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‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने स्वदेशी उत्पादों, प्राकृतिक खेती, डिजिटल स्वास्थ्य और वैज्ञानिक अनुसंधान पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में स्वदेशी उत्पादों, प्राकृतिक खेती, खादी, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती, उत्तराखंड में नदी संरक्षण, ई-संजीवनी के माध्यम से टेली-परामर्श, आईआईटी मद्रास में मस्तिष्क अनुसंधान और पूर्वोत्तर में मिलेट्स की खेती के प्रयासों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने, पर्यावरण संरक्षण, अंगदान, राष्ट्रीय एकता और महर्षि वाल्मीकि तथा भाई परमानंद के योगदान से प्रेरणा लेने की अपील की।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्राकृतिक खेती, पारंपरिक हस्तकला, स्वदेशी उत्पादों, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रयासों का उल्लेख करते हुए इन्हें आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता देने, पारंपरिक फसलों को बढ़ावा देने तथा सामाजिक कार्यों में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ की शुरुआत विजयादशमी के अवसर पर हुई थी और पिछले 12 वर्षों में यह कार्यक्रम देश के सामान्य नागरिकों के परिश्रम, समर्पण, सेवा भावना और असाधारण उपलब्धियों को सामने लाने का माध्यम बना है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में समाज और राष्ट्र के लिए काम करने वाले अनेक लोग ऐसे हैं, जिनके योगदान पर सामान्यतः व्यापक ध्यान नहीं जाता। कार्यक्रम के माध्यम से उनकी प्रेरक कहानियों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

प्राकृतिक खेती और बुनकरी से महिलाओं को मिला रोजगार

प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती और पारंपरिक बुनकरी को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे ‘नव-त्रिंजन’ अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ‘खेती विरासत मिशन’ नामक संस्था इस पहल के माध्यम से रसायन मुक्त कपास की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास के उत्पादन से कपड़ों को रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की आवश्यकता भी कम होती है।

इस पहल के तहत बुनकरी का प्रशिक्षण देने के लिए एक विद्यालय भी शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस प्रशिक्षण से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पहले मजदूरी अथवा घरेलू कामकाज पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब हथकरघे पर शॉल, तौलिए और अन्य कपड़े तैयार कर रही हैं। इससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिले हैं और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।प्रधानमंत्री ने इस पहल से जुड़ी महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना आजीविका के नए अवसर पैदा कर सकता है।

स्थानीय लोगों के प्रयास से हेवल नदी को मिला नया जीवन

पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि नदी में पानी कम होने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने की समस्या सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन तथा ग्रामीणों ने मिलकर संरक्षण अभियान चलाया।

अभियान के तहत वर्षा जल को रोकने, पानी को जमीन में पहुंचाने और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे कार्य किए गए। इन प्रयासों से नदी को नया जीवन देने के साथ कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन में भी सहायता मिली।प्रधानमंत्री ने कहा कि जब समाज सामूहिक जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करता है, तो सकारात्मक बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने दीपावली और छठ जैसे त्योहारों से पहले स्वच्छता अभियानों में भागीदारी बढ़ाने तथा अपने आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने की अपील की।

स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से खुल रहे अंतरराष्ट्रीय बाजार

प्रधानमंत्री ने कहा कि खरीदारी के दौरान स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि स्थानीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं।उन्होंने बिहार के पूर्णिया के मखाने के ग्रीस तक पहुंचने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल के मालदीव निर्यात किए जाने का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे भारतीय किसानों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं।

उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता के साथ उनकी पैकेजिंग को भी महत्वपूर्ण बताया। महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों द्वारा ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों की बिक्री का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी पैकेजिंग में आदिवासी कला को स्थान दिया गया है। इस पैकेजिंग को जापान के प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ से सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख किया।इसके अतिरिक्त, कर्नाटक के एक स्टार्टअप द्वारा बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री तैयार करने की पहल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने नवाचार और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के महत्व पर प्रकाश डाला।

खादी उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री ने खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए बताया कि गांधी जयंती के अवसर पर एक दिन में इन उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये अधिक थी।उन्होंने कहा कि खादी और हस्तशिल्प उत्पादों की खरीद से उन कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है, जिनके श्रम और कौशल से ये उत्पाद तैयार होते हैं। प्रधानमंत्री ने त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों के बनाए सामान को प्राथमिकता देने की अपील की और कहा कि इससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ई-संजीवनी से अब तक लगभग 50 करोड़ टेली-परामर्श

स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के उपयोग पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘ई-संजीवनी’ योजना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से अब तक लगभग 50 करोड़ टेली-परामर्श किए जा चुके हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सेवा से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त करने में मदद मिल रही है। उन्होंने अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के एक बच्चे, लक्षद्वीप के कल्पेनी क्षेत्र के एक बुजुर्ग, लद्दाख के जांस्कर में गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं से जूझ रही एक महिला और नागालैंड के पेरेन क्षेत्र के एक बच्चे के उदाहरण दिए।

इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी ई-संजीवनी के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क कर मरीजों के उपचार में सहायता प्राप्त कर रहे हैं।प्रधानमंत्री ने देशभर में लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और नियमित जांच को बढ़ावा मिल रहा है।

आईआईटी मद्रास में मानव मस्तिष्क अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में स्थापित ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि केंद्र में मानव मस्तिष्क की उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल त्रिआयामी तस्वीरें तैयार करने और उसके विस्तृत अध्ययन के लिए तकनीकी मंच विकसित किया गया है।

