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रूस -यूक्रेन :यूक्रेन के 4400 से ज्यादा घर नष्ट, 2389 बच्चों का अपहरण

कीव । यूक्रेन पर रूस के हमले के 27वें दिन भी दोनों देशों के बीच घमासान जारी है। रूस के भीषण आक्रमण से यूक्रेन में तबाही का मंजर है। अब तक 4400 से ज्यादा रिहायशी इमारतें नष्ट हो चुकी हैं। यूक्रेन ने रूस पर देश के 2389 बच्चों के अपहरण का आरोप भी लगाया है।यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की भयावहता कम होने का नाम नहीं ले रही। यूक्रेन के कई शहरों पर एक साथ बमबारी से रूसी सेना ने तबाही मचा रखी है। अब रूसी सेना आवासीय इलाकों को भी नहीं छोड़ रही है। यूक्रेन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 4400 से ज्यादा आवासीय भवन नष्ट किए जा चुके हैं। रूसी सेना के हवाई हमलों ने इन भवनों को या तो ध्वस्त कर दिया है या आग से उन्हें नष्ट कर दिया है। इन भवनों में रहने वालों में तमाम लोगों को जान गंवानी पड़ी है और तमाम लोग बेघर होने के साथ जिंदगी से संघर्ष कर रहे हैं।

इस बीच यूक्रेन ने रूस पर 2389 बच्चों के अपहरण का आरोप लगाया है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक रूस के नियंत्रण वाले डोनबास के 2389 बच्चों को अवैध रूप से रूस भेज दिया गया है। रूसी आक्रमण में भारी नुकसान होने के बावजूद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार नहीं हैं। जेलेंस्की नाटो के रवैये से भी नाराज हैं। उन्होंने कहा कि नाटो को या तो अब कहना चाहिए कि वे यूक्रेन को स्वीकार कर रहे हैं या खुले तौर पर कहें कि वे रूस से डरते हैं।

यूक्रेन पर केमिकल हमला कर सकता है रूस : बाइडन

अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि रूस के मुद्दे पर भारत को छोड़ उसके सभी सहयोगी देश अमेरिका के साथ हैं। उन्‍होंने कहा है कि पश्चिमी देशों के रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों पर सभी सहयोगी देशों ने अमेरिका का समर्थन किया है। हालांकि इस मामले में भारत का रवैया जरूर गोलमोल रहा है। बिजनेस राउंडटेबल सीईओ की क्‍वाटर्ली मीटिंग के दौरान उन्‍होंने ये बात कही। उन्‍होंने रूस के मुद्दे पर अमेरिका के सहयोगी उसके कितने साथ हैं, के मुद्दे पर बोलते हुए कहा है कि क्‍वाड संगठन के सहयोगी देशों ने भी इस पर अमेरिका का पूरा सहयोग दिया है। जापान ने भी रूस के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं । इसी तरह से आस्‍ट्रेलिया ने भी रूस के खिलाफ प्रतिबंधों पर अमेरिका का भरपूर सहयोग दिया है। इस बीच अमेरिका आगाह किया है कि रूस यूक्रेन के खिलाफ केमिकल वेपंस का इस्‍तेमाल कर सकता है।

क्‍वाड बैठक में भारत का अन्‍य सदस्‍यों से अलग रुख

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कहा कि पुतिन इस बात को नहीं समझ पा रहे है इस मुद्दे पर नाटो किस कदर पश्चिमी देशों से एकजुट है और यूक्रेन पर उनके हमले का जवाब अपनी तरह से दे रहा है। आपको बता दें कि इस माह की शुरुआत में क्‍वाड की वर्चुअल बैठक हुई थी, जिसमें आस्‍ट्रलिया, जापान, अमेरिका के नेताओं ने यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की कड़ी आलोचना की थी। वहीं इस बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की अपील की थी। बता दें कि भारत अमेरिका के सहयोगी देशों में एकमात्र देश है जिसने अब तक रूस के मसले पर अमेरिका का पक्ष नहीं लिया है। इससे पहले रूस के खिलाफ सुरक्षा परिषद में हुई वोटिंग के दौरान भी भारत इससे खुद बाहर रहा था।

भारत का तटस्‍थ रुख

क्‍वाड के अन्‍य सदस्‍य देशों ने भारत के इस रवैये को गलत बताया है और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन करने और इसी तरह के कदम उठाने की अपील भी की है। वहीं भारत ने इस मुद्दे पर तटस्‍थ रहते हुए अपनी कूटनीतिक रणनीति को जारी रखा है। बता दें कि रूस ने 24 मार्च को यूक्रेन पर हमला किया था। इसके तीन दिन बाद ही रूस ने डोनस्‍तेक और लुहांस्‍के को आजाद राष्‍ट्र के तौर पर अपनी मान्‍यता दी थी। रूस यूक्रेन के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को मिलिट्री आपरेशन बता रहा है। रूस का कहना है कि उसका मकसद केवल यूक्रेन को डिमिलिट्राइज्‍ड करना है।

