया।
समारोह में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और कपड़ा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। श्रीमती मुर्मु ने इस अवसर पर वहां विशेष रूप से दर्शाये गये कुछ वस्त्रों का अवलोकन भी किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएँ दीं।श्रीमती मुर्मु ने कहा कि तकनीक और नवीन डिज़ाइन से लैस अनेक प्रतिभाशाली युवा उद्यमी इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमी, डिज़ाइनर और स्टार्टअप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक रुझानों, ब्रांडों और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों और बुनकर सेवा केंद्रों के अंतर्गत स्थापित डिज़ाइन रिसोर्स सेंटर युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और संस्थानों के माध्यम से युवाओं को सक्रिय सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया जाना चाहिए, ताकि उनका उत्साह और कौशल इस क्षेत्र की दीर्घकालिक एवं बहुआयामी सफलता सुनिश्चित कर सके।राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का उचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक डिजिटल समाधानों के माध्यम से बाजार तक पहुँच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुँच को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बनेगा।राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र देश की ग्रामीण प्रीमियम अर्थव्यवस्था का एक उत्कृष्ट और मानव-केंद्रित उदाहरण बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रमुख हथकरघा क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और समकालीन प्रशिक्षण पद्धतियों से जोड़ा जा रहा है। सरकार बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है।उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि सरकार के प्रयासों से भारतीय हथकरघा क्षेत्र को सत्यापित सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और मजबूत हो रही है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह आयोजन हमारे देश की सांस्कृतिक एकता को परिभाषित करने वाली विविधता का उत्सव है। यह सरकार और बुनकर समुदाय के संयुक्त प्रयासों को सम्मानित करने का अवसर भी है, जिनके माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र की उत्कृष्ट गुणवत्ता की वैश्विक पहचान स्थापित हो रही है।राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा सदियों से भारत की सभ्यता के विकास की यात्रा का अभिन्न अंग रहा है। यह हमारे देश की असाधारण विविधता का प्रतीक है और हमारी क्षेत्रीय विशिष्टताओं को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हथकरघा क्षेत्र रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, कला एवं संस्कृति के संरक्षण तथा प्रकृति के प्रति प्रेम को बढ़ावा देता है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी गहराई से जुड़ा रहा है।
राष्ट्रपति ने हथकरघा दिवस की महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ था। बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू किए गए इस आंदोलन का उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं, घरेलू उद्योगों और विशेष रूप से देश के हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करना था। इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में भारत सरकार वर्ष 2015 से प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मना रही है।
संत कबीर हथकरघा पुरस्कार देश का सर्वोच्च सम्मान है, जो उत्कृष्ट शिल्प कौशल, आजीवन समर्पण तथा भारत की बुनाई परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में निरंतर योगदान देने वाले हथकरघा बुनकरों को प्रदान किया जाता है।राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार उन हथकरघा बुनकरों तथा अन्य हितधारकों को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक कौशलों का संरक्षण करते हुए रचनात्मकता, गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता का उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों को किया सलाम, हैंडलूम को बताया आत्मनिर्भर भारत की ताकत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और देश की सदियों पुरानी हथकरघा परंपरा को नमन करते हुए इस क्षेत्र के विकास और संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में देश के बुनकरों और कारीगरों की सराहना करते हुए कहा कि इनकी पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी, समर्पण और मेहनत ने भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा को जीवंत बनाए रखा है।
श्री मोदी ने कहा, “आज, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर, हम भारत की समृद्ध और जीवंत हथकरघा विरासत का जश्न मनाते हैं। हम अपने बुनकरों और कारीगरों के कौशल, रचनात्मकता और समर्पण को भी नमन करते हैं। पीढ़ियों से उन्होंने हमारी परंपराओं को संरक्षित और समृद्ध किया है।”प्रधानमंत्री ने हथकरघा क्षेत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “हमारी सरकार इस क्षेत्र को निरंतर प्रोत्साहन देती रहेगी।हथकरघा उद्योग ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार है।”स्वदेशी वस्त्रों को बढ़ावा देने में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए, प्रधानमंत्री ने लोगों से सोशल मीडिया पर अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित करने की अपील की।
उन्होंने कहा, “अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों और तैयार होने की प्रक्रिया के वीडियो को साझा करें, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन मिलेगा।”हर साल सात अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है, जिसने लोगों को स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए प्रेरित किया और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत के पारंपरिक उद्योगों को नई मजबूती दी। यह अवसर देश की सांस्कृतिक विरासत, अर्थव्यवस्था और रोजगार में हथकरघा क्षेत्र के योगदान का सम्मान करने के साथ-साथ उन लाखों बुनकरों और कारीगरों के प्रयासों को भी पहचान देता है, जो आज भी पारंपरिक बुनाई की विरासत को जीवित रखे हुए हैं।
हथकरघा क्षेत्र कृषि के बाद भारत के सबसे बड़े रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों में से एक है, जो देश भर में लाखों बुनकरों और सहायक श्रमिकों का समर्थन करता है। इसमें कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं का है।पिछले कुछ वर्षों में, केंद्र सरकार ने वित्तीय सहायता और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हथकरघा बुनकरों की आजीविका बढ़ाने, बाजार तक पहुंच का विस्तार करने, ब्रांडिंग में सुधार करने, निर्यात को बढ़ावा देने और तकनीक अपनाने की सुविधा के लिए कई पहल शुरू की हैं। (वार्ता)
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