
सरकार ने आज संसद में बताया कि उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश और राजस्थान में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली आबादी का अनुपात क्रमश: 43.50, मध्य प्रदेश में 49.01 और राजस्थान में 56.95 प्रतिशत है।दूरसंचार राज्य मंत्री देवूसिंह चौहान ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि उत्तर प्रदेश में ग्रामीण इलाकों में प्रति सैकड़ा आबादी में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों का अनुपात 28.74, मध्य प्रदेश में 28.73 और राजस्थान में 38.07 है। इसी तरह इन तीनों राज्यों में शहरी आबादी में यह अनुपात क्रमश: 89.40, 100.56 और 109.64 प्रतिशत है।उत्तर प्रदेश के आंकड़े में उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के आंकड़े में छत्तीसगढ़ का डाटा भी शामिल है।
श्री चौहान ने बताया कि देश की सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने की योजना चरणबद्ध तरीकों से चलायी जा रही है। भारतनेट के क्षेत्राधिकार को 30 जून 2021 को बढ़ा कर उत्तर प्रदेश सहित देश की सभी ग्राम पंचायतों के स्तर से आगे बढ़ाकर सभी बसे हुए गावों तक कर दिया गया है।उन्होंने बताया कि पहली नवंबर 2021 के अनुसार देश की कुल 1,66,088 ग्राम पंचायतों को ब्राॅडबैंड सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है। इस योजना के तहत अगस्त 2023 तक सभी गावों तक ब्राॅडबैंड दूरसंचार सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है।उन्होंने कहा कि भारत नेट के तहत सृजित अवसंरचना राष्ट्रीय परिसम्पत्ति है और सभी सेवा प्रदाताओं को बगैरभेद भाव के इसका इस्तेमाल करने की छूट है। वे सभी नागरिकों को संपर्क सुविधा प्रदान करने के लिए इस परिसम्पत्ति का उपयोग कर सके हैं।श्री चौहान ने यह भी बताया कि ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक स्थल पर मुफ्त वाई-फाई सुविधा सुलभ कराने के पीएम- वानी फ्रेम वर्क के तहत उत्तर प्रदेश में लगभग 4,323 हाट स्पाट (अभिगमन बिंदु) स्थापित किए जा चुके हैं।



