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स्‍वस्‍थ होने की दर ने सक्रिय कोविड-19 मामलों को पीछे छोड़ा

डॉ. हर्षवर्धन ने कोविड-19 पर मंत्री समूह (जीओएम) की 17वीं बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली । कोविड की रोकथाम के लिए राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों के साथ भारत सरकार द्वारा एक के पीछे एक उठाए गए सामूहिक, श्रेणीबद्ध, पूर्व-नियोजित और अत्‍यधिक सक्रिय कदमों के परिणामस्‍वरूप, कोविड-19 के स्‍वस्‍थ मामलों की संख्‍या ने सक्रिय कोविड-19 मामलों को पीछे छोड़ दिया है। स्‍वस्‍थ होने वाले लोगों और सक्रिय मामलों के बीच करीब 1 लाख का अंतर हो गया है। आज स्‍वस्‍थ होने वाले मामले सक्रिय मामलों की तुलना में 98,493 अधिक हैं। हांलाकि सक्रिय मामलों की संख्‍या 1,97,387 है,इलाज के बाद स्‍वस्‍थ होने वालों की संख्‍या 2,95,880 है। इस उत्‍साहवर्धक स्थिति के साथ, कोविड मरीजों की स्‍वस्‍थ होने की दर 58.13 प्रतिशत हो गई है।

कोविड-19 की मौजूदा स्थिति और इस पर नियंत्रण के उपायों की समीक्षा की

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज निर्माण भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोविड -19 पर उच्च स्तरीय मंत्री समूह (जीओएम) की 17वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर,नागरिक उड्डयन मंत्री  हरदीप एस. पुरी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री  अश्विनी कुमार चौबे भी शामिल हुए। मंत्री समूह (जीओएम) को देश में कोविड​​-19से संक्रमण के मामलों की वर्तमान स्थिति, उपचार के बाद इस बीमारी से ठीक होने की दर एवं मृत्यु दर,इस बीमारी के दोगुना होने की दर,परीक्षण की गति में सुधार और विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत किए जाने के बारे में जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि अभी आठ राज्यों (महाराष्ट्र,तमिलनाडु,दिल्ली, तेलंगाना, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल) में ही भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों के कुल 85.5%मामले हैं। देश भर में इस बीमारी से होने वाली कुल मौतों में से 87%मौते भी इन्हीं आठ राज्यों में हुईं हैं। बैठक में मंत्री समूह को यह भी बताया गया कि राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए अब तकसार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों/महामारी विज्ञानियों/चिकित्सकों और संयुक्त सचिव स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी वाले 15 केंद्रीय दल को तैनात किया गया है। कोविड-19 की रोकथाम के लिए चल रहे प्रयासों को मजबूत करने के लिए अभी एक अन्य केंद्रीय दल गुजरात,महाराष्ट्र और तेलंगाना का दौरा कर रहा है। मंत्री समूह को संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाने और संभावित हॉटस्पॉट का अनुमान लगाने में इतिहास (आईटीआईएचएएस) और आरोग्य सेतु की उपयोगिता के बारे में भी बताया गया,जिनका कोविड-19पर नियंत्रण के लिए कार्यनीति तैयार करने में राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है।

