चंडीगढ़ । पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पटियाला में हुआ खूनी संघर्ष दो समुदायों का नहीं बल्कि राजनीतिक दलों का है। यह अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी, शिव सेना तथा अकाली दल अमृतसर के बीच का विवाद है। पटियाला हिंसा के बाद पहली बार मीडिया को जारी बयान में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह दो समुदायों की नहीं बल्कि राजनीतिक दलों की लड़ाई थी। जिसे धर्म व समुदाय का रंग दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पटियाला प्रकरण के बाद जहां पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया है, वहीं अलग-अलग चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कइयों की तलाश में लगातार छापे मारे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा, अकाली दल, अकाली दल (अमृतसर) समेत कई राजनीतिक दल ऐसे हैं, जिन्हें पंजाब का विकास हजम नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का उसी दिन मंदिर में जाना अपने-आप में सारे हालात बयां करता है। मान ने कहा कि पंजाब पुलिस को समयबद्ध जांच करने के निर्देश जारी किए गए हैं। वह खुद पल-पल की अपडेट ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में सभी आरोपितों को गिरफ्तार करके इसके पीछे की साजिश को बेनकाब करके पंजाब वासियों के सामने रखा जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री को दी राज्य में कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने की सलाह
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को शुक्रवार को पटियाला में हुई हिंसा की पृष्ठभूमि में अपने राज्य में कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने की सलाह दी। केंद्रीय मंत्री ने शनिवार को ट्वीट कर कहा, “पटियाला में तलवारें, पत्थर और अलगाववादी आवाजें चिंता का विषय हैं। ‘दिल्ली मॉडल’ का महिमामंडन करने और अपना अधिकांश समय चुनावी राज्यों में बिताने के बजाय, पंजाब के मुख्यमंत्री को राज्य में कानून और व्यवस्था और शांति और सद्भाव को प्राथमिकता देनी चाहिए।”उल्लेखनीय है कि पंजाब के पटियाला में खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च के दौरान एक धार्मिक स्थल के बाहर दो समूहों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें दो पुलिसकर्मियों सहित चार लोग घायल हुए हैं।



