Health

क्षय रोग:वास्तविक जानकारी के लिए अब तक 80 फीसदी से ज्यादा मरीजों की गयी जियो टैगिंग

फिरोजाबाद ।राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए क्षय रोग विभाग द्वारा जनपद में वास्तविक टीबी मरीजों की जानकारी एकत्रित करने के उद्देश्य से मरीजों को जियो टैगिंग से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।सीएमओ डॉ डीके प्रेमी ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को गति देने के साथ ही सफल बनाने के लिए वर्ष 2021 से टीबी मरीजों की जियो टैगिंग का कार्य सुचारू रूप से जारी है।

इसमें एसटीएस (सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर) रोगी की वास्तविक जानकारी प्राप्त कर निक्षय पोर्टल पर अपलोड की जाती है। इसमें स्वास्थ्य कर्मी एसटीएस रोगी के निवास स्थान पर जाकर उसकी लोकेशन अक्षांश और देशांतर भी फीड करता है| इससे यह पता लगता है कि जनपद में किस स्थान पर टीबी रोगी अधिक हैं, साथ ही जिन स्थानों पर मरीज कम है वहां विभाग और अच्छे से सक्रिय होकर मरीज ढूंढ सके|

जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ बृजमोहन ने कहा कि विभाग रोगियों के उपचार और सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। जियो टैगिंग का कार्य भी बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में से एक है। टीबी रोगी की जियो टैगिंग में एसटीएस रोगी के निवास पर जाकर टीम टीबी से होने वाले नुकसान को बताती है और रोगी व उसके परिजनों को उपचार तथा जांच संबंधी जानकारी उपलब्ध कराती है। साथ ही रोगी की लोकेशन एप पर लोड की जाती है जिससे भविष्य में रोगी को सहायता देने में आसानी हो सके।

डीपीपीसीएम मनीष यादव ने बताया कि वर्ष 2021 के मध्य से ही टीबी रोगियों को जियो टैगिंग से जोड़ने का कार्य जारी है। वर्तमान समय में 3100 से अधिक टीबी रोगियों का उपचार जारी है, 80 फीसद से ज्यादा क्षय रोगियों को जियो टैगिंग से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने बताया कि जियो टैगिंग से पता चलता है कि जनपद के किस क्षेत्र में टीबी के रोगी सर्वाधिक हैं इससे समय रहते संबंधित क्षेत्र में बीमारी से रोकथाम के प्रयास किए जा सकें। उन्होंने बताया कि टीबी के संभावित लक्षण वाले लोगों को नजदीकी टीबी अस्पताल तथा टीबी जांच केंद्र पर जांच करानी चाहिए। टीबी की जांच और उपचार पूरी तरह निशुल्क हैं।

नरेंद्र सिंह (परिवर्तित नाम) 27 मक्खनपुर निवासी ने बताया कि अस्पताल से स्वास्थ्य कर्मी आए थे। उन्होंने हमारी सेहत तथा उपचार संबंधी जानकारी ली और दवा न छोड़ने तथा डॉक्टर से परामर्श के बाद जांच कराने को कहा है। नरेंद्र ने कहा कि डाक्टर ने नौ माह तक दवा खाने के लिए कहा है और अभी आठ माह ही हुए हैं, स्वास्थ्य भी ठीक है।

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