बैठक में मंत्री समूह को बताया गया कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए लगातार निर्देश दिए जाते हैं उनमें बीमारी पर रोकथाम के सख्त उपाय और निगरानी, परीक्षण क्षमता का पूरा उपयोग करना, सह-रुग्ण और बुजुर्ग लोगों की निगरानी पर ध्यान केंद्रित करना, आरोग्य सेतु जैसे डिजिटल साधनों का लाभ उठाते हुए उभरते हॉटस्पॉट का अनुमान लगाना, रोगियों को अस्पतालों में भर्ती करने की निर्बाध प्रक्रियाएं सुनिश्चित करना, प्रभावी नैदानिक ​​प्रबंधन द्वारा बीमारी से होने वाली मौतों में कमी लाना, बुनियादी ढांचे (गंभीर स्थिति में देखभाल के अनुकूल बेड, ऑक्सीजन,वेंटिलेटर और आवश्यक सामग्री) पर ध्यान केंद्रित करनाऔर यह भी सुनिश्चित करना शामिल है कि गैर-कोविड स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. भार्गवने आईसीएमआर की परीक्षण कार्यनीति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने सीरोलॉजिकल सर्वे और विभिन्न परीक्षणों के माध्यम से प्रति दिन परीक्षण की बढ़ती क्षमता के बारे में बताया। पिछले 24 घंटों में परीक्षण किए गए नमूनों की संख्या बढ़कर 2,20,479 हो गई और इसके साथ ही आज तक परीक्षण किए जा चुके कुल नमूनों की संख्या79,96,707 हो गई है। उन्होंन कहा कि भारत में अब कोविड-19 के लिए 1026 समर्पित डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाएं हैं। इनमें 741सरकारी और 285 निजी प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

मंत्री समूह को देश में बढ़ती चिकित्सा सुविधा व्यवस्था से भी अवगत कराया गया। बैठक में मंत्री समूह को बताया गया कि 27 जून,2020 तक1,76,275 आइसोलेशन बेड,22,940 आईसीयू बेड और 77,268ऑक्सीजन सुविधा युक्त बेड के साथ 1039कोविड समर्पित अस्पताल,1,39,483आइसोलेशन बेड, 11,539 आईसीयू बेड और 51,321 ऑक्सीजन सुविधा युक्त बेड के साथ 2,398कोविड समर्पित स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित किए गए हैं। इसके अलावा देश में कोविड-19 से निपटने के लिए 8,10,621 बेड वाले 8,958 कोविड देखभाल केंद्र उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/केंद्रीय संस्थानों को 185.18 लाख एन95 मास्क और 116.74 लाख व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) भी प्रदान किए हैं।

विशेष अधिकार प्राप्त समूह-10 के अध्यक्ष  के. शिवाजी की एक विस्तृत प्रस्तुति में मंत्री समूह को बताया गया कि कोविड से संबंधित शिकायतों के जल्द समाधान को प्रथामिकता देने के लिए कोविड -19 सार्वजनिक शिकायतों पर निर्धारित निवारण समय आम तौर पर जन शिकायतों को निपटाने के लिए निर्धारित 60 दिनों की तुलना में महज तीन दिन किया गया है। कोविड-19संबंधित सार्वजनिक शिकायतों की विशेष निगरानी के लिए 1 अप्रैल,2020 को ‘कोविड -19’राष्ट्रीय डैशबोर्ड लॉन्च किया गया था। अधिकार प्राप्त समूह ने 30 मार्च से 24 जून,2020 की अवधि के दौरान केंद्रीय मंत्रालयों से संबंधित 77,307 शिकायतों में से 93.84% और राज्यों से संबंधित 53,130 शिकायतों में से 63.11% शिकायतों का निपटारा कर दिया है।

इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव  प्रीति सूदन, ओएसडी (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) राजेश भूषण, सीईओ (नीति आयोग) अमिताभ कांत,सचिव (फार्मा)  पी. डी. वाघेला,सचिव (डीडब्ल्यूएस) परमेश्वरन अय्यर, महानिदेशक, स्वास्थ्य सचिवालय (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) डॉ. राजीव गर्ग, अपर सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय)  आरती आहूजा,अपर सचिव (विदेश मंत्रालय) दम्मू रवि,निदेशक (एनसीडीसी) डॉ एस.के. सिंह ने भी वर्चुअल मीडिया के जरिए भाग लिया।

