
सेवरही में बाल दिवस पर भव्य बाल मेला, बच्चों में दिखा उत्साह
प्राथमिक विद्यालय गोड़ईता श्रीराम, सेवरही में बाल दिवस पर बाल मेले का आयोजन हुआ। बच्चों ने दुकानें लगाईं, खेल-गतिविधियों में भाग लिया और सीखते हुए आनंद लिया। मुख्य अतिथि ए.आर.पी. जितेंद्र कुमार ने अभिभावकों व शिक्षकों को बच्चों के समग्र विकास हेतु सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।
- प्राथमिक विद्यालय गोड़ईता श्रीराम में खेल, दुकानें और सीख से सजा बाल मेला
सेवरही, कुशीनगर। जनपद कुशीनगर के विकास खण्ड सेवरही अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय गोड़ईता श्रीराम (कोलोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्र/वालवाटिका) में बाल दिवस के अवसर पर बाल मेला का भव्य आयोजन किया गया। पूरे विद्यालय परिसर में उत्साह, रंग-बिरंगी सजावट और बच्चों की खिलखिलाहट से माहौल उल्लासपूर्ण बना रहा।
मुख्य अतिथि ए.आर.पी. जितेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व-प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की मजबूत नींव अभिभावकों की सक्रिय भूमिका से ही संभव है। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चे खेल-खेल में सबसे अधिक सीखते हैं, इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों और खेलों के माध्यम से सीखने का अधिक से अधिक अवसर दें। उन्होंने शिक्षकों से यह भी अपील की कि कोलोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्र को शैक्षणिक गतिविधियों में पूरा सहयोग दिया जाए, ताकि बच्चों के समग्र विकास का लक्ष्य प्रभावी रूप से पूरा हो सके।
बच्चों ने सजाईं दुकानें, की खरीदारी
मेले में बच्चों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
• किसी दुकान पर खिलौने थे,
• तो कहीं टॉफी, बिस्कुट और घरेलू वस्तुएँ,
• कहीं बच्चों ने स्वयं बनाए छोटे हस्तशिल्प प्रदर्शित किए।
इन दुकानों पर बच्चे अपनी पसंद की वस्तुएँ खरीदते दिखे। बच्चों की यह गतिविधि न केवल मनोरंजन का माध्यम थी बल्कि *गिनती, लेन-देन और सामाजिक व्यवहार जैसी मूलभूत क्षमताओं* को भी विकसित करने में सहायक रही।
मनोरंजक खेलों में दिखी प्रतिभा
मेले में रिंग फेंक, गेंद-दूरी, चित्रकारी, मेमोरी गेम सहित कई मनोरंजक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। बच्चों ने उत्साहपूर्वक सभी खेलों में प्रतिभाग किया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
शिक्षक व स्टाफ की सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार, सहायक अध्यापक अजय कुमार चौरसिया, आदर्शकीर्ति गौतम, राममिलन, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, सहायिका, रसोइया स्टाफ तथा अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित, प्रेरणादायक और आनंदपूर्ण वातावरण तैयार किया।
बाल दिवस बना सीख और मस्ती का संगम
संपूर्ण कार्यक्रम दिनभर बच्चों की हंसी, गतिविधियों और सीख से सराबोर रहा। अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, व्यवहारिक ज्ञान व सामाजिकता को बढ़ावा देते हैं।
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