इस परियोजना के तहत 100 मानव मस्तिष्कों की त्रिआयामी मैपिंग कर उनका बारीकी से अध्ययन करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्य में ‘परम शक्ति’ सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझना विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है। इससे अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के अध्ययन तथा भविष्य में नए उपचार संबंधी अनुसंधान को दिशा मिल सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना के तहत एकत्र किए जाने वाले आंकड़ों को विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ताओं के लिए ओपन सोर्स के रूप में उपलब्ध कराने की योजना है।

अंगदान से जीवन बचाने और अनुसंधान में मिलती है मदद

प्रधानमंत्री ने अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में शिवानी के गंभीर रूप से प्रभावित होने के बाद उनके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया।प्रधानमंत्री ने इस फैसले को मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अंगदान से जरूरतमंद लोगों का जीवन बचाने के साथ चिकित्सा अनुसंधान को भी मदद मिल सकती है।

आईआईटी मद्रास के स्टार्टअप कर रहे नई तकनीकों पर काम

प्रधानमंत्री ने चेन्नई यात्रा के दौरान युवाओं और शोधकर्ताओं से हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए आईआईटी मद्रास के स्टार्टअप इकोसिस्टम में विकसित हो रहे नवाचारों की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि कुछ टीमें सोने की गुणवत्ता जांचने, बैंक धोखाधड़ी से निकाली गई रकम की वसूली में तेजी लाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग को बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं।इसके अलावा, समुद्र के ऊपर उड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तेजी से चार्ज होने वाली बैटरियों तथा रक्षा तकनीक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल से संबंधित परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया।प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को सही वातावरण, संसाधन और सहयोग मिलने पर वे जटिल समस्याओं के नए समाधान विकसित कर सकते हैं।

फाइबर ऑप्टिक्स के वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी को किया याद

प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी का उल्लेख करते हुए बताया कि 31 अक्टूबर को उनकी 100वीं जयंती मनाई जाएगी। कपानी को फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है।प्रधानमंत्री के अनुसार, प्रकाश को महीन फाइबर के माध्यम से आगे पहुंचाने की तकनीक पर कपानी के अनुसंधान ने संचार क्षेत्र को नई दिशा दी। आज इंटरनेट और डिजिटल संचार के विकास में फाइबर ऑप्टिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने युवाओं से कपानी जैसे वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान के बारे में पढ़ने तथा उनसे प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने की अपील

प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर 31 अक्टूबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ देश की एकता को मजबूत करने और राष्ट्रीय संकल्प को दोहराने का माध्यम है।उन्होंने नागरिकों से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी इससे जोड़ने की अपील की।

पूर्वोत्तर में मोटे अनाज की खेती को मिल रहा नया प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर भारत में मोटे अनाज (मिलेट्स) की पारंपरिक खेती को दोबारा प्रोत्साहित करने के प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के खांडुली गांव में दो महिलाओं ने मिलेट्स से कुकीज, केक, मफिन और शिशु आहार जैसे उत्पाद तैयार करने की पहल की।इन उत्पादों के माध्यम से मिलेट्स की मांग बढ़ने लगी, जिससे किसानों को दोबारा इसकी खेती करने के लिए प्रोत्साहन मिला।

मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स जिले के सादोलपाड़ा गांव में किसान चेकजिंग संगमा द्वारा आधुनिक तरीकों से मिलेट्स की खेती शुरू करने का भी उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई और गांव में इस फसल के प्रति जागरूकता बढ़ी।नागालैंड के केजोमा गांव में भी वर्ष 2024 में मिलेट्स की खेती दोबारा शुरू की गई और वर्ष 2025 में पहला मिलेट्स महोत्सव आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये उदाहरण पारंपरिक फसलों को नए उत्पादों और बाजारों से जोड़ने की संभावनाओं को दर्शाते हैं।

महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संदेश

महर्षि वाल्मीकि जयंती के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने रामायण में निहित सेवा, करुणा, सामाजिक समरसता और निरंतर प्रयास की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं आज भी समाज को महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाती हैं।प्रधानमंत्री ने भगवान राम और माता शबरी के प्रसंग तथा निषादराज के साथ उनकी मित्रता का उल्लेख करते हुए सबको साथ लेकर चलने की भावना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी से जुड़े मंदिरों तथा महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखे गए हवाई अड्डे का भी जिक्र किया।

भाई परमानंद के योगदान को किया याद

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद की 150वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन और योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि भाई परमानंद का आर्य समाज से गहरा जुड़ाव था और उन्होंने दक्षिण अफ्रीका तथा गुयाना में भी सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से काम किया।

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका, गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में उनकी भागीदारी और अंग्रेजों द्वारा उन्हें दी गई काला पानी की सजा का उल्लेख किया। उन्होंने भाई परमानंद की पुस्तक ‘आपबीती : काले पानी की कारावास कहानी’ को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को समझने के लिए उपयोगी बताया।उन्होंने कहा कि सजा पूरी करने के बाद भाई परमानंद ने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने युवाओं से उनके जीवन और आदर्शों के बारे में जानने तथा उनसे प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

त्योहारों पर सुरक्षा और सामाजिक सहभागिता का आह्वान

कार्यक्रम के समापन पर प्रधानमंत्री ने दीपावली, छठ महापर्व और अन्य आगामी त्योहारों के लिए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से स्वस्थ और सुरक्षित रहते हुए परिवार के साथ त्योहार मनाने तथा अपनी खुशियों में दूसरों को भी शामिल करने की अपील की।प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों के सुझाव और संदेश ‘मन की बात’ को नए विषय और दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कार्यक्रम के अगले संस्करण में देशवासियों के नए प्रयासों और प्रेरक कहानियों के साथ फिर संवाद करने की बात कही।

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