अमेरिका की चेतावनी

इस बीच अमेरिका ने आगाह किया है कि रूस यूक्रेन पर हमले के लिए केमिकल वेपंस का इस्‍तेमाल कर सकता है। अमेरिका का कहना है कि यूक्रेन की किसी भी बड़े शहर पर कब्‍जा न कर पाने की बौखलाहट में रूस ऐसा कर सकता है। बता दें कि यूक्रेन और रूस के बीच जंग को चौथा सप्‍ताह चल रहा है। इस दौरान रूस ने यूक्रेन पर हाइपरसोनिक मिसाइल से लेकर अन्‍य हथियारों से भी ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इन हमलों में जान-माल की भारी क्षति हुई है। मारियोपोल में हुए भीषण गोलाबारी के बाद सड़कों पर शव पड़े हैं और कई इमारतों में आग लगी हुई है।

यूक्रेन ने घुटने टेकने से किया इनकार

यूक्रेन की उप प्रधानमंत्री इर्यना वेरेशचुक ने सोमवार को रूसी सेना के सम्मुख घुटने टेकने से इनकार कर दिया है।मास्को ने यूक्रेन के समय के अनुसार सायं पांच बजे तक मरियूपोल में यूक्रेन की सेना को आत्मसमर्पण किए जाने का अल्टीमेटम दिया था। इस नगर में हज़ारों लोग भूमिगत हैं और ऊपर से गोले बरस रहे हैं। मरियूपोल एक पोर्ट सिटी है और सामरिक दृष्टि से इसे संरक्षित किया जाना यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण है। इस जवाब के बाद रूसी सेना ने कीव पर क़हर बरपाना शुरू कर दिया है। कीव के शॉपिंग मॉल पर बमबारी करते हुए उसे पूरी तरह तहस नहस कर दिया गया है।

बाइडेन ने अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ रूसी साइबर हमले की चेतावनी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी कंपनियां रूसी साइबर हमलों की चपेट में आ रही हैं। बाइडेन ने कंपनियो से अपने डिजिटल लॉक रखने का आग्रह किया है।। खलीज टाइम्स ने मंगलवार को सूचना दी।बाइडेन के शीर्ष साइबर सुरक्षा सहयोगी ऐनी न्यूबर्गर ने कहा कि कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संस्थाओं ने अपने सॉफ़्टवेयर में ज्ञात समस्याओं को ठीक करने के लिए संघीय एजेंसियों के अलर्ट की अनदेखी की है, जिनका रूसी हैकर्स द्वारा शोषण किया जा सकता है।

साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी ने एक शील्ड्स अप अभियान शुरू किया है जिसका उद्देश्य कंपनियों को अपने बचाव को मजबूत करने में मदद करना है और कंपनियों से अपने डेटा का बैकअप लेने, मल्टीफैक्टर प्रमाणीकरण चालू करने और साइबर स्वच्छता में सुधार के लिए अन्य कदम उठाने का आग्रह करना है।राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण के लिए रूस पर अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के प्रतिशोध में वह अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ साइबर हमला शुरू कर सकता है।रूस को एक हैकिंग पावरहाउस के रूप में जाना जाता है। रूस ने 2017 में विनाशकारी नोटपेट्या हमला किया था जो दूर-दूर तक फैल गया था और विश्व स्तर पर इससे $ 10 बिलियन से अधिक का नुकसान हुआ था।

यूक्रेन में जनहानि के लिए रूस को जवाबदेह ठहराना चाहिए : मॉरिसन

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भारत के अपने समकक्ष नरेंद्र मोदी के साथ वर्चुअल शिखर वार्ता में सोमवार को कहा कि रूस के यूक्रेन में ‘भयानक’ आक्रमण करने के बाद युद्धग्रस्त देश में हुई जनहानि के लिए उसे (रूस को) जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता है। मॉरिसन ने यूक्रेन संकट पर क्वाड देशों के नेताओं की हाल में हुई बैठक का भी जिक्र किया और कहा कि इससे हिंद प्रशांत क्षेत्र के लिए घटनाक्रम के असर और परिणामों पर चर्चा करने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा, हम यूरोप में भयानक स्थिति से व्यथित हैं, हालांकि हमारा ध्यान हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर अधिक है। वहीं, मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विविध क्षेत्रों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों में काफी प्रगति देखी गयी है। उन्होंने यह भी कहा कि वृहद आर्थिक सहयोग समझौते के लिए वार्ता के नतीजे पर पहुंचना आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अहम होगा। उन्होंने कहा कि हमारी भागीदारी मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खनिज, जल प्रबंधन और अक्षय ऊर्जा के अहम क्षेत्रों में तीव्र गति से सहयोग बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, मैं खुश हूं कि हम दो देशों के बीच वार्षिक शिखर वार्ता का तंत्र स्थापित कर रहे हैं।

