
कीव से ध्यान हटा रही रूसी सेना, क्या यूक्रेन युद्ध के लक्ष्य से पीछे हट रहे हैं पुतिन?
वाशिंगटन : रूसी बल यूक्रेन में जारी युद्ध में अब अपना ध्यान राजधानी कीव से हटाते हुए प्रतीत हो रहे हैं। इसके बजाय उनका ध्यान यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में स्थित डोनबास औद्योगिक क्षेत्र को मुक्त कराने पर है। अधिकारियों ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह युद्ध के नए चरण की शुरुआत हो सकती है।अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि इसके क्या परिणाम होंगे। सवाल उठ रहा है कि क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध से बाहर निकलने के रास्ते की तलाश में अपनी महत्वाकांक्षाओं को कम कर दिया है? हाल में कीव के पास रूसी सेना द्वारा अपनाए गए रक्षात्मक रुख से इस बात के संकेत मिलते हैं कि यूक्रेन भी जबरदस्त प्रतिरोध कर रहा है।
देश के कई हिस्सों में पुतिन की सेना को काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और अन्य देश यूक्रेन को हथियार और साजो-सामान की आपूर्ति बढ़ा रहे हैं। हालिया कुछ दिन में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें कुछ क्षेत्रों में सीमित रूप से ही सही, यूक्रेनी सैनिकों के आक्रामक होने के सबूत मिले हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में वे काला सागर तट पर बंदरगाह में एक बड़े रूसी जहाज पर हमला करने में कामयाब रहे। रूस के उपसेना प्रमुख जर्नल सर्गेई रुड्सकोई ने कहा था कि रूसी बलों ने पहले चरण के ‘मुख्य उद्देश्यों’ को मोटे तौर पर हासिल कर लिया है। रूस ने पहले चरण को यूक्रेन में ‘विशेष सैन्य अभियान’ करार दिया था।रुड्सकोई ने कहा था कि रूसी बलों ने यूक्रेन की लड़ाकू सैन्य क्षमता को ‘अपेक्षाकृत कमजोर’ कर दिया है और अब वे अपने मुख्य लक्ष्य यानी डोनबास की आजादी को हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
रुडस्कोई के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस से बातचीत करने की अपील की। हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यूक्रेन शांति की कीमत अपने किसी भी क्षेत्र को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होगा।उन्होंने देश के नाम एक वीडियो संदेश में कहा, ‘यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी दी जानी चाहिए। शर्तें निष्पक्ष होनी चाहिए, क्योंकि यूक्रेनी लोग कुछ भी गलत स्वीकार नहीं करेंगे।’अमेरिका के एक रक्षा अधिकारी ने कहा है कि एक महीने से जारी युद्ध में रूसी सेना देश के अधिकांश हिस्सों में कमजोर पड़ी है। पिछले कुछ दिन में रूसी जमीनी बलों ने कीव को लेकर बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है, हालांकि वे राजधानी पर हवाई हमले जारी रखे हुए हैं।अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘कम से कम इस समय वे कीव को ध्यान में रखते हुए आगे नहीं बढ़ाना चाहते। वे डोनबास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’
कीव को नाटो के एक फीसदी विमान और टैंक की जरूरत: जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन को नाटो में शामिल देशों से कम से कम एक फीसदी विमान और टैंक की जरूरत है। श्री जेलेंस्की ने कीव के पश्चिमी सहयोगियों पर यूक्रेन की सहायता में अब भी हिचकिचाने का आरोप लगाया है।राष्ट्रपति ने अपने टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संबोधन में कहा, ‘हमें सिर्फ एक फीसदी नाटो के विमानों और टैंकों की जरूरत है, इससे ज्यादा और कुछ नहीं। ‘शुक्रवार को जारी 27 यूरोपीय देशों के प्रमुखों के लिए जारी अपने संबोधन में जेलेंस्की ने कीव को हथियारों की आपूर्ति से इनकार करने और हंगेरियन क्षेत्र के माध्यम से हथियारों के हस्तांतरण की अनुमति नहीं देने के लिए हंगरी की आलोचना की।
