
रायपुर,छत्तीसगढ़ । बस्तर के जगदलपुर में आयोजित भरोसे का सम्मेलन में मुख्यमंत्री बघेल व विशिष्ट अतिथि श्रीमती प्रियंका गांधी ने शासकीय विभागों के विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया। स्टालों के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री एवं विशिष्ट अतिथि मिलेट मिशन व मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के स्टाल पर रूके और बारीकी से इसका निरीक्षण किया। श्रीमती गांधी ने इस दौरान मिलेट्स प्रसंस्करण की जानकारी भी ली। विशिष्ट अतिथि ने मिलेट्स से बने उत्पादों की तारीफ करते हुए स्व सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत की। स्व सहायता समूह की महिलाओं ने विशिष्ट अतिथि को मिलेट्स से बने उत्पादों से भरी एक डलिया भी भेंट की जिसे उन्होने सहर्ष स्वीकार किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में मिलेट्स को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कोदो, कुटकी और रागी का ना सिर्फ समर्थन मूल्य घोषित किया गया अपितु समर्थन मूल्य पर खरीदी भी की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से प्रदेश में कोदो, कुटकी एंव रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित कर उपार्जन किया जा रहा है। इस पहल से छत्तीसगढ़ में मिलेट्स का रकबा डेढ़ गुना बढ़ा है और उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी हुयी है।छत्तीसगढ़ में मिलेट्स यहां के आदिवासी समुदाय के दैनिक आहार का पारंपरिक रूप से अहम हिस्सा रहे हैं। आज भी बस्तर में रागी का माड़िया पेज बड़े चाव से पिया जाता है। छत्तीसगढ़ के वनांचलों में मिलेट्स की भरपूर खेती होती है। इसे देखते हुए मोटे अनाजों के उत्पादन और उपभोग को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य में मिलेट मिशन चलाया जा रहा है।
कुपोषण दूर करने में सहायक
छत्तीसगढ़ में शुरू हुए मिलेट मिशन का मुख्य उद्देश्य जिसका प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में मिलेट (कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार इत्यादि) की खेती के साथ-साथ मिलेट के प्रसंस्करण को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त दैनिक आहार में मिलेट्स के उपयोग को प्रोत्साहित कर कुपोषण दूर करना है।प्रदेश में आंगनबाड़ी और मिड-डे मील में भी मिलेट्स को शामिल किया गया है। स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील में मिलेट्स से बनने वाले व्यंजन परोसे जा रहे है। इनमें मिलेट्स से बनी कुकीज, लड्डू और सोया चिक्की जैसे व्यंजनों को शामिल किया गया है।मुख्यमंत्री सुपोषण योजना से अब तक 2 लाख 65 हजार बच्चे कुपोषण मुक्त हो चुके हैं और डेढ़ लाख महिलाएं एनीमिया मुक्त हो चुकी हैं.
नथिया-नवागांव में बड़ा प्रोसेसिंग प्लांट
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नथिया-नवागांव में मिलेट्स का सबसे बड़ा प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जा चुका है, जो कि एशिया की सबसे बड़ी मिलेट्स प्रसंस्करण इकाई है। अब तक राज्य के 10 जिलों में 12 लघु मिलेट प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं। गौठानों में विकसित किए जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में मिलेट्स प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में मिलेट्स से बने व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए दोपहर भोज का भी आयोजन किया जा चुका है। रायगढ़ जिले के खरसिया में बीते दिनों प्रदेश के पहले मोबाईल मिलेट कैफे ’मिलेट ऑन व्हील्स का शुभारंभ भी किया है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों, फूड ब्लॉगर्स और युवाओं की यह पहली पसंद बन गए हैं।
छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत
छत्तीसगढ़ में मिलेट्स की खेती के लिए राज्य को राष्ट्रीय स्तर का पोषक अनाज अवार्ड 2022 सम्मान भी मिल चुका है। मिलेट मिशन के चलते राज्य में कोदो, कुटकी और रागी (मिलेट्स) की खेती को लेकर किसानों का रूझान बहुत तेजी से बढ़ा है। पहले औने-पौने दाम में बिकने वाला मिलेट्स अब छत्तीसगढ़ राज्य में अच्छे दामों में बिकने लगा है। बीते एक सालों में प्रमाणित बीज उत्पादक किसानों की संख्या में लगभग 5 गुना और इससे होने वाली आय में चार गुना की वृद्धि हुई है।प्रदेश में कोदो, कुटकी और रागी की खेती का रकबा 69 हजार हेक्टेयर से बढ़कर एक लाख 88 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। मिलेट उत्पादक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। इस किसानों को भी 9000 रूपए प्रति एकड़ की मान से आदान सहायता दी जा रही है।
बस्तर के लोग अच्छे, उनमें हुनर भी बेहतरीन : प्रियंका गांधी
