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उत्तर प्रदेश के लिए बड़ा अवसर है प्रयागराज महाकुम्भ, इससे जुड़ी परियोजनाओं को दें शीर्ष प्राथमिकता:मुख्यमंत्री

वित्तीय वर्ष 2024-25 में बजट प्राविधान के सापेक्ष आवंटन और व्यय की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा.मुख्यमंत्री का निर्देश, मंत्रीगण स्वयं करें विभागीय आवंटन और व्यय की समीक्षा.हर जनपद को सीडी रेशियो बढ़ाने पर देना होगा ध्यान, बैंकर्स के साथ समन्वय बनाएं, लोगों को लाभ दिलाएं: मुख्यमंत्री.मुख्यमंत्री का निर्देश, ओडीओपी में जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा हो, मार्केट डिमांड और सप्लाई का करें आकलन.मुख्यमंत्री का निर्देश, प्रयागराज के साथ ही काशी, मथुरा, विन्ध्यधाम और अयोध्या में सुरक्षा व सुविधा की करें समीक्षा.

  • जनहित के लिए बजट की कमी नहीं, परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री
  • गौतमबुद्ध नगर और बीडा में रजिस्ट्री कार्यालयों की संख्या बढ़ाने की जरूरत: मुख्यमंत्री
  • केंद्र सरकार से मिल रहा हर संभव सहयोग, बनाए रखें संवाद-संपर्क: मुख्यमंत्री

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 में बजट प्राविधान के सापेक्ष शासन द्वारा जारी स्वीकृतियों/विभागाध्यक्ष द्वारा आवंटित धनराशि/व्यय तथा भारत सरकार से लक्ष्य के सापेक्ष प्राप्त धनराशि की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। विभागवार समीक्षा के उपरांत मुख्यमंत्री जी ने व्यापक जनहित के विकास कार्यों में तेजी लाने, परियोजनाओं की गुणवत्ता व समयबद्धता सुनिश्चित करने सहित अनेक दिशा-निर्देश दिए।

● वित्तीय वर्ष 2024-25 के 07 माह व्यतीत हो चुके हैं। सभी विभागों द्वारा वर्तमान बजट में प्राविधानित धनराशि का यथोचित खर्च किया जाना सुनिश्चित किया जाए। आवंटन और व्यय में तेजी की अपेक्षा है। विभाग स्तर भी पर खर्च की समीक्षा भी जाए। जिन विभागों में अब तक 55 फीसदी से कम व्यय हुआ है, वहां संबंधित मंत्रीगण स्वयं विभागीय स्थिति की समीक्षा करें।

● आगामी वर्ष 2025 उत्तर प्रदेश के लिए बड़ा अवसर है। प्रयागराज महाकुम्भ के आयोजन में सभी विभागों की भूमिका है। अतः सभी विभाग महाकुम्भ से जुड़ी विभागीय परियोजनाओं को शीर्ष प्राथमिकता दें। मुख्य सचिव स्तर से इसकी सतत मॉनीटरिंग की जाती रहे। महाकुम्भ में आने वाले बहुतायत श्रद्धालु और पर्यटक काशी, अयोध्या, मथुरा और विंध्यवासिनी धाम भी जाएंगे, ऐसे में इन पवित्र स्थलों की सुविधा और सुरक्षा की भी गहन समीक्षा की जाए।

● गौतमबुद्ध नगर जनपद और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) में रजिस्ट्री कार्यालयों की संख्या बढाएं। बीडा के विकास की कार्यवाही में तेजी अपेक्षित है। इसके प्रगति की सतत समीक्षा भी की जाए।

● लगातार प्रयासों से आज प्रदेश का सीडी रेशियो 60 फीसदी हो गया है। इसी प्रकार सभी जिलों को प्रयास करना होगा। हर जिले में स्थानीय अधिकारी बैंकों के साथ संवाद बनाएं, लोगो को लाभ दिलाएं। हर जिले का सीडी रेशियो कम से कम राज्य औसत के बराबर होना चाहिए।

● एक जिला एक उत्पाद योजना ने स्थानीय शिल्पकला/उद्यम को बड़ा प्रोत्साहन दिया है। इसकी अद्यतन स्थिति की जिलावार समीक्षा की जाए। ओडीओपी उत्पादों की डिमांड का आकलन कर उस अनुरूप सप्लाई सुनिश्चित कराएं। निर्यात बढ़ोतरी के लिए सभी जिलों को प्रयास करना होगा।

● स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजनांतर्गत युवाओं को टैबलेट/स्मार्टफोन वितरित किए जाने की कार्यवाही तेज करें। इन टैबलेट/स्मार्टफोन में सरकार के लोककल्याणकारी योजनाओं/कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।

● आदरणीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा हमें हर संभव सहायता मिल रही है। केंद्र से सामंजस्य स्थापित कर अवशेष धनराशि प्राप्त करें। विभागीय मंत्री एवं विभागीय अधिकारी भारत सरकार के मंत्रीगणों/अधिकारियों से संवाद करें। केन्द्रांश के अभाव में परियोजना बाधित न रखें। नियमानुसार राज्यांश जारी कर कार्य जारी रखा जाए। सभी विभाग शत-प्रतिशत उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर भेजना सुनिश्चित करें।

● आत्मनिर्भर नगर पंचायत और आत्मनिर्भर जिला पंचायत के लिए हर स्तर पर प्रयास करना होगा। पंचायतों को आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करें। आश्रम पद्धति विद्यालयों में छात्रावासों के मेंटेनेंस कराया जाना आवश्यक है।

● आगामी दिनों में किसानों को खाद की आवश्यकता होगी, कृषि और सहकारिता विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करें कि खाद की पर्याप्त उपलब्धता हो और सभी किसानों को यह आसानी से मिल जाए। यह सुनिश्चित करें कि खाद की कालाबाजारी न हो।

● ग्राम्य विकास, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, समाज कल्याण, नगर विकास, बेसिक शिक्षा, सिंचाई, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व जैसे विभागों की अनेक योजनाएं सीधेतौर पर आम जनता को प्रभावित करने वाली हैं। इनमें बजट आवंटन और व्यय में तेजी की आवश्यकता है।

● मेडिकल कॉलेज में लगाए जा रहे उपकरणों की गुणवत्ता मानक के अनुरूप हो। खराब गुणवत्ता/अधोमानक उपकरणों की आपूर्ति पर संबंधित की जवाबदेही तय की जाए।

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