जेलेंस्की प्रशासन के प्रमुख एंड्री यरमक ने शुक्रवार को कहा कि कीव को इस हफ्ते की शुरुआत में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन से काफी निराशा हुई है क्योंकि कीव को उम्मीद थी कि इस दौरान गठबंधन कहीं और ज्यादा अपने साहस का प्रदर्शन करेगा और रूस का मुकाबला करने के लिए अतिरिक्त उपाय अपनाएगा।उल्लेखनीय है कि यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क को अलग-अलग देशों के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद यहां से यूक्रेनी सेना को हटाने के लिए रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ विशेष सैन्य अभियान की शुरुआत की थी। रूस ने कहा था कि यूक्रेन पर कब्जा करने की उसकी कोई योजना नहीं है, बल्कि लक्ष्य यूक्रेन का असैन्यीकरण करना है।
पोलैंड में रूस बंद करने जा रहा अपना दूतावास
पोलैंड में रूसी राजदूत सर्गेई एंड्रीव ने शनिवार को सुझाया कि रूस को पोलैंड की राजधानी वारसॉ में अपने दूतावास को अस्थायी रूप से बंद करने के लिए मजबूर किए जाने की संभावना है।उन्होंने सोलोवियोव लाइव शो में बताया, ‘हो सकता है कि कुछ समय के लिए हमें अपना दूतावास बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बेशक, पोलैंड को भी मॉस्को में अपने दूतावास करने हाेंगे। हालांकि, इससे कूटनीतिक स्तर पर संपर्क नहीं टूटेगा।’पोलैंड ने इसी हफ्ते रूस की तरफ से जासूसी करने के संदेह में 45 रूसी राजनयिकों को निष्कासित करने की घोषणा की। बहरहाल, श्री एंड्रीव ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि रूसी दूतावास या व्यापार मिशन के किसी भी कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ा नहीं गया है।राजदूत ने अनुमान लगाया कि उनके मिशन से दो-तिहाई से अधिक उनके कर्मचारियों की सेवाएं रद्द हुई हैं और रूस भी इस पर जवाबी कार्रवाई करेगा।श्री एंड्रीव ने कहा, ‘हां, हमें गहरा झटका लगा है और हमारी क्षमताओं में उल्लेखनीय रूप से कमी आई है।’
चेक विदेश मंत्रालय ने रूसी राजदूत को किया तलब
चेक विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनके द्वारा प्राग में रूसी राजदूत अलेक्जेंडर जमेयेव्स्की को तलब किया गया है।विदेश मंत्रालय ने शनिवार रात को ट्विटर पर कहा, ‘आज शाम उप विदेश मंत्री मार्टिन स्मोलेक ने माॅस्को में चेक दूतावास के राजनयिक कर्मचारियों के खिलाफ रूस के उकसावे के विरोध में रूसी राजदूत को बुलाया है। इस तरह के अस्वीकार्य कृत्य वियना कन्वेंशन के तहत रूसी संघ के कर्तव्यों का खंडन करते हैं।’इससे पहले शनिवार को चेक गणराज्य के विदेश मंत्री जान लिपाव्स्की ने कहा था कि चेक में रूसी राजनयिक मिशन में और कमी करने के लिए पहले से ही कोई जगह नहीं थी क्योंकि 14 रूसी राजनयिक पहले ही देश छोड़ जा चुके हैं।
श्री लिपाव्स्की ने कहा कि प्राग कई व्यवहारिक कारणों से रूस के साथ प्राथमिक स्तर पर राजनयिक संबंध बनाकर रखना चाहता है और इसकी योजना मॉस्को के साथ संचार के न्यूनतम स्तर को बनाए रखने की है।उल्लेखनीय है कि यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क को अलग-अलग देशों के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद यहां से यूक्रेनी सेना को हटाने के लिए रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ विशेष सैन्य अभियान की शुरुआत की थी। रूस ने कहा था कि यूक्रेन पर कब्जा करने की उसकी कोई योजना नहीं है, बल्कि लक्ष्य यूक्रेन का असैन्यीकरण करना है।
