
हरिद्वार । धर्म और भारत समानार्थी शब्द हैं। भारत उठेगा तो धर्म से उठेगा। आगे बढ़ेगा तो धर्म से बढ़ेगा। लंबे विपरीत कालखंड के बाद भारत अब पटरी पर चल पड़ा है और लक्ष्य पर पहुंचे बिना रुकने वाला नहीं है। यह उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने व्यक्त किए। सरसंघचालक डा. भागवत बुधवार को यहां श्री कृष्ण निवास और पूर्णानन्द आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय वेदांत सम्मेलन और गुरुत्रय मंदिर लोकार्पण समारोह को मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
सरसंघचालक डा. भागवत ने कहा कि स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद ने जिस धर्म प्राण भारत की भविष्यवाणी की थी, उस भारत को वर्तमान पीढ़ी के लोग अपनी आंखों से देखेंगे। उन्होंने देश भर से आए धर्म प्रेमियों से कहा कि हमारे संत और धर्माचार्य समाज के बीच सेतु हैं। संत अपने प्रबोधन, आचरण, उदाहरण और आत्मीयता से समाज का मार्गदर्शन करें और धर्म पथ को आगे बढ़ाएं। हां, इस कार्य में अगर कहीं बाधा आती है तो उसे दूर करने का काम डा. हेडगेवार ने संघ को दिया है।
उन्होंने कहा कि 1000 वर्ष से हम को समाप्त करने का प्रयास चल रहा है, मगर अपनी संस्कृति धर्म और संस्कारों के कारण हम समाप्त नहीं हुए। भारत धर्म प्राण राष्ट्र है। कुछ वर्षों से सनातन धर्म को मानने वालों में नवजागरण हुआ है। ऐसे में भारत का उत्थान अवश्य संभावी है। भारत माता की संतान होने के नाते सनातन धर्म का अनुपालन और उत्थान करना हमारा ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भारत उत्थान की पटरी पर चल पड़ा है। इसमें किसी संशय की आवश्यकता नहीं है। उत्थान के इस पथ पर अब केवल एक्सीलेटर है ब्रेक का कोई काम नहीं है। अतः कोई बीच में आने का प्रयास न करें।
डा.भागवत ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के परित्राणाय साधूनां, विनाशाय च दुष्कृतामम् के मार्ग पर चलकर हम अहिंसा का पालन तो करेंगे मगर अपनी रक्षा के लिए शक्ति का संवर्धन और प्रयोग भी करेंगे। स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा जिस वैभवशाली भारत की भविष्यवाणी इन संताें ने की थी, उस भारत को वर्तमान पीढ़ी के लोग अपनी आंखों से देखेंगे।
संत ने बोले, हर हाल में समाज और भारत को सुदृढ़ किया जाएगा-
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि आदि शंकराचार्य के तुल्य धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए महानिर्वाणी अखाड़ा ने ही सर्वप्रथम आचार्य महामंडलेश्वर के दायित्व की परंपरा शुरू की थी। उसी परंपरा का पालन करते हुए संतों को समाज के बीच जाकर लोगों को जगाने की आवश्यकता है। निश्चित रूप से सनातन धर्म और भारत राष्ट्र की पुनर्प्रतिष्ठा का समय आ गया है। स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की भागवत दृष्टि के अनुसार समरसता, समता और सद्भाव का पालन करते हुए आज हिन्दू समाज को इदम् राष्ट्राय इदं नमम के मंत्र पर चलने की आवश्यकता है।
सूरत गिरी बंगले के परमाध्यक्ष स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि राष्ट्र, धर्म ,संस्कृति और जन यह चारों सनातन धर्म के स्तंभ हैं, इनकी मजबूती से ही भारत सुदृढ़ और स्वाबलंबी बनेगा। निर्वाणी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती ने कहा हमारे राजाओं ने जो भूल बाबर के समय और अंग्रेजों के आने के समय की थी, उसे सुधारने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिन्दू समाज को सर्वधर्म समभाव और सेकुलरिज्म के विचार से सावधान रहना होगा।
समारोह को स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी हरिचेतनानंद आदि ने भी संबोधित किया। वेदांत सम्मेलन और लोकार्पण समारोह के सूत्रधार महामंडलेश्वर स्वामी गिरिधर गिरी ने सभी का आभार व्यक्त किया। हरिद्वार के सन्यास मार्ग स्थित श्री कृष्ण निवास और पूर्णानन्द आश्रम में विगत 68 वर्षों से चली आ रही अखिल भारतीय वेदान्त सम्मेलन की परंपरा के अवसर पर श्री गुरु मंदिर का लोकार्पण हुआ।
मंदिर में आदि जगतगुरु शंकराचार्य के साथ गुरुत्रय महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज, स्वामी पूर्णानंद महाराज और स्वामी दिव्यानंद महाराज की मूर्तियों की स्थापना की गई है। आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी गिरिधर गिरी महाराज के सानिध्य में यह आयोजन हजारों भक्तों की उपस्थिति में भव्यता के साथ हुआ। इस दौरान निर्मल अखाड़ा के श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज, हरिचेतनानंद महाराज आदि सैकड़ों संत मौजूद रहे।(हि.स.)