भरोसे का सम्मेलन में जगदलपुर में मुख्यमंत्री बघेल के साथ कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्रीमती प्रियंका गांधी ने योजनाओं के हितग्राहियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर में बने उत्पाद बेहतरीन हैं। बस्तर का काजू, मिलेट्स से बनी चिकी और बिस्किट का स्वाद लाजवाब है। यहां के लोग जितने अच्छे हैं उनकी कारीगरी भी उतनी ही बढ़िया है । बस्तर के लोग रिश्ता जोड़ना जल्दी जानते हैं । एक स्टॉल में एक महिला ने मुझे अपने हाथ से बनाई आइसक्रीम दी लेकिन कहा दीदी आपको अभी मंच से बोलना है आप इसे मत खाइए नहीं तो आपका गला खराब हो जाएगा । ये आत्मीयता है बस्तर के लोगों की । आज सरकार की मदद से बस्तर में बने उत्पादों को बाजार मिला है और कारीगरों को लाभ हो रहा है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रीमती गांधी को विभिन्न स्टॉल में लगे उत्पादों की जानकारी दी । एसएचजी की महिलाओं ने श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा को कोसा की साड़ी भेंट की । आमचो बस्तर स्टॉल में श्रीमती गांधी ने मिट्टी एवं तांबे के बर्तन की ढलाई करते कारीगरों से बात की । उन्होंने मनवा नवा नार स्टॉल पर बस्तर में राज्य सरकार के विश्वास, विकास और सुरक्षा की उपलब्धियों को सराहा ।श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा ने बस्तर फाइटर्स की महिला जवानों से बात की और उनके साथ फोटो खिंचवाई ।
प्रदर्शनी में बस्तर संभाग के जिलों द्वारा जिले में महिला समूहों द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों या नवाचार योजनाओं से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। जिसमें बस्तर जिले ने प्रदर्शनी में फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से बस्तर संभाग में नेहरू और गांधी परिवार की बस्तर संभाग में की गई यात्राओं को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा बस्तर काॅफी उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक का जीवंत प्रदर्शन, बस्तर कलागुड़ी हस्तशिल्प द्वारा लकड़ी की नक्काशी, जिला प्रशासन के नवाचार थींक-बी से संबंद्ध माम्स फूड, पुलिस विभाग की सामुदायिक पुलिसिंग मनवा नवानार, टसर कोसा से धागाकरण एवं वस्त्र बुनाई, बस्तर फूड फर्म द्वारा महुआ की चाय और अन्य उत्पाद, वन विभाग के ईमली और काजू प्रसंस्करण निर्माण का प्रदर्शन किया।
सीएम ने किया आदिवासी परब सम्मान निधि योजना’ का शुभारंभ
मुख्यमंत्री बघेल ने गुरुवार को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर के लाल बाग में आयोजित ’भरोसे के सम्मेलन’ में विशिष्ट अतिथि श्रीमती प्रियंका गांधी की उपस्थिति में ’मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजना’ का शुभारंभ किया।इस योजना के तहत आदिवासी पर्व एवं त्योहारों के गरिमामय आयोजन के लिए राज्य शासन द्वारा ग्राम पंचायतों को अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। योजना के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल ने बस्तर संभाग के 1840 ग्राम पंचायतों को प्रथम किश्त के रूप में 5-5 हजार रूपए की राशि जारी की।
मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजना’ के तहत अनुसूचित क्षेत्र के ग्रामों में जनजातियों के उत्सवों, त्यौहारों के मेला, मड़ई, जात्रा पर्व, सरना पूजा, देवगुड़ी, नवाखाई, छेरछेरा, अक्ती, हरेली आदि उत्सवों, त्यौहारों, संस्कृति को संरक्षित करने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रति वर्ष 10,000 रूपए की अनुदान राशि दो किश्तों में जारी की जायेगी।मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि का उद्देश्य आदिवासियों के तीज त्यौहारों की संस्कृति एवं परम्परा को संरक्षित करना एवं इन त्यौहारों, उत्सवों को मूल स्वरूप में आगामी पीढ़ी को हस्तांतरण तथा सांस्कृतिक परम्पराओं का अभिलेखन करना है।
मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा, बजट में है प्रावधान
मुख्यमंत्री बघेल ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज की संस्कृति और पर्वों की परम्परा के संरक्षण के लिए ’मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजना’ की घोषणा की थी। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में इस योजना के लिए 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। यह योजना छत्तीसगढ़ के समस्त अनुसूचित क्षेत्र (अनुसूचित जनजाति विकासखण्ड) में लागू होगी।
योजना का क्रियान्वयन
योजना की इकाई ग्राम (गांव) होंगे। योजना के लिए नोडल एजेंसी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत होंगे।
योजना के क्रियान्वयन के लिए ग्राम स्तरीय शासी निकाय एवं अनुभाग स्तरीय शासी निकाय का गठन किया जाएगा। निकाय का स्वरूप निम्नानुसार होगा-
ग्राम स्तरीय शासी निकाय में संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच अध्यक्ष होंगे। गायता, पुजारी, सिरहा, गुनिया, बैगा सदस्य होंगे। ग्राम स्तरीय शासी निकाय में ग्राम के दो बुजुर्ग, दो महिला, ग्राम कोटवार, पटेल और ग्राम पंचायत के सचिव सदस्य होंगे।
जनपद स्तरीय शासी निकाय में
अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व अध्यक्ष होंगे और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत इसके सदस्य सचिव होंगे। जनपद स्तरीय शासी निकाय में जनपद पंचायत के अध्यक्ष, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, तहसीलदार सदस्य होंगे।ग्राम में कौन-कौन से त्यौहारों में इस राशि का उपयोग किया जाना है इसका निर्धारण ग्राम स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। जनपद स्तर पर इस योजना के क्रियान्वयन के निगरानी एवं समन्वय हेतु जनपद स्तरीय शासी निकाय उत्तरदायी होगा।(वीएनएस)



