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लाकडाउन में घर-घर जीवंत हुए रामायण के आदर्श

बिखरते परिवार को मिल रही पारिवारिक धर्म की शिक्षा

बिल्थरारोड (बलिया)ः कोरोना से बचाव को घोषित लाकडाउन में घरों में रह रहे परिवार ध्में सदस्यों में रामायण के आदर्श जीवंत होने लगे है और लोग संबंधों की मर्यादा व कर्तव्य-दायित्वों के बारीकियों को समझने लगे है। जी हां, सतयुग के भगवान राम के आदर्श व मर्यादा की जीवंत कथा जो नए पीढ़ी से दूर हो रही थी और आधी-अधूरी जानकारी के साथ नया पीढ़ी हनी सिंह व सपना चैधरी के दिवाने होने लगे थे किंतु एकबार फिर दुरदर्शन चैनल पर रामायण के प्रसारण को घरों में बड़ी उत्सुकता से देखा जाने लगा है। परिवार के सभी सदस्य एकसाथ बैठकर रामायण को देख रहे है और एक भाई, बहन, पिता, मां, मित्र, दुश्मन, जनता के दायित्वों को समझने के साथ ही अनादि काल से जगत जननी महिला के प्रति सम्मान के कारणों को समझने लगे है। जिसके कारण छोटी-छोटी बातों पर बिखरते परिवार अब छोटी-छोटी बातें भूल एकदूसरे का हालचाल लेने लगे है। रामायण प्रसारण के निर्णय को खासकर नया पीढ़ी व पुराने लोगों ने जमकर सराहा और समाज के एकल परिवार के बढ़ते प्रचलन के बीच रामायण से लोगों के जुड़ने की अपील की है। नगर निवासी आलोक गुप्ता, मनोज प्यारे, मोहन मद्धेशिया, मृत्युंजय गुप्ता, राममनोहर गांधी, हरिनारायण, संजय गुप्ता, गणेश गुप्ता, अरुण कुमार गुप्ता, दिनेश जायसवाल आदि ने रामायण जैसे धर्म आधारित के प्रसारण को आज के समय में जरुरी बताया। कहा कि स्कूलों में बच्चों को किताबी ज्ञान तो दिया जा रहा है किंतु भागदौड़ की जिंदगी के परिजन को बच्चों को सामाजिक संस्कार व भारतीय संस्कृति से अवगत कराने का समय ही नहीं है। स्कूल भी सिर्फ किताबी ज्ञान व रिजल्ट ठीक कराने के लक्ष्य को पूरा कराने में ही व्यस्त रहते है। इधर रामायण के प्रसार को लेकर हो रहे धार्मिक टिप्पणी व राजनीतिक खेल को भी लोगों ने समाज के लिए खतरनाक बताया।

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