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नीति आयोग की प्रशासनिक परिषद की बैठक में पीएम मोदी बोले- तेजी से आगे बढ़ने की चाह में देश ने बताया “मूड ऑफ द नेशन”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीति आयोग की प्रशासनिक परिषद की छठी बैठक की अध्यक्षता की। बता दें इस बैठक में पहली बार लद्दाख शामिल हुआ तो वहीं जम्मू कश्मीर भी यूटी के रूप में भागीदार बना। बैठक में राज्यों और यूटी के मुख्यमंत्रियों के साथ ही अन्य यूटी की विधायिकाएं भी शामिल हुईं। बैठक के एजेंडे में कृषि, अवसंरचना, विनिर्माण, पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही साथ मानव संसाधन विकास, जमीनी स्तर पर सेवाओं की आपूर्ति पर भी विचार विमर्श हुआ। आपकी जानाकारी के लिए बता दें प्रशासनिक परिषद अंतर क्षेत्रीय, अंतर विभागीय विचार के लिए एक मंच उपलब्ध कराता है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा- “तेजी से आगे बढ़ने की चाह में देश ने अपना “मूड ऑफ द नेशन” बता दिया है। देश मन बना चुका है, देश तेजी से आगे बढ़ना चाहता है, देश अब समय नहीं गवाना चाहता है और कुल मिलाकर देश के मन को बनाने में देश का युवा मन बहुत बढ़ी भूमिका अदा कर रहा है। तभी बदलाव के प्रति एक नया आकर्षण पैदा हुआ है।”

केंद्र और राज्य साथ मिलकर करें कार्य

पीएम मोदी ने कहा केंद्र और राज्य साथ मिलकर कार्य करें और निश्चित दिशा में आगे बढ़े, यही देश की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने कहा कॉपरेटिव फेडरलिज्म को और अधिक सार्थक बनाना है और यही नहीं हमें प्रयत्न पूर्वक कॉम्पटीटिव कॉपरेटिव फेडरलिज्म को न सिर्फ राज्यों के बीच बल्कि डिस्ट्रिक्ट तक ले जाना है, ताकि विकास की स्पर्धा निरंतर चलती रहे। विकास एक प्राइम एजेंडा बना रहे। देश को नई ऊंचाई पर ले जाने की स्पर्धा कैसे बढ़े ये मंथन करने के लिए पहले भी हमने चर्चा की है और आज भी यह स्वभाविक है कि इस सम्मिट में उस पर बल दिया जाएगा। हमने कोरोना काल खंड में देखा है कि कैसे राज्यों और केंद्र सरकार ने मिलकर काम किया। देश सफल हुआ और दुनिया में भी भारत की एक अच्छी छवी का निर्माण हुई।

देश अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे करने जा रहा है

उन्होंने कहा आज जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे करने जा रहा है तब इस गवर्निंग काउंसलिंग की बैठक और भी महत्वपूर्ण हो गई है। मैं राज्यों से भी आग्रह करूंगा कि आजादी के 75 वर्ष के लिए अपने-अपने राज्यों में समाज के सभी लोगों को जोड़कर समितियों का निर्माण करें। इन एजेंडा पॉइंट्स का चयन देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इन एजेंडा पॉइंट्स पर राज्यों से सुझाव लेने के लिए राज्यों को तैयारी का पर्याप्त समय देने के लिए एक नया प्रयोग शुरू किया गया कि इस बार नीति आयोग के साथ राज्यों के सभी प्रमुख अधिकारियों के साथ एक अच्छा वर्क शॉप भी हुआ। उस चर्चा में जो पॉइंट्स सामने आए उन्हें भी इस चर्चा में जोड़ने के लिए हमने प्रयास किया है। इस प्रकार राज्यों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए एजेंडा बना है। इस प्रकिया से गुजरने की वजह से इस बार गवर्निंग काउंसिल के एजेंडा पॉइंट्स बहुत स्पेसिफिक हैं जो हमारी चर्चा को और सारगर्भित बनाएंगे।

गरीबों के जीवन में आया अभूतपूर्व बदलाव

पीएम मोदी ने कहा पिछले कुछ सालों में हमने देखा है कि हमारे देश के गरीबों को सशक्त करने की दिशा में बैंक खाते खुलने से, टीकाकरण बढ़ने से, स्वास्थ्य सुविधा बढ़ने से, मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलने से, मुफ्त गैस कनेक्शन से, मुफ्त शौचालय निर्माण से खासतौर पर गरीबों के जीवन में एक अभूतपूर्व बदलाव नजर आ रहा है। देश में अभी हर गरीब को पक्की छत देने का अभियान भी तेज गति से चल रहा है। कुछ राज्य बहुत अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं तो वहीं कुछ राज्यों को अपनी गति बढ़ाने की आवश्यकता भी है। 2014 के बाद से देखें तो गांव और शहरों को मिलाकर 2 करोड़ 40 लाख से ज्यादा घरों का निर्माण पूरा किया गया है।