रूस की कोर्ट ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लगाया प्रतिबंध

यूक्रेन और रूस युद्ध के बीच रूस की एक अदालत ने सोमवार को फेसबुक और इंस्टाग्राम को चरमपंथी संगठन करार देते हुए इसपर प्रतिबंध लगा दिया। अधिकारियों ने अमेरिकी सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (पहले फेसबुक) पर यूक्रेन में युद्ध के दौरान ‘रसोफोबिया’ को सहन करने का आरोप लगाने के बाद इस प्रतिबंध को लगाने का फैसला लिया। टवर्सकोई जिला अदालत ने कहा कि अदालत ने चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देने को लेकर दो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाने के लिए अभियोजकों के अनुरोध पर सहमति दर्ज कर दी। वहीं कोर्ट ने कहा कि मेटा की व्हाट्सएप मैसेंजर सेवा को बैन नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह सार्वजनिक मंच नहीं है।

यह कदम यूक्रेन में अपनी सैन्य कार्रवाई के बीच रूस की ओर से सोशल मीडिया पर नकेल कसने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। सोमवार की सुनवाई के दौरान रूस की एफएसबी सुरक्षा सेवा ने मेटा पर संघर्ष के दौरान मास्को के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। रूसी समाचार एजेंसी के अनुसार एफएसबी के प्रतिनिधि इगोर कोवालेव्स्की ने अदालत को बताया कि मेटा संगठन की गतिविधियां रूस और उसके सशस्त्र बलों के खिलाफ निर्देशित हैं। उन्होंने कहा कि हम अदालत से मेटा की गतिविधियों पर बैन लगाने और इस फैसले को तुरंत लागू करने की अपील करते हैं। 24 फरवरी को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से यूक्रेन में सैनिकों को भेजने के बाद अधिकारियों ने रूस में फेसबुक और इंस्टाग्राम के साथ-साथ ट्विटर तक पहुंच को अवरुद्ध कर दिया था।

यूक्रेन और रूसी शरणार्थियों का अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर जमावड़ा

यूक्रेन और रूस के शरणार्थियों का इन दिनों तिजुआना स्थित अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर जमावड़ा शुरू हो गया है। रूस के युवा शरणार्थी इसलिए अमेरिका में शरण लेना चाहते हैं कि वे पुतिन प्रशासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में भाग लेने के बाद जान बचाकर भागे हैं, तो यूक्रेन के शरणार्थी रूसी सेना के अत्याचार और बमबारी से जान बचाते हुए एक बेहतर जीवन जीने के लिए शरण मांगने आए हैं। अमेरिका पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन के शरणार्थियों को शरण दे रहा है, लेकिन रूस के शरणार्थी तिजुआना बॉर्डर पर ठंडी में रातें गुज़ारने को विवश हैं।रूस के ऐसे 6400 नागरिक हैं जो पिछले पांच महीनों से अमेरिका में शरण के लिए पुरज़ोर कोशिश में हैं।बता दें कि तिजुआना बॉर्डर कोविड संक्रमण के कारण आम शरणार्थियों के लिए बंद है।अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी सचिव एलेक्जेंडरो मयोरकस ने मीडिया से कहा है कि अमेरिका मानवीय आधार पर अपेक्षित सहयोग कर रहा है।रूसी परेशान हैं कि यूक्रेन के लोगों को अमेरिका में प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि उनपर ढेरों बंदिशें लगाई जा रही हैं।

जापान ने शांति संधि से हटने पर रूस के खिलाफ विरोध जताया

जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा ने देश के संसद के ऊपरी सदन में सुनवाई के दौरान कहा कि जापान के साथ शांति संधि पर बातचीत से हटने का रूस का फैसला अस्वीकार्य है।किशिदा ने कहा, “यह बिल्कुल अनुचित और अस्वीकार्य है। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।”क्षेत्र और शांति संधि के मुद्दे पर टोक्यो की स्थिति के बारे में एक सांसद के सवाल का जवाब देते हुए, किशिदा ने कहा कि यह नहीं बदला है, लेकिन, जैसा कि मैंने पहले कहा यूक्रेन में घटनाओं के आलोक में रूस के साथ एक संवाद अब असंभव है।प्रधानमंत्री ने कहा, “जापान वित्त वर्ष 2022 के लिए बजट के मसौदे के उस हिस्से को संशोधित नहीं करेगा, जो रूस के साथ संयुक्त आर्थिक गतिविधियों से संबंधित है, लेकिन आगे की कार्रवाइयों का विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक है।”मुख्य कैबिनेट सचिव हिरोकाज़ु मात्सुनो ने संवाददाताओं से कहा कि जापान ने शांति संधि पर बातचीत से हटने के मास्को के फैसले पर रूस को विरोध भेजा।उन्होंने कहा, “हमने एक विरोध भेजा यह निर्णय बिल्कुल अनुचित और पूरी तरह से अस्वीकार्य है।”इससे पहले रूसी देश मंत्रालय ने सोमवार को कहा था कि मास्को, टोक्यो के अमित्र कदमों के जवाब में जापान के साथ शांति संधि पर बातचीत करने से इनकार करता है, दक्षिणी कुरील द्वीप समूह के लिए जापानी नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा रोक रहा है, और जापान के साथ बातचीत से हट रहा है।

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