केंद्र ने दिल्ली में कोविड-19 की रोकथाम की कोशिशें तेज कीं

केंद्र सरकार कोविड-19 महामारी के प्रकोप से निपटने के अपने प्रयासों में राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की मदद करता रहा है। केंद्र सरकार ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने और इस बीमारी से निपटने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को जरूरीमदद दिया है।भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद- (आईसीएमआर)ने अब तक दिल्ली में 12सक्रिय प्रयोगशालाओं को4.7 लाख आरटी-पीसीआर परीक्षण करने के लिए नैदानिक ​​सामग्री की आपूर्ति की है।इसने परीक्षण करने के लिए आवश्यक 1.57 लाख आरएनए निष्कर्षण किट एवं2.84 लाख वीटीएम (वायरल ट्रांसपोर्ट माध्यम) और कोविड -19 नमूनों का संग्रह करने के लिए स्वैब भी प्रदान किए हैं। मामलों के अचानक तेजी से बढ़ते देख आईसीएमआर ने एंटीगन-आधारित रैपिड परीक्षणों को मंजूरी दे दी है और कोविड-19 रोकथाम प्रयासों के तहत दिल्ली सरकार को 50,000 एंटीजन रैपिड टेस्ट किट की आपूर्ति की है। आईसीएमआर ने दिल्ली को ये सभी परीक्षण किट नि:शुल्क प्रदान किए हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मातहतराष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी)नेतकनीकी मार्गदर्शन के जरिए कोविड-19 पर निगरानी रखने और प्रतिक्रिया कार्यनीति के सभी पहलुओं पर दिल्ली सरकार की कोशिशों में मदद की है। इसमें महामारी की शुरूआत मेंक्वारंटाइन सुविधाओं और कोविड देखभाल केंद्रों (सीसीसी) की पहचान और उनका मूल्यांकन,संक्रमण की रोकथाम तथा नियंत्रण सहित निगरानी, संक्रमित व्यक्ति से हुए ​​संपर्कों का पता लगानेतथा प्रयोगशाला पहलुओं पर आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता और खामियों की पहचान करने तथा इसके लिए सुझाए गए समाधानों पर दिल्ली सरकार को आकंडों का सटीक विश्लेषण और समय पर प्रतिपुष्टि (फीडबैक) उपलब्ध कराना शामिल हैं। एनसीडीसी ने आरटी-पीसीआर द्वारा नमूनों के प्रसंस्करण के लिए प्रयोगशाला निदान सहायता भी प्रदान की है,जिसमेंदिल्ली सरकार के प्रयोगशाला कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना भी शामिल है।

एनसीडीसी द्वारा की गई तकनीकी मदद में स्थिति के अनुरूप विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों की कई केंद्रीय टीमों की तैनाती और उसके बाद तदनुरूप सिफारिशें, संशोधित दिल्ली कोविड प्रतिक्रियायोजना के कार्यान्वयन में जिला स्तर की टीमों को तकनीकी मदद उपलब्ध कराने और समन्वय के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की तैनाती, और दिल्ली में कोविड- 19 पर सीरोलॉजिकल प्रबलता अध्ययन की योजना और निष्पादन शामिल हैं। एनसीडीसी की सक्रिय मदद सेसंशोधित दिल्ली कोविड प्रतिक्रिया योजना तैयार की गई है।एनसीडीसी 27 जून,2020 से 10 जुलाई,2020 तक पूरी दिल्ली में सीरोलॉजिकल सर्वे भी करेगा। इसमेंशरीर में रोग-प्रतिकारक (एंटी-बॉडीज) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए 20,000 व्यक्तियों के रक्त के नमूनों का परीक्षण किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्लीमेंबीमारी की रोकथाम के उपायों को आगे बढ़ाने के प्रयास के तहत दिल्ली के छतरपुर में राधा स्वामी सत्संग ब्यास में 10,000 बिस्तर वाला ‘सरदार पटेल कोविड ​​केयर सेंटर’ विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र का पूरा संचालन, जिसमें चिकित्सा कर्मियों की अपेक्षित संख्या की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ)को सौंपा गया हैजिसमें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) सबसे आगे है। लगभग 2,000 बिस्तरों कोतुरंत काम लायक तैयार किया जा रहा है।