देश के 6 शहरों में आधुनिक टेक्नोलॉजी से घर बनाने का चल रहा अभियान

प्रधानमंत्री ने कहा देश के 6 शहरों में आधुनिक टेक्नोलॉजी से घर बनाने का एक अभियान चल रहा है। एक आधे महीने के भीतर-भीतर नई टेक्नोलॉजी से तेजी से अच्छी क्वालिटी के मजबूत मकान बनाने की दिशा में देश के 6 शहरों में नए मॉडल तैयार होंगे। वो भी इस काम के लिए हर राज्य को उपयोगी होने वाला है। उसी प्रकार से पानी की कमी और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारी लोगों के विकास में बाधा न बने, कुपोषण की समस्याओं को वो बढ़ाए नहीं, इस दिशा में भी मिशन मोड में काम हो रहा है। जल जीवन मिशन शुरू होने के बाद से पिछले 18 महीनों में ही साढ़े तीन करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों को पाइप वाटर सप्लाई से जोड़ा जा चुका है।

गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए “भारत नेट स्कीम” बनी बदलाव का माध्यम

उन्होंने बताया कि गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए “भारत नेट स्कीम” एक बड़े बदलाव का माध्यम बन रही है। ऐसी सारी योजनाओं में जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी तो काम की गति भी बढ़ेगी और अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचना भी सुनिश्चित हो जाएगा।

इस वर्ष के बजट पर आया पॉजिटिव रिस्पॉन्स

पीएम मोदी ने कहा इस वर्ष के बजट पर जिस तरह का एक पॉजिटिव रिस्पॉन्स आया है व चारों तरफ से एक नई आशा का वातावरण पैदा हुआ है उसने जता दिया है कि “मूड ऑफ द नेशन” क्या है। देश मन बना चुका है, देश तेजी से आगे बढ़ना चाहता है, देश अब समय नहीं गवाना चाहता है और कुल मिलाकर देश के मन को बनाने में देश का युवा मन बहुत बढ़ी भूमिका अदा कर रहा है और तभी बदलाव के प्रति एक नया आकर्षण पैदा हुआ है।

प्राइवेट सेक्टर देश की विकास यात्रा में ज्यादा उत्साह से आए आगे

प्रधानमंत्री ने कहा देश का प्राइवेट सेक्टर देश की विकास यात्रा में और ज्यादा उत्साह से आगे आ रहा है। सरकार के नाते हमें इस उत्साह का, प्राइवेट सेक्टर की उर्जा का सम्मान भी करना है और उसे आत्मनिर्भर भारत में उतना ही अवसर भी देना है। आत्मनिर्भर भारत एक ऐसे नए भारत की तरफ कदम है जहां हर व्यक्ति, हर संस्था, हर उद्यम को अपनी क्षमतानुसार आगे बढ़ने का अवसर मिले। आत्मनिर्भर भारत अभियान एक ऐसे भारत का निर्माण का मार्ग है जो न केवल अपनी आवश्यक्ताओं के लिए बल्कि विश्व के लिए भी उत्पादन करे और यह उत्पादन विश्व श्रेष्ठता की कसौटी पर भी खरा उतरे। इसलिए मैं हमेशा कहता हूं “जीरो डिफेक्ट- जीरो इफेक्ट”

युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर करना होगा काम

पीएम मोदी ने कहा भारत जैसा युवा देश उसकी आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना होगा, इनोवेशन को बढ़ावा देना होगा, टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना होगा, शिक्षा व कौशल के बेहतर अवसर उन्हें देने होंगे। हमें अपने बिज़नेस को एमसएमई को स्टार्टअप्स को और मजबूत करने की जरूरत है। हमारे हर राज्य की अपनी एक खूबी है। हर राज्य के हर जिले के पास अपना हुनर है। सरकार द्वारा देश के सैंकड़ो जिलों के प्रोडक्ट्स को शॉर्ट लिस्ट करके उनके वेल्यू एडिशन के लिए मार्केटिंग और एक्सपोर्ट के लिए उन्हें प्रमोट किया जा रहा है। इससे राज्यों के बीच एक स्वस्थ स्पर्धा अभी प्रारंभ हुईं हैं। इसे हमें आगे बढ़ाना है।