इंग्लैंड 20 लाख पाउंड की सहायता यूक्रेन को देगा
ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस ने शनिवार को घोषणा की कि यूक्रेन को 20 लाख पाउंड की आवश्यक खाद्य सामग्री मुहैया करायी जाएगी। यूक्रेन की एक माह से अधिक समय से रूसी सेना द्वारा घेराबंदी की गई है।यूक्रेन की सरकार के सीधे अनुरोध के प्रतिक्रिया में यह घोषणा की गई। ब्रिटेन तेजी से सूखा खाद्य सामग्री, डिब्बबंद खाद्य सामग्री और पानी यूक्रेन को उपलब्ध करा रहा है।
यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैन्य कर्मियों को मिलेगा वयोवृद्ध लड़ाकू का दर्जा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को यूक्रेन और डोनबास में देश के विशेष सैन्य अभियान में भाग लेने वालों को वयोवृद्ध लड़ाकुओं का दर्जा देने वाले एक कानून पर हस्ताक्षर किए।यह कानून रूस की एकआधिकारिक वेब पोर्टल पर प्रकाशित किया गया है।
रूस जॉर्जिया से होकर यूक्रेन में भेज रही सेना: अमेरिका
अमेरिकी प्रतिरक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने पाया है कि डोनबास क्षेत्र में अपने हमले का समर्थन करने के लिए रूस जॉर्जिया से यूक्रेन में अपनी सेना भेज रही है। एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने संवाददाताओं संग हुई बातचीत में इसकी जानकारी दी।अधिकारी ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा, ‘हमें जॉर्जिया से सेना भेजने के कुछ संकेत मिले हैं। हमें जॉर्जिया में कुछ सैनिकों की गतिविधि भी देखने को मिली है। हालांकि हमें इसकी सही संख्या नहीं पता है।’इस दौरान, पेंटागन के अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने जॉर्जिया का नाम क्यों लिया है क्योंकि यहां कोई रूसी सेना नहीं है। रक्षा विभाग के प्रेस केंद्र ने इस मुद्दे पर स्पूतनिक की जांच का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।उल्लेखनीय है कि यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियान की शुरुआत 24 फरवरी को हुई।
अमेरिका सुरक्षा सहायता स्वरूप कीव को देगा 10 करोड़ डॉलर
यूक्रेन में रूस के चलाए जा रहे विशेष सैन्य अभियान के बीच अमेरिका सुरक्षा सहायता के रूप में कीव को 10 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि प्रदान करने जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इसकी जानकारी दी।श्री ब्लिंकन ने शनिवार को एक बयान में कहा, ‘अमेरिका आवश्यक सीमा सुरक्षा प्रदान करने, कानून व्यवस्था बनाए रखने और महत्वपूर्ण सरकारी बुनियादी ढांचों की सुरक्षा के मद्देनजर यूक्रेनी गृह मंत्रालय की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से नागरिक सुरक्षा सहायता के रूप में अतिरिक्त 10 करोड़ डॉलर की राशि प्रदान करने का इरादा रखता है।’गुरुवार को व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया था कि अमेरिका मानवीय सहायता स्वरूप कीव को 100 करोड़ डॉलर से अधिक धनराशि प्रदान करेगा। इसके साथ ही साथ यूक्रेन और उसके आसपास के देशों में लोकतंत्र और मानवाधिकार कार्यों को आर्थिक सहायता देने के लिए अतिरिक्त 32 करोड़ डॉलर भी मुहैया कराएगा। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ने यूक्रेन के लिए मानवीय, आर्थिक और रक्षा सहायता में 1350 करोड़ डॉलरसे अधिक की मंजूरी दी थी।