धौलाकुआं के पास डीआरडीओ द्वारा निर्मित और सेना के डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ से लैस 1000बिस्तर वाला नया ग्रीन फील्ड अस्पताल अगले सप्ताह से काम करना शुरू कर देगा। इसनया ग्रीन फील्ड अस्पतालका अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के साथ रेफरल संबंध होगा। यह अस्पताल ऑक्सीजन,वेंटिलेटर और आईसीयू से लैस होगा। भारत सरकार ने 11.11 लाख एन 95 मास्क,6.81 लाख पीपीई किट,44.80 लाख एचसीक्यू टैबलेट खरीद कर दिल्ली में इसका वितरण किया है। दिल्ली को425 वेंटिलेटर आवंटित किए गए और उन्हें दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों में लगाया गया है। दिल्ली में 34समर्पित कोविड अस्पताल (डीसीएच), 4 समर्पित कोविड स्वास्थ्य केंद्र (डीसीएचसी),24 समर्पित कोविड स्वास्थ्य केंद्र (डीसीसीसी)हैं,जो कोविड -19 के रोगियों का इलाज उनकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करते हैं। इस प्रकारदिल्ली में कोविड-19 के रोगियों के उपचार में कुल 62स्वास्थ्य केंद्र लगे हुए हैं। दैनिक आधार पर इन स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

दिल्ली सरकार को सलाह दी गई है कि वह प्रत्येक मृत व्यक्ति (कोविड -19 की वजहसे हुई मौत) के संबंध में मूल्यांकन कराकर यह पता लगाए कि मौत से कितने दिनों पहले और कहां से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दैरान यह पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि वह व्यक्ति होम आइसोलेशन में था या नहीं और उस व्यक्ति को सही समय पर अस्पताल लाया गया था या नहीं। दिल्ली में कोविड-19 की वजह से हुई हर मौत की सूचना भारत सरकार को समय से देनी होगी। सभी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कोविड-19 के मृतक मरीजों के शवों को उनके परिजनों को सौंपने और उनका अंतिम संस्कार करने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19के संक्रमण को रोकने के लिए नया नैदानिक ​​प्रबंधन प्रोटोकॉल जारी किया

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड-19 के बारे में मिल रही जानकारी, खासकर प्रभावी दवाओं के संदर्भ में, से तालमेल बनाए रखते हुएआज कोविड-19के संक्रमण को रोकने के लिए नया नैदानिक ​​प्रबंधन प्रोटोकॉल जारी किया है।नए प्रोटोकॉल में मध्यम से गंभीर मामलों के उपचार के लिए मिथाइलप्रेडनिसोलोन के विकल्प के रूप में डेक्सामेथासोन का उपयोग करने का सुझाव शामिल है। यह बदलाव नवीनतम उपलब्ध साक्ष्य और विशेषज्ञ परामर्श पर विचार करने के बाद किया गया है। डेक्सामेथासोन एक कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा है जिसका उपयोग इसके प्रज्वलनरोधी और इम्यूनोसप्रेसेन्ट प्रभावों के लिए कई स्थितियों में किया जाता है। इस दवा का परीक्षण अस्पताल में भर्ती कोविड-19 के मरीजों के साथ रिकवरी क्लिनिकल परीक्षण में किया गया और गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए यह दवा फायदेमंद पाई गई। यह दवा वेंटिलेटर पररखे गए रोगियों में मृत्यु दर को एक तिहाई तक कम करने और ऑक्सीजन थेरेपी से उपचार करा रहे रोगियों में मृत्यु दर को पांचवें हिस्से तक कम करने में सफल पाई गई। यह दवा आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची(एनएलईएम) में शामिल है और यह आसानी से हर जगह उपलब्ध है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिवसुश्री प्रीति सूदन नेसभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को यह नया प्रोटोकॉल भेज दिया है ताकि वे इस नए प्रोटोकॉल और डेक्सामेथासोन दवा की उपलब्धता और उपयोग के लिए आवश्यक व्यवस्था कर सकें। राज्यों से संस्थागत स्तर पर भी इस दवा के इस्तेमाल के लिए कहा गया है।

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