राज्यों से होने वाला एक्सपोर्ट बढ़ाना होगा

पीएम मोदी ने कहा हमें राज्यों के संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करना होगा। राज्यों से होने वाला एक्सपोर्ट को बढ़ाना होगा। हमारे यहां कोस्टल स्टेट्स हैं जहां हम मतस्य उद्योग को यानी ब्लू इकोनॉमी को बढ़ाने के बहुत से अवसर हैं। हमें यहां से विदेशों में मछली निर्यात करने के असीमित अवसर हैं। मैं चाहूंगा कि आप इस बात से परिचित रहें कि केंद्र सरकार ने विभिन्न सेक्टर के लिए एक पीएलआई स्कीम शुरू की है। ये देश में मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाने का बेहतरीन अवसर है। राज्यों को भी इस स्कीम का पूरा लाभ लेते हुए अपने यहां ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करना चाहिए। कॉर्पोरेट टैक्स की दरें कम करने का लाभ भी राज्यों को बढ़-चढ़कर उठाना चाहिए।

इस बार के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए गए फंड की हो रही काफी चर्चा

उन्होंने यह भी कहा कि इस बार के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए गए फंड की भी काफी चर्चा हो रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला यह खर्च देश की अर्थव्यवस्था को कई स्तर पर आगे बढ़ाने का कार्य करेगा, साथ ही रोज़गार के भी बहुत से अवसर पैदा करेगा। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन में राज्यों का हिस्सा 40 प्रतिशत है और इसलिए जरूरी है कि राज्य और केंद्र मिलकर अपने बजट को सिंक्रोनाइज करें। जिन राज्यों का बजट अभी आने वाला है वे इस कार्य को और अधिक प्राथमिकता के साथ कर सकते हैं। केंद्रीय बजट के साथ ही राज्यों का बजट भी विकास को गति देने में व राज्यों को आत्मनिर्भर बनाने में उतना ही अहम है। 15वें वित्त आयोग में लोकल बॉडीज के आर्थिक संसाधनों में बड़ा इज़ाफा होने जा रहा है। स्थानीय स्तर पर गवर्नेंस में सुधार, लोगों के लिए क्वालिटी ऑफ लाइफ और उनके आत्मविश्वास का आधार बनती है।

टेक्नोलॉजी के साथ-साथ जन भागीदारी भी बहुत आवश्यक

पीएम मोदी ने बताया कि इन सुधारों से हमें टेक्नोलॉजी के साथ-साथ जन भागीदारी भी बहुत आवश्यक है। मैं समझता हूं कि पंचायत राज व्यवस्था व नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस कनवर्जेंस तथा आउट कम के लिए जिम्मेदार बनाने का भी समय आ गया है। स्थानीय स्तर पर बदलाव के लिए जिले राज्य और केंद्र एक साथ मिलकर काम करते हैं तो परिणाम कितने सकारात्मक आते हैं इसके लिए आकांक्षी जिलों के उदाहरण हमारे सामने हैं। एस्पेरेशनल डिस्ट्रिक्ट का जो प्रयोग रहा है वह अच्छे परिणाम दे रहा है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में कोरोना के कारण जो गति आनी चाहिए थी वो नहीं आई। लेकिन अब फिर से हम उस पर बल दे सकते हैं।
कृषि अपार क्षमताओं से भरी

पीएम मोदी ने कहा कि कृषि अपार क्षमताओं से भरी हैं लेकिन फिर भी कुछ सच्चाईयां हमें स्वीकर करनी होगी। हम कृषि प्रधान देश कहे जाएं उसके बावजूद भी आज करीब 65-70 हजार करोड़ रुपए का खाद्य तेल हम बाहर से लाते हैं। यह हम बंद कर सकते हैं, हमारे किसानों के खाते में पैसा जा सकता है, इन पैसों का हक़दार हमारा किसान है लेकिन इसके लिए हमारी योजनाएं उस प्रकार से बनानी होंगी। हमने पिछले दिनों दालों में प्रयोग किया उसमें सफलता मिली। अब दाल बाहर से लाने में खर्चा काफी कम हुआ है। ऐसी कई खाद्य चीजें हैं जो बाहर से लाई जा रही हैं। देश के किसानों को ऐसी चीजों के उत्पादन में कोई मुश्किल नहीं है, केवल थोड़े गाइडेंस की आवश्यकता है। बीते वर्षों में कृषि से लेकर, पशुपालन और मत्स्यपालन तक एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसका परिणाम है कि कोरोना के दौर में भी देश के कृषि